उत्तराखंड के बाद अब गुजरात में UCC लाने की तैयारी, अब लिव-इन में रहने वालों का भी होगा रजिस्ट्रेशन

गुजरात सरकार ने यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) बिल पेश किया है, जिसमें शादी, तलाक, विरासत और लिव-इन संबंधों के लिए समान कानून का प्रस्ताव है. इसमें रजिस्ट्रेशन अनिवार्य, बहुविवाह पर रोक और लिव-इन को कानूनी मान्यता देने जैसे प्रावधान शामिल हैं.

Shraddha Mishra

गुजरात: गुजरात सरकार ने एक अहम पहल करते हुए राज्य में यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) लागू करने की दिशा में कदम बढ़ा दिया है. यह प्रस्तावित कानून अलग-अलग समुदायों के व्यक्तिगत कानूनों को एक समान ढांचे में लाने की कोशिश है. इसका उद्देश्य विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन जैसे मामलों में एक समान नियम लागू करना है, ताकि सभी नागरिकों को समान अधिकार मिल सकें.

बुधवार को हुई राज्य कैबिनेट की बैठक में यूसीसी विधेयक के मसौदे को मंजूरी दे दी गई. अब इसे विधानसभा में पेश किया जाएगा, जहां इस पर चर्चा के बाद इसे कानून का रूप दिया जा सकता है. सरकार का कहना है कि यह कदम व्यापक विचार-विमर्श और विभिन्न समुदायों से चर्चा के बाद उठाया गया है. हालांकि, इस प्रस्तावित कानून में अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लोगों को शामिल नहीं किया गया है.

विवाह और तलाक के नए नियम

इस विधेयक के तहत विवाह और तलाक का पंजीकरण अनिवार्य किया गया है. यानी अब सिर्फ धार्मिक रीति-रिवाजों से शादी करने के साथ-साथ उसका कानूनी रजिस्ट्रेशन भी जरूरी होगा. ऐसा न करने पर जुर्माना लगाया जा सकता है. इसके अलावा, शादी के लिए न्यूनतम आयु पुरुषों के लिए 21 वर्ष और महिलाओं के लिए 18 वर्ष तय की गई है. अगर कोई गलत जानकारी देकर विवाह करता है, तो वह अमान्य माना जाएगा. कानून में बहुविवाह पर पूरी तरह रोक लगाने का प्रस्ताव है. इस नियम का उल्लंघन करने पर जेल और जुर्माने का प्रावधान भी रखा गया है. साथ ही, जबरन या दबाव में कराई गई शादी को भी अपराध माना जाएगा.

लिव-इन रिलेशनशिप पर भी नियम

यूसीसी विधेयक में लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर भी स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए गए हैं. ऐसे संबंध में रहने वाले जोड़ों को अपने क्षेत्र के रजिस्ट्रार के पास इसकी जानकारी देना अनिवार्य होगा. यदि यह रिश्ता खत्म होता है, तो इसकी सूचना भी देनी होगी. इस संबंध से जन्म लेने वाले बच्चों को पूरी तरह वैध माना जाएगा. साथ ही, अगर किसी महिला को लिव-इन पार्टनर छोड़ देता है, तो उसे भरण-पोषण का अधिकार मिलेगा.

तलाक और पुनर्विवाह से जुड़े प्रावधान

विधेयक में तलाक के बाद पुनर्विवाह को आसान बनाने की बात कही गई है. इसमें यह स्पष्ट किया गया है कि तलाकशुदा व्यक्ति बिना किसी अतिरिक्त शर्त के दोबारा शादी कर सकता है. इसका मकसद उन प्रथाओं को खत्म करना है, जिनमें पुनर्विवाह के लिए अनावश्यक शर्तें रखी जाती थीं.

उत्तराधिकार के लिए तय की गई श्रेणियां

संपत्ति के बंटवारे को लेकर भी विधेयक में स्पष्ट नियम बनाए गए हैं. अगर कोई व्यक्ति वसीयत नहीं करता है, तो उसकी संपत्ति को तीन श्रेणियों में बांटा जाएगा. पहली श्रेणी में पति या पत्नी, बच्चे और माता-पिता शामिल होंगे. दूसरी श्रेणी में दादा-दादी और नाना-नानी जैसे रिश्तेदार आएंगे. इसके बाद अन्य रिश्तेदारों को शामिल किया जाएगा.

समानता और सामाजिक सुधार की दिशा में कदम

सरकार का कहना है कि यह विधेयक सभी नागरिकों के लिए समान कानून सुनिश्चित करेगा, चाहे उनका धर्म या जाति कुछ भी हो. इसका उद्देश्य लैंगिक समानता को बढ़ावा देना और समाज में न्यायपूर्ण व्यवस्था स्थापित करना है. इस कानून के जरिए सामाजिक सुधार और एकता को मजबूत करने की कोशिश की जा रही है.

इस पूरे विधेयक को तैयार करने के लिए एक विशेष समिति बनाई गई थी, जिसकी अध्यक्षता सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट की जज रंजना देसाई ने की. इस समिति ने विस्तृत अध्ययन और चर्चा के बाद अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपी, जिसके आधार पर यह मसौदा तैयार किया गया.

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