अजित पवार प्लेन क्रैश मामले में नया मोड़, रोहित पवार की शिकायत पर दर्ज हुई FIR
अजित पवार प्लेन क्रैश मामले में अब बड़ा मोड़ आ गया है. भतीजे रोहित पवार की शिकायत के बाद 'साजिश' का एंगल सामने आया है, जिस पर जीरो FIR दर्ज कर जांच महाराष्ट्र पुलिस को सौंप दी गई है.

नई दिल्ली: महाराष्ट्र के पूर्व उपमुख्यमंत्री दिवंगत अजित पवार की प्लेन क्रैश में हुई मौत का मामला अब नया मोड़ ले चुका है. इस घटना को लेकर उनके भतीजे रोहित पवार ने गंभीर आरोप लगाते हुए ‘बड़ी आपराधिक साजिश’ की आशंका जताई है, जिसके बाद मामला फिर से चर्चा में आ गया है.
रोहित पवार की शिकायत के आधार पर बेंगलुरु पुलिस ने ‘जीरो एफआईआर’ दर्ज कर ली है और इसे आगे की जांच के लिए महाराष्ट्र पुलिस को सौंप दिया गया है. अधिकारियों के अनुसार, जीरो एफआईआर किसी भी स्थान पर दर्ज की जा सकती है, भले ही घटना कहीं और हुई हो.
28 जनवरी को हुआ था भीषण हादसा
28 जनवरी को पुणे के बारामती एयरपोर्ट के पास एक चार्टर्ड प्लेन क्रैश हुआ था, जिसमें अजित पवार सहित कुल पांच लोगों की मौत हो गई थी. बताया गया कि बॉम्बार्डियर लियरजेट 45 विमान मुंबई से बारामती जा रहा था और इसका संचालन VSR वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड कर रही थी.
'यह हादसा नहीं, बड़ी साजिश'
रोहित पवार ने अपनी शिकायत में कहा है कि यह केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि एक सुनियोजित साजिश हो सकती है. उन्होंने आरोप लगाया कि विमान संचालन में गंभीर लापरवाही बरती गई और सुरक्षा मानकों का उल्लंघन किया गया.
उन्होंने यह भी बताया कि पहले मुंबई के मरीन ड्राइव और बारामती थानों में शिकायत दर्ज कराने की कोशिश की गई थी, लेकिन एफआईआर नहीं लिखी गई. बाद में पुणे सीआईडी ने इसे केवल ‘एक्सीडेंटल डेथ’ के रूप में देखने की बात कही थी.
DGCA रिपोर्ट पर उठे सवाल
रोहित पवार ने नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि VSR कंपनी के विमानों को 'लापरवाह और उड़ान के लिए अयोग्य' पाया गया था.
उनके अनुसार, दुर्घटनाग्रस्त विमान (VT-SSK) लगातार सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करते हुए उड़ाया जा रहा था.
उड़ान घंटों में हेरफेर का आरोप
शिकायत में यह भी दावा किया गया है कि विमान के वास्तविक उड़ान घंटों को छिपाया गया.रोहित पवार के मुताबिक, यह विमान 4915 घंटे उड़ चुका था, जबकि इंजन ओवरहॉल की सीमा 5000 घंटे होती है. इसके बावजूद इसे व्यावसायिक उड़ानों में इस्तेमाल किया गया.उन्होंने यह भी आशंका जताई कि विमान ने 8000 घंटे से अधिक उड़ान भरी हो सकती है, जो गंभीर सुरक्षा उल्लंघन को दर्शाता है.
दस्तावेजों में गड़बड़ी का दावा
रोहित पवार ने DGCA की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि विमान का एयरवर्थनेस सर्टिफिकेट दिसंबर 2021 में जारी किया गया, जबकि रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट दिसंबर 2022 में मिला. इस उलट प्रक्रिया को उन्होंने 'गंभीर प्रशासनिक चूक या रिकॉर्ड में हेरफेर' बताया.
पायलट पर भी गंभीर आरोप
विमान के पायलट सुमित कपूर को लेकर भी शिकायत में गंभीर आरोप लगाए गए हैं. रोहित पवार ने दावा किया कि पायलट का पहले शराब से जुड़े मामलों में रिकॉर्ड रहा है और DGCA ने उनका लाइसेंस तीन साल के लिए निलंबित किया था.
उन्होंने यह भी कहा कि आखिरी समय में मूल क्रू को बदलकर सुमित कपूर और सह-पायलट शांभवी पाठक को उड़ान सौंपी गई, जो संदेह पैदा करता है. साथ ही, दुर्घटना से पहले कॉकपिट रिकॉर्डिंग में सह-पायलट की आवाज सुनाई देने और पायलट के चुप रहने को भी उन्होंने असामान्य बताया.
रनवे चयन और देरी पर सवाल
शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि उड़ान में करीब 70 मिनट की देरी हुई थी और रनवे चयन को लेकर अंतिम समय में बदलाव किया गया. पहले रनवे 29 चुना गया था, लेकिन बाद में रनवे 11 का इस्तेमाल किया गया, जिसे अधिक जोखिम भरा बताया गया है.
अब महाराष्ट्र पुलिस करेगी जांच
बेंगलुरु पुलिस द्वारा दर्ज की गई जीरो एफआईआर अब महाराष्ट्र पुलिस को भेज दी गई है. इस पूरे मामले की विस्तृत जांच अब महाराष्ट्र पुलिस करेगी, जिससे यह मामला एक साधारण विमान दुर्घटना से आगे बढ़कर संभावित साजिश और लापरवाही की जांच का विषय बन गया है.


