बसंत पंचमी पर महाकुंभ में भव्य अमृत स्नान, लाखों श्रद्धालुओं ने लगाई पवित्र डुबकी

अमृत स्नान के लिए अखाड़े को पवित्र जल में 40 मिनट का समय आवंटित किया गया है, जिसमें पहला जुलूस अपना अनुष्ठान पूरा करेगा और सुबह 8.30 बजे तक अपने शिविरों में लौट आएगा. अगली पंक्ति में बैरागी संप्रदाय के अखाड़े हैं, जिनका स्नान क्रम सुबह 8.25 बजे शुरू हुआ.

Dimple Yadav
Edited By: Dimple Yadav

बसंत पंचमी के खास मौके पर महाकुंभ का तीसरा बड़ा ‘अमृत स्नान’ शुरू हो चुका है. इसमें दुनिया भर से लाखों श्रद्धालु भाग ले रहे हैं. भोर होते ही, अलग-अलग अखाड़ों के साधू और नागा संन्यासी त्रिवेणी संगम की ओर चल पड़े और पवित्र स्नान शुरू किया. यह स्नान खास है क्योंकि पिछले ‘अमृत स्नान’ के दौरान भगदड़ मच गई थी, जिससे 30 लोगों की मौत हो गई और 60 लोग घायल हो गए थे. 

अब तक महाकुंभ में 33 करोड़ से ज्यादा श्रद्धालु पवित्र डुबकी लगा चुके हैं. आज अकेले पांच करोड़ तीर्थयात्रियों के आने की उम्मीद है. पिछले हादसे के बाद सुरक्षा और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने विशेष इंतजाम किए हैं.

सीएम योगी ने को तैयारियों का लिया जायजा

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को तैयारियों का जायजा लिया और अमृत स्नान के लिए अतिरिक्त सुरक्षा, चिकित्सा सेवाएं और संसाधन तैनात किए गए हैं. परंपरा के अनुसार, संन्यासी, बैरागी और उदासीन संप्रदाय के अखाड़े अपने-अपने समय पर स्नान करेंगे, और पहले समूह ने संगम में स्नान शुरू कर दिया है.

महाकुंभ का अमृत स्नान

महाकुंभ का अमृत स्नान सुबह 4 बजे संन्यासी संप्रदाय के अखाड़ों से शुरू हुआ. इस जुलूस का नेतृत्व कई प्रमुख अखाड़े कर रहे हैं, जिनमें श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी, श्री शंभू पंचायती अटल अखाड़ा, श्री तपोनिधि पंचायती श्री निरंजनी अखाड़ा जैसे अखाड़े शामिल हैं. 

अखाड़े को 40 मिनट का समय

प्रत्येक अखाड़े को 40 मिनट का समय दिया गया है, ताकि वे पवित्र स्नान कर सकें. पहले जुलूस का स्नान सुबह 8:30 बजे तक खत्म हो जाएगा. इसके बाद बैरागी संप्रदाय के अखाड़ों का स्नान होगा, जो सुबह 8:25 बजे शुरू होगा और दोपहर 12:35 बजे खत्म होगा. सबसे आखिरी में उदासीन संप्रदाय का स्नान होगा, जो सुबह 11 बजे से शुरू होगा और 3:55 बजे तक चलेगा.

महाकुंभ का आयोजन हर 12 साल में एक बार

महाकुंभ का यह आयोजन हर 12 साल में एक बार होता है और इसे बहुत आध्यात्मिक महत्व दिया जाता है. इस साल का महाकुंभ खास है क्योंकि ज्योतिषियों के अनुसार त्रिवेणी योग 144 साल में एक बार बन रहा है, जो इस आयोजन को और भी खास बनाता है. अमृत स्नान की तिथियां सूर्य, चंद्रमा और बृहस्पति के ग्रहों के विशेष संरेखण के आधार पर तय की जाती हैं, जो पवित्र नदियों की आध्यात्मिक शक्ति को बढ़ाते हैं.

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