'जनसंख्या के अनुपात पर आधारित होगी पूरी प्रक्रिया', परिसीमन विधेयक को लेकर बोले किरेन रिजिजू
परिसीमन और महिला आरक्षण को लेकर सरकार ने बड़ा भरोसा दिया है, लेकिन दक्षिणी राज्यों की चिंताएं बनी हुई हैं. लोकसभा सीटें बढ़ाने के प्रस्ताव के बीच इस मुद्दे पर सियासी बहस और तेज हो गई है.

देश में परिसीमन को लेकर जारी बहस के बीच केंद्र सरकार की ओर से बड़ा बयान सामने आया है. केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने स्पष्ट किया है कि चाहे परिसीमन हो या महिला आरक्षण, इन फैसलों के बाद भी सभी राज्यों का प्रतिनिधित्व संतुलित और आनुपातिक बना रहेगा. हालांकि, इस मुद्दे पर राजनीतिक हलचल और चिंताएं अभी भी कम नहीं हुई हैं.
केंद्र सरकार तीन दिवसीय विशेष संसदीय सत्र में कई अहम विधेयकों को पारित कराने की तैयारी में है. इनमें महिला आरक्षण विधेयक प्रमुख है, जिसके तहत 2029 से लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का लक्ष्य रखा गया है. इसके अलावा सरकार संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 लाने की योजना बना रही है, जिसमें लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव है.
परिसीमन विधेयक क्या कहता है?
सरकार परिसीमन विधेयक, 2026 को भी आगे बढ़ाना चाहती है. इस विधेयक के तहत नई जनगणना के आंकड़ों के आधार पर निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं को दोबारा तय करने के लिए एक आयोग बनाया जाएगा. इसका मकसद जनसंख्या के अनुसार सीटों का बेहतर बंटवारा करना है.
दक्षिणी राज्यों की चिंता क्यों?
इस प्रस्ताव को लेकर दक्षिण भारत के कई राज्यों ने चिंता जताई है. उनका मानना है कि जनसंख्या कम होने की वजह से भविष्य में उनकी सीटों की हिस्सेदारी घट सकती है, जबकि उत्तरी राज्यों को ज्यादा सीटें मिल सकती हैं. ऐसे में उन्हें डर है कि राष्ट्रीय स्तर पर उनकी राजनीतिक ताकत कमजोर हो सकती है.
रिजिजू का जवाब: ‘कोई नुकसान नहीं होगा’
इन आशंकाओं पर जवाब देते हुए किरण रिजिजू ने कहा कि राज्यों का प्रतिनिधित्व पहले की तरह ही आनुपातिक रहेगा. उन्होंने कहा कि यह पूरी प्रक्रिया जनसंख्या के अनुपात पर आधारित होगी और इसमें किसी राज्य के साथ अन्याय नहीं किया जाएगा. उन्होंने भरोसा दिलाया कि सीटों की कुल संख्या बढ़ने से सभी राज्यों को समान रूप से फायदा मिलेगा.
विपक्ष पर साधा निशाना
रिजिजू ने विपक्षी दलों पर इस मुद्दे को राजनीतिक रंग देने का आरोप लगाया. उनका कहना है कि महिला आरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषय को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि इस विधेयक का विरोध करना आसान नहीं होगा, क्योंकि इससे जुड़ा फैसला राष्ट्रीय हित और प्रतिबद्धता से जुड़ा है.
‘दक्षिणी राज्यों को खुश होना चाहिए’
केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि दक्षिणी राज्यों को इस फैसले से संतुष्ट होना चाहिए, क्योंकि उनकी मौजूदा सीटों में कोई कटौती नहीं की जा रही है. उन्होंने समझाया कि कुल सीटों में 50 प्रतिशत की वृद्धि होगी और हर राज्य की सीटों में भी उसी अनुपात में बढ़ोतरी की जाएगी, जिससे उनका हिस्सा बना रहेगा.
सरकार और विपक्ष के बीच मतभेद
हालांकि सरकार लगातार यह दावा कर रही है कि परिसीमन से किसी राज्य को नुकसान नहीं होगा, लेकिन इंडिया ब्लॉक का मानना है कि इससे दक्षिण और उत्तर-पूर्वी राज्यों का प्रभाव लोकसभा में कम हो सकता है. इसी वजह से इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस तेज हो गई है.


