अफगानिस्तान से तनाव, फिर भी अमेरिका-ईरान के बीच ‘शांति दूत’ बनेगा पाकिस्तान? ट्रंप ने शेयर की शहबाज की पोस्ट
अमेरिका-ईरान तनाव के बीच पाकिस्तान ने शांति वार्ता की मेजबानी का प्रस्ताव दिया, लेकिन खुद क्षेत्रीय संघर्षों में उलझा होने के कारण उसकी भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं. वहीं ईरान ने फिलहाल किसी औपचारिक बातचीत से इनकार किया है.

नई दिल्ली: मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच एक नया 'डिप्लोमैटिक ड्रामा' देखने को मिल रहा है. अमेरिका और ईरान जैसे बड़े देशों के बीच चल रहे टकराव में अब पाकिस्तान खुद को मध्यस्थ के रूप में पेश कर रहा है. लेकिन सवाल यह है कि क्या पाकिस्तान सच में शांति स्थापित कर पाएगा या यह सिर्फ अंतरराष्ट्रीय मंच पर खुद को दिखाने की कोशिश है?
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सोशल मीडिया पर बयान देते हुए कहा कि उनका देश अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की मेजबानी करने के लिए 'तैयार और सम्मानित' महसूस करेगा. सुनने में यह प्रस्ताव काफी बड़ा लगता है, लेकिन हकीकत यह भी है कि पाकिस्तान खुद कई आंतरिक और बाहरी समस्याओं से जूझ रहा है.
खासकर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जब शरीफ की पोस्ट को शेयर किया, तो इस मुद्दे ने और तूल पकड़ लिया. ऐसा लगा मानो पाकिस्तान अचानक से विश्व राजनीति के केंद्र में आ गया हो. लेकिन क्या सिर्फ एक पोस्ट शेयर होने से कोई देश बड़ी कूटनीतिक ताकत बन जाता है? यह सवाल अभी भी बना हुआ है.
खुद के घर में तनाव, फिर भी ‘मध्यस्थ’ बनने की चाह
सबसे दिलचस्प बात यह है कि पाकिस्तान खुद अपने पड़ोसी अफगानिस्तान के साथ तनाव में उलझा हुआ है. हाल ही में हुए हवाई हमले और बढ़ते टकराव इस बात की ओर इशारा करते हैं कि वह अपने क्षेत्र में ही स्थिरता कायम नहीं कर पाया है.
ईरान ने दिखाया ठंडा रुख
एक तरफ अमेरिका बातचीत की बात कर रहा है, वहीं ईरान ने साफ तौर पर ऐसे किसी भी दावे को खारिज कर दिया है. तेहरान का कहना है कि कोई औपचारिक वार्ता नहीं चल रही है और न ही वह जल्द शुरू होने वाली है. यानी पाकिस्तान की पहल को लेकर भी ईरान खास उत्साहित नजर नहीं आ रहा.
ईरान ने भी साफ कर दिया है कि बिना शर्त वह किसी बातचीत में शामिल नहीं होगा. उसकी मांग है कि पहले प्रतिबंधों में राहत दी जाए, नुकसान की भरपाई हो और भविष्य में किसी भी तरह के हस्तक्षेप की गारंटी मिले. जब तक ये शर्तें पूरी नहीं होतीं, तब तक कोई प्रगति मुश्किल है.
पर्दे के पीछे चल रही कूटनीति
हालांकि, यह भी सच है कि पाकिस्तान अकेला नहीं है. मिस्र और तुर्की जैसे देश भी बैकचैनल के जरिए इस मुद्दे को सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं. संभव है कि इस्लामाबाद में कोई बैठक हो, लेकिन यह अभी सिर्फ संभावनाओं तक ही सीमित है.
कुछ रिपोर्ट्स में बताया गया है कि बातचीत के लिए अलग-अलग तरीके अपनाए जा सकते हैं. एक में अधिकारियों की सीधी बैठक हो सकती है, जबकि दूसरे में बड़े नेताओं के बीच बातचीत का विकल्प रखा गया है. लेकिन यह सब अभी कागजों और चर्चाओं तक ही सीमित है.


