भारत और पाकिस्तान के बीच सीमा पर बढ़ते तनाव के मद्देनज़र भारत सरकार ने नागरिक सुरक्षा को लेकर अहम निर्णय लिया है. केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों को निर्देश दिया है कि वे जनता को युद्धकालीन सायरन की पहचान और उस दौरान बरती जाने वाली सावधानियों के प्रति जागरूक करें. इसी कड़ी में देश के कई हिस्सों में मॉक ड्रिल्स की शुरुआत हो चुकी है.
मुंबई के दादर इलाके में स्थित एंटनी डिसिल्वा हाई स्कूल में युद्ध जैसी स्थिति का अभ्यास किया गया. वहां युद्धकालीन सायरन बजाकर तैयारियों का आकलन किया गया. कुछ समय तक स्कूल में सायरन की तेज आवाज गूंजती रही, जिससे बच्चों और स्थानीय लोगों को इसकी आदत डलवाई जा सके. इसके अलावा जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर में प्रसिद्ध डल झील के पास भी इसी तरह की मॉक ड्रिल की गई.
गृह मंत्रालय के आदेश के बाद कई राज्यों ने 7 मई को मॉक ड्रिल की योजना बनाई है. इनमें गुजरात, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान जैसे सीमावर्ती राज्य प्रमुख हैं. इस अभ्यास का मकसद युद्ध जैसी स्थिति में नागरिकों को जागरूक और तैयार बनाना है.
युद्ध के समय सायरन का इस्तेमाल कई प्रकार की चेतावनियों के लिए किया जाता है. इनमें प्रमुख हैं:
युद्ध का सायरन सामान्य अलार्म से अधिक तेज और अलग होता है. यह सायरन 120 से 140 डेसिबल तक की आवाज़ उत्पन्न कर सकता है, जो कि 2 से 5 किलोमीटर तक आसानी से सुना जा सकता है. इसकी ध्वनि आम एंबुलेंस सायरन से भिन्न होती है और इसका मकसद हमले से पहले लोगों को सतर्क करना होता है. First Updated : Tuesday, 06 May 2025