यात्रियों को लूटने के लिए चलाते थे बस सेवा, दिल्ली पुलिस ने किया गिरोह का भंडाफोड़
दिल्ली पुलिस ने यात्रियों को सस्ते किराए का लालच देकर निजी बस में लूटने वाले गिरोह का खुलासा किया है. आनंद विहार-ISBT इलाके में सक्रिय इस गिरोह के तीन आरोपी गिरफ्तार किए गए, जो दो महीनों से वारदात कर रहे थे.

दिल्ली पुलिस ने एक हैरान करने वाले मामले का खुलासा करते हुए गुरुवार को तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। ये आरोपी कोई आम बस सेवा नहीं चला रहे थे, बल्कि एक निजी बस को केवल यात्रियों से लूटपाट करने के मकसद से चला रहे थे। पुलिस के अनुसार, यह गिरोह पूरी योजना के साथ काम कर रहा था और पिछले करीब दो महीनों से लोगों को अपना शिकार बना रहा था।
पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी 23 सीटों वाली एक निजी बस चलाते थे. वे आनंद विहार रेलवे स्टेशन और आईएसबीटी के आसपास यात्रियों को बहुत कम किराया लेकर बस में बैठाते थे. यात्रियों को यह भरोसा दिलाया जाता था कि उन्हें 30 रुपये जैसे मामूली किराए में मध्य और उत्तरी दिल्ली के इलाकों में छोड़ दिया जाएगा. लेकिन जैसे ही यात्रा शुरू होती, हालात पूरी तरह बदल जाते.
सुनसान रास्तों पर बनाया जाता था शिकार
बस जानबूझकर रात के समय या सुबह बहुत जल्दी चलाई जाती थी, ताकि पुलिस की मौजूदगी कम रहे. बस दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे जैसे रास्तों से होकर गुजरती थी. इसी दौरान यात्रियों को धमकाया जाता, उनके साथ मारपीट की जाती और उनके पैसे व कीमती सामान लूट लिए जाते थे. लूटपाट के बाद पीड़ितों को किसी सुनसान और अनजान जगह पर उतार दिया जाता था.
ऐसे पकड़े गए आरोपी
पुलिस उपायुक्त (मध्य) निधिन वलसन ने बताया कि उन्हें सूचना मिली थी कि आनंद विहार रेलवे स्टेशन और आसपास के इलाकों में एक निजी बस यात्रियों को लूट रही है. इसके बाद स्टेशन हाउस ऑफिसर घनश्याम किशोर की अगुवाई में एक टीम बनाई गई. जांच के दौरान मध्य और उत्तरी दिल्ली से कई शिकायतें सामने आईं. स्थानीय पूछताछ और गश्ती दल की मदद से पुलिस ने राजघाट रेड लाइट के पास बस को घेर लिया. पुलिस ने आरोपियों को उस समय रंगे हाथों पकड़ा, जब वे ट्रैफिक सिग्नल पर बस में मौजूद यात्रियों को धमका रहे थे और उनसे लूटपाट कर रहे थे.
कौन हैं आरोपी
गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान योगेश (41), अरशद (46) और प्रेम शंकर (28) के रूप में हुई है. पुलिस के अनुसार, योगेश बस चालक था और पूरे गिरोह का सरगना भी वही था. अरशद और प्रेम शंकर कंडक्टर और सहायक की भूमिका निभाते थे और लूटपाट के दौरान यात्रियों पर हमला करते थे.
कमाई का पूरा हिसाब
जांच में पता चला है कि योगेश ने यह बस पुरानी दिल्ली के एक अनधिकृत डीलर से सालाना ठेके पर ली थी और इसके लिए रोजाना करीब 1,500 रुपये चुकाता था. पुलिस का कहना है कि बस किराए की यह रकम दो महीनों में यात्रियों से वसूले गए पैसों से ही निकल गई, जो करीब 90 हजार रुपये थी. इसके अलावा आरोपी रोजाना 1,000 से 2,000 रुपये तक की लूट करते थे. अनुमान है कि दो महीनों में गिरोह ने एक लाख रुपये से ज्यादा की अवैध कमाई की.
पहले से आपराधिक रिकॉर्ड
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, मुख्य आरोपी योगेश पहले भी मारपीट, डकैती और शस्त्र अधिनियम से जुड़े मामलों में शामिल रह चुका है. फिलहाल पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस गिरोह ने और कितने लोगों को अपना शिकार बनाया.


