सईद जलीली कौन? लारीजानी की मौत के बाद संभालेंगे ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल की कमान
ईरान में सुरक्षा प्रमुख अली लारीजानी की मौत के बाद अब सईद जलीली को सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल की कमान सौंपी गई है.

इजराइली हमले में सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के प्रमुख अली लारीजानी की मौत हो गई है. इजराइल के रक्षा मंत्रालय ने मंगलवार को इसकी घोषणा की, जबकि ईरान ने देर रात इसकी पुष्टि की. 67 वर्षीय लारीजानी अयातुल्ला अली खामेनेई के करीबी सलाहकार थे और युद्ध के दौरान देश की सुरक्षा नीतियों की कमान संभाल रहे थे. उनकी मौत ईरान के शासन पर गहरा आघात मानी जा रही है.
इस घटना के तुरंत बाद ईरान ने सईद जलीली को सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल की कमान सौंप दी है. अब जलीली अमेरिका और इजराइल के साथ चल रहे संघर्ष में सभी प्रमुख फैसले लेंगे. कट्टर विचारधारा के लिए मशहूर जलीली की नियुक्ति से ईरान की नीतियां और सख्त होने की आशंका जताई जा रही है.
कौन हैं सईद जलीली?
ईरान के उत्तर-पूर्वी धार्मिक केंद्र मशहद में 1965 में जन्मे सईद जलीली की पारिवारिक पृष्ठभूमि काफी साधारण रही. उनके पिता स्कूल प्रिंसिपल और फ्रेंच भाषा के शिक्षक थे, जबकि मां अजेरी मूल की हैं. ईरान-इराक युद्ध के दौरान उन्होंने अपना दाहिना पैर गंवा दिया था, जिसके बाद उनके समर्थकों ने उन्हें जिंदा शहीद की उपाधि दी.
परमाणु वार्ताकार के रूप में अहम भूमिका
सरकारी सेवा में आने से पहले जलीली ने अकादमिक क्षेत्र में करियर बनाया. उन्होंने डॉक्टरेट हासिल की और विश्वविद्यालय में पढ़ाया. बाद में विदेश मंत्रालय में विभिन्न पदों पर कार्य किया. 2007 से 2013 तक राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद के कार्यकाल में वे ईरान के मुख्य परमाणु वार्ताकार बने. उस दौर में ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को आगे बढ़ा रहा था, और जलीली ने पश्चिमी ताकतों के साथ बातचीत की अगुवाई की.
कूटनीति में कट्टर छविपश्चिमी अधिकारियों ने अक्सर उन्हें कट्टर विचारधारा वाला व्यक्ति बताया है. वर्तमान सीआईए निदेशक विलियम बर्न्स ने एक बार उन्हें ईरानी क्रांति का सच्चा अनुयायी कहा था.
2013 राष्ट्रपति चुनाव में इतने पर रहा स्थान
जलीली ने घरेलू राजनीति में भी कदम रखा और 2013 में राष्ट्रपति पद का चुनाव लड़ा. कट्टरपंथी धर्मगुरु मोहम्मद तकी मेस्बाह यज्दी का समर्थन मिला, लेकिन वे तीसरे स्थान पर रहे. चुनावी असफलता के बावजूद रूढ़िवादी हलकों में उनका प्रभाव बरकरार है. उत्तराधिकार और रणनीतिक निर्णयों में उनका नाम अक्सर चर्चा में रहता है.
इजराइल के खिलाफ बड़े फैसले की उम्मीद
विश्लेषकों का मानना है कि लारीजानी की मौत के बाद जलीली उनके अस्थायी या स्थायी उत्तराधिकारी के रूप में उभरे हैं, खासकर जब तक मोजतबा खामेनेई नए प्रतिनिधियों की नियुक्ति नहीं करते. जलीली की कमान में इजराइल के तेल अवीव समेत कई शहरों पर एक साथ हमले की खबरें भी आई हैं, जिससे क्षेत्रीय तनाव और बढ़ गया है.


