मई में 1901 के बाद सबसे ज्यादा बारिश रिकॉर्ड, मौसम विभाग ने दी चेतावनी
नई दिल्ली में मई माह असामान्य रूप से ठंडा रहा, जिसमें 1901 के बाद से सातवां सबसे कम औसत अधिकतम तापमान रिकॉर्ड हुआ. समय से पूर्व मानसून और मौसम के बदलाव के कारण इस महीने सर्वाधिक वर्षा भी दर्ज की गई, जिससे तापमान में गिरावट आई.

इस वर्ष मई महीना भारत के मौसम इतिहास में एक अनोखा अध्याय लेकर आया है. भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की रिपोर्ट के अनुसार, मई 2025 असामान्य रूप से ठंडा और बारिश से भरपूर रहा. 1901 के बाद से यह सातवां सबसे ठंडा मई महीना रहा, जबकि बीते चार वर्षों में यह सबसे ठंडा दर्ज किया गया है.
IMD की रिपोर्ट के मुताबिक, मई 2025 में दिन का औसत अधिकतम तापमान 35.08 डिग्री सेल्सियस रहा, जो कि 1901 के बाद से सातवां सबसे कम है. रात का औसत न्यूनतम तापमान 24.07 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो 59वें स्थान पर रहा. कुल मिलाकर, देश भर का औसत तापमान 29.57 डिग्री सेल्सियस रहा, जो कि 1901 के बाद 19वां सबसे कम तापमान है.
मध्य भारत में सबसे बड़ा असर
मध्य भारत में इस गिरावट का असर अधिक देखने को मिला. यहां औसत अधिकतम तापमान 36.63 डिग्री रहा जो कि 1901 के बाद तीसरा सबसे कम है, जबकि न्यूनतम तापमान भी 25.14 डिग्री सेल्सियस के साथ 12वें स्थान पर रहा. औसत तापमान 30.89 डिग्री सेल्सियस रहा जो 1901 के बाद तीसरा सबसे कम आंकड़ा है.
रिकॉर्डतोड़ बारिश
इस मई में औसत वर्षा 126.7 मिमी दर्ज की गई, जो 1901 के बाद से मई महीने के लिए सबसे अधिक है. रिपोर्ट के अनुसार, भारी बारिश (64.5–115.5 मिमी) की 1,053 घटनाएं, बहुत भारी बारिश (115.6–204.5 मिमी) की 262 घटनाएं और अत्यधिक भारी बारिश (>204.5 मिमी) की 39 घटनाएं दर्ज की गईं. यह आंकड़ा 2021 को छोड़ दें तो पिछले पांच वर्षों में सबसे अधिक है.
असामान्य मौसम के पीछे की वजहें
IMD के वैज्ञानिक ओपी श्रीजीत के अनुसार, इस असामान्य ठंडक और वर्षा की तीन प्रमुख वजहें रहीं— जल्दी आया मानसून, अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में बने दो अवसाद, और लगातार सक्रिय रहे पश्चिमी विक्षोभ. ये विक्षोभ आम तौर पर सर्दियों में असर डालते हैं, लेकिन इस बार मई के अंत तक भी सक्रिय रहे.
मानसून की धीमी प्रगति
दक्षिण-पश्चिम मानसून की उत्तरी सीमा इस समय मुंबई, अहिल्यानगर, आदिलाबाद, भवानीपटना, पुरी, और सैंडहेड द्वीप तक ही पहुंची है. पिछले एक हफ्ते से यह आगे नहीं बढ़ा है. विशेषज्ञों के अनुसार, पश्चिमी विक्षोभों का मई में बने रहना मानसून की गति को प्रभावित कर सकता है.


