कोलकाता: पश्चिम बंगाल में मदरसों में ‘वंदे मातरम’ गाने को लेकर नया विवाद शुरू हो गया है. राज्य सरकार ने सभी सरकारी, सहायता प्राप्त और मान्यता प्राप्त मदरसों में सुबह की प्रार्थना सभा के दौरान राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ गाना अनिवार्य कर दिया है. इस फैसले के बाद राजनीतिक और धार्मिक संगठनों की ओर से तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं. एजेयूपी के चेयरमैन और बंगाल में बाबरी मस्जिद निर्माण से जुड़े हुमायूं कबीर ने इस आदेश का विरोध करते हुए साफ कहा है कि मदरसों में ‘वंदे मातरम’ नहीं गाया जाएगा. उनका कहना है कि सरकार को धार्मिक शिक्षण संस्थानों के मामलों में दखल देने का अधिकार नहीं है.
पश्चिम बंगाल मदरसा शिक्षा निदेशालय की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि राज्य के सभी मान्यता प्राप्त, सहायता प्राप्त और गैर सहायता प्राप्त मदरसों में कक्षाएं शुरू होने से पहले होने वाली प्रार्थना सभा में ‘वंदे मातरम’ का गायन अनिवार्य होगा. यह निर्देश अल्पसंख्यक मामले और मदरसा शिक्षा विभाग के अंतर्गत आने वाले सभी संस्थानों पर तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है.
इससे पहले राज्य सरकार ने स्कूल शिक्षा विभाग के अधीन आने वाले सभी स्कूलों के लिए भी इसी तरह का आदेश जारी किया था. सरकार ने निर्देश दिया था कि स्कूलों में सुबह की सभा के दौरान ‘वंदे मातरम’ के सभी छह छंद गाए जाएं. छात्रों को रोजाना कक्षाएं शुरू होने से पहले राष्ट्रगीत गाने के लिए कहा गया था. मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने भी इस फैसले का समर्थन करते हुए कहा था कि राज्य के सभी स्कूलों में ‘वंदे मातरम’ का गायन अनिवार्य रूप से कराया जाएगा.
हालांकि इस फैसले का कुछ मुस्लिम संगठनों ने विरोध किया है. कोलकाता खिलाफत कमेटी के प्रमुख मोहम्मद अशरफ अली कासमी ने कहा कि सरकार को धर्म के आधार पर फैसले नहीं लेने चाहिए. उन्होंने कहा कि मुसलमान देश से प्रेम करते हैं, लेकिन पूजा केवल अल्लाह की करते हैं. उनके अनुसार, ‘वंदे मातरम’ की कुछ पंक्तियां इस्लामिक मान्यताओं के अनुरूप नहीं हैं. इसलिए इसे मुस्लिम समुदाय पर थोपना उचित नहीं माना जा सकता.
विरोध करने वाले संगठनों ने राज्य सरकार से इस फैसले को वापस लेने की मांग की है. वहीं सरकार का कहना है कि राष्ट्रगीत का उद्देश्य देशभक्ति और राष्ट्रीय एकता की भावना को मजबूत करना है. अब यह मुद्दा पश्चिम बंगाल की राजनीति और धार्मिक संगठनों के बीच बहस का नया केंद्र बनता जा रहा है. First Updated : Thursday, 21 May 2026