अकबर रोड दफ्तर खाली करने का नोटिस, कांग्रेस को 28 मार्च तक का समय; कोर्ट जाने की तैयारी

कांग्रेस को अपने ऐतिहासिक 24 अकबर रोड दफ्तर को खाली करने का नोटिस मिला है. 28 मार्च की डेडलाइन के बीच पार्टी अब कानूनी विकल्पों पर विचार कर रही है, जिससे मामला सियासी रूप से गरमा गया है.

Yogita Pandey
Edited By: Yogita Pandey

नई दिल्ली: इंडियन नेशनल कांग्रेस (INC) को दिल्ली स्थित अपने ऐतिहासिक 24 अकबर रोड दफ्तर को लेकर बड़ा झटका लग सकता है. एस्टेट विभाग ने पार्टी को नोटिस जारी कर निर्धारित समय सीमा के भीतर कार्यालय खाली करने का निर्देश दिया है, जिससे सियासी हलचल तेज हो गई है.

सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस को 28 मार्च तक यह दफ्तर खाली करने को कहा गया है. इसके साथ ही इंडियन यूथ कांग्रेस (IYC) के 5 रायसीना रोड स्थित कार्यालय के लिए भी इसी समयसीमा के साथ एक अलग नोटिस जारी किया गया है. इस कदम के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है.

48 साल पुराना मुख्यालय खाली करने के निर्देश

अकबर रोड स्थित यह बंगला लगभग 48 वर्षों तक कांग्रेस पार्टी का मुख्यालय रहा है. यह स्थान पार्टी की कई ऐतिहासिक और राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र रहा है. हालांकि, कांग्रेस ने पिछले साल कोटला मार्ग पर ‘इंदिरा भवन’ में अपना नया कार्यालय शुरू कर दिया था, लेकिन इसके बावजूद पुराना दफ्तर अभी तक पूरी तरह खाली नहीं किया गया है और कई संगठनात्मक कामकाज यहीं से संचालित हो रहे हैं.

दफ्तर का प्रतीकात्मक महत्व

कांग्रेस नेताओं का कहना है कि अकबर रोड स्थित यह दफ्तर सिर्फ एक इमारत नहीं, बल्कि पार्टी की विरासत और पहचान का अहम हिस्सा है. पार्टी पदाधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस संपत्ति के लिए वे बाजार दर के अनुसार किराया चुका रहे हैं. ऐसे में इसे खाली कराने का कदम उनके लिए केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि भावनात्मक और राजनीतिक मुद्दा भी बन गया है.

कोर्ट जाने की तैयारी

पार्टी के भीतर से संकेत मिल रहे हैं कि यदि जबरन बेदखली की कार्रवाई की जाती है, तो कांग्रेस इस मामले में अदालत का रुख कर सकती है. नेताओं का मानना है कि इस फैसले के खिलाफ कानूनी विकल्प अपनाए जाएंगे.

सिंघवी ने बताया 'राजनीतिक कदम'

कांग्रेस सांसद और वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने इस कार्रवाई की आलोचना करते हुए इसे अवैध और राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया है. उन्होंने कहा, यह अवैध और राजनीतिक रूप से प्रेरित है, और इन नोटिसों के खिलाफ सभी कानूनी उपाय किए जाएंगे.

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