ईरान ने ट्रंप के करीबी नेताओं से बातचीत से किया इनकार, बातचीत के लिए सामने रखी नई शर्तें
ईरान ने अमेरिका के कुछ प्रमुख प्रतिनिधियों के साथ बातचीत से इनकार करते हुए उपराष्ट्रपति जेडी वेंस से सीधे वार्ता की इच्छा जताई है. यह कदम दोनों देशों के बीच बढ़ते अविश्वास और बदले कूटनीतिक रुख को दर्शाता है.

तेहरान: ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच अब कूटनीतिक मोर्चे पर एक नया मोड़ देखने को मिल रहा है. हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने साफ संकेत दिया है कि वह अमेरिका के कुछ प्रमुख प्रतिनिधियों के साथ बातचीत जारी रखने के पक्ष में नहीं है. इसके बजाय, उसने बातचीत के लिए एक नया विकल्प सामने रखा है, जिससे अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई हलचल पैदा हो गई है.
सूत्रों के अनुसार, ईरान ने अमेरिका के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुश्नर के साथ दोबारा बातचीत करने से इनकार कर दिया है. ईरान का मानना है कि इन नेताओं के साथ पहले हुई बातचीत का कोई ठोस नतीजा नहीं निकला. इसके बाद हालात और बिगड़े, जब इजरायल और अमेरिका की सैन्य कार्रवाई सामने आई. ईरान के इस रुख से साफ है कि वह अब उन्हीं लोगों के साथ बातचीत करना चाहता है, जिन पर उसे भरोसा हो और जो समाधान की दिशा में आगे बढ़ सकें.
जेडी वेंस पर जताया भरोसा
दिलचस्प बात यह है कि ईरान ने अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के साथ सीधे बातचीत की इच्छा जताई है. ईरान उन्हें अन्य नेताओं की तुलना में अधिक संतुलित और नरम रुख वाला मानता है. ईरान का मानना है कि वेंस युद्ध को समाप्त करने के पक्ष में हैं और वे बातचीत के जरिए समाधान निकालने में गंभीरता दिखा सकते हैं. इसी कारण, वह उन्हें एक बेहतर वार्ताकार के रूप में देख रहा है.
ईरान के इस फैसले के पीछे एक बड़ा कारण दोनों देशों के बीच घटता विश्वास भी है. पहले की बातचीत विफल होने और उसके बाद सैन्य कार्रवाई होने से आपसी भरोसा कमजोर हुआ है. ऐसे में ईरान अब बातचीत के लिए ज्यादा सतर्क रुख अपना रहा है.
ट्रंप का बयान
वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में कहा था कि उनकी पूरी कूटनीतिक टीम इस बातचीत में शामिल है. उन्होंने बताया कि जेडी वेंस, मार्को रुबियो, जेरेड कुश्नर और स्टीव विटकॉफ सभी इस प्रक्रिया का हिस्सा हैं. ट्रंप ने यह भी दावा किया कि अमेरिका इस संघर्ष में मजबूत स्थिति में है और उसने ईरान की सैन्य ताकत को काफी नुकसान पहुंचाया है.
हालांकि, इन दावों पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं. व्हाइट हाउस की ओर से स्पष्ट किया गया है कि अमेरिका की तरफ से बातचीत कौन करेगा, इसका अंतिम फैसला राष्ट्रपति ही लेते हैं. प्रेस सचिव ने कहा कि इस मामले में निर्णय का अधिकार केवल ट्रंप के पास है..


