गुजरात विधानसभा में UCC विधेयक पास, लिव-इन रिलेशनशिप का पंजीकरण अनिवार्य; विपक्ष ने जताया विरोध

गुजरात विधानसभा ने समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक पारित कर बड़ा कदम उठाया है. इस कानून के तहत अब विवाह और लिव-इन रिलेशनशिप का पंजीकरण अनिवार्य होगा, जिसे लेकर सियासी घमासान भी तेज हो गया है.

Yogita Pandey
Edited By: Yogita Pandey

नई दिल्ली: गुजरात में समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर बड़ा फैसला लिया गया है. राज्य विधानसभा ने लंबी बहस के बाद इस महत्वपूर्ण विधेयक को पारित कर दिया, जिससे विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे मामलों के लिए एक समान कानूनी ढांचा लागू करने का रास्ता साफ हो गया है.

करीब सात घंटे तक चली चर्चा के बाद पारित हुए इस विधेयक को सरकार ने ऐतिहासिक कदम बताया है, जबकि विपक्षी दलों कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने इसका विरोध करते हुए इसे मौलिक अधिकारों के खिलाफ करार दिया है.

क्या है UCC विधेयक का उद्देश्य

इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य राज्य में सभी नागरिकों के लिए धर्म से ऊपर उठकर एक समान कानूनी व्यवस्था लागू करना है. इसमें विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे मामलों को एक ही कानून के तहत लाने की बात कही गई है.

लिव-इन और विवाह का पंजीकरण अनिवार्य

नए कानून के तहत विवाह और लिव-इन रिलेशनशिप दोनों का पंजीकरण अनिवार्य होगा. इसके अलावा, जबरदस्ती, दबाव या धोखाधड़ी से किए गए विवाहों पर सख्त कार्रवाई का प्रावधान किया गया है.

बहुविवाह पर रोक, 7 साल तक की सजा

विधेयक में द्विविवाह और बहुविवाह पर रोक लगाने के साथ-साथ ऐसे मामलों में 7 साल तक की कैद का प्रावधान भी शामिल किया गया है. इससे कानून को और अधिक सख्त बनाया गया है.

सरकार ने बताया ऐतिहासिक कदम

उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा,"माननीय मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्र पटेल जी के नेतृत्व में भाजपा सरकार ने विधानसभा में यूसीसी पारित कर दिया है. कोई भी कानून से ऊपर नहीं है."

विपक्ष का विरोध, बताया मुस्लिम विरोधी

जहां सत्ताधारी भाजपा ने इसे समानता की दिशा में बड़ा कदम बताया, वहीं कांग्रेस ने इस विधेयक का कड़ा विरोध किया. कांग्रेस ने इसे मौलिक अधिकारों का उल्लंघन और मुस्लिम विरोधी करार दिया.
विधेयक को ध्वनि मत से पारित किया गया, जबकि कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने इसे चयन समिति को भेजने की मांग की.

गुजरात बना दूसरा राज्य

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने विधानसभा में विधेयक पेश करते हुए कहा कि यह कानून एकीकृत कानूनी ढांचे की दिशा में अहम कदम है. इस विधेयक के पारित होने के साथ ही गुजरात, उत्तराखंड के बाद UCC लागू करने वाला देश का दूसरा राज्य बन गया है.

किन पर लागू होगा यह कानून

‘गुजरात यूनिफॉर्म सिविल कोड, 2026’ पूरे राज्य में लागू होगा और राज्य के बाहर रहने वाले निवासियों पर भी लागू रहेगा. हालांकि, अनुसूचित जनजातियों और कुछ पारंपरिक समूहों को इससे छूट दी गई है.

संविधान का हवाला और कानूनी आधार

विधेयक पेश करते हुए मुख्यमंत्री पटेल ने कहा,"एक एकीकृत और अविभाजित राष्ट्र के लिए एक समान कानूनी ढांचा आवश्यक है, और यह हमारे वैदिक ज्ञान को दर्शाता है. हमारे प्राचीन श्लोक भी कहते हैं कि सत्य एक है, भले ही उसे अलग-अलग तरीकों से व्यक्त किया जाए; और अगर सत्य एक है, तो भले ही धर्म अनेक हों, न्याय एक होना चाहिए."

उन्होंने आगे कहा,"संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत देश के प्रत्येक नागरिक के लिए कानून के समक्ष समानता सुनिश्चित की गई है. और उसी संविधान का अनुच्छेद 44 राज्य को एक समान नागरिक संहिता की ओर बढ़ने का निर्देश देता है."

महिलाओं के अधिकारों पर फोकस

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह कानून सभी नागरिकों पर समान रूप से लागू होगा और इसमें महिलाओं के सम्मान, समान अधिकार और सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई है. विवाह पंजीकरण, लिव-इन पंजीकरण, तलाक के समान नियम और बेटा-बेटी के लिए समान उत्तराधिकार अधिकार इस विधेयक के प्रमुख प्रावधानों में शामिल हैं.

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