होर्मुज में हमलों पर भारत सख्त, जहाजों की सुरक्षा पर जताई चिंता

भारत ने पश्चिम एशिया में वाणिज्यिक जहाजों पर हमलों की कड़ी निंदा करते हुए होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षित और निर्बाध आवाजाही बहाल करने की मांग की. साथ ही, संयुक्त राष्ट्र में ईरान के खिलाफ प्रस्ताव पर भारत ने तटस्थ रुख अपनाते हुए किसी पक्ष का समर्थन नहीं किया.

Suraj Mishra
Edited By: Suraj Mishra

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच भारत ने वाणिज्यिक जहाजों पर हो रहे हमलों को लेकर कड़ी आपत्ति जताई है और इसे पूरी तरह अस्वीकार्य बताया है. भारत ने विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षित और निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है, क्योंकि यह वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति की दृष्टि से अत्यंत अहम है.

भारत ने क्या कहा? 

संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत पर्वतनेनी हरीश ने इस मुद्दे पर भारत का पक्ष रखते हुए कहा कि देश के लिए ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक हितों के लिहाज से होर्मुज जलडमरूमध्य एक संवेदनशील क्षेत्र है. उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसी भी परिस्थिति में वाणिज्यिक जहाजों को सैन्य हमलों का निशाना बनाना स्वीकार नहीं किया जा सकता. इससे न केवल व्यापार प्रभावित होता है, बल्कि निर्दोष नागरिक चालक दल की जान भी खतरे में पड़ती है.

भारत ने इस बात पर भी जोर दिया कि अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पालन हर हाल में होना चाहिए. समुद्री मार्गों की सुरक्षा और वैश्विक व्यापार की निरंतरता बनाए रखना सभी देशों की सामूहिक जिम्मेदारी है. भारत ने अपील की कि इस महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते पर सामान्य स्थिति जल्द से जल्द बहाल की जाए, ताकि व्यापारिक गतिविधियां बिना किसी बाधा के फिर से शुरू हो सकें.

इसके साथ ही भारत ने युद्ध के दौरान जहाजों पर मौजूद भारतीय नाविकों की मौत पर गहरी चिंता व्यक्त की और उनके परिवारों के प्रति संवेदना प्रकट की. भारत ने दोहराया कि नागरिकों की सुरक्षा सर्वोपरि है और ऐसे हमलों से बचना सभी पक्षों के हित में है.

वीटो मामले पर भारत का संतुलित रुख 

वहीं, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में ईरान के खिलाफ लाए गए प्रस्ताव पर रूस और चीन द्वारा किए गए वीटो के मामले में भारत ने संतुलित रुख अपनाया. भारत ने किसी भी पक्ष का खुलकर समर्थन या विरोध करने से परहेज किया और तटस्थता बनाए रखी.

यह मुद्दा उस समय सामने आया जब सुरक्षा परिषद में बहरीन के नेतृत्व में एक प्रस्ताव पेश किया गया था, जिसमें ईरान से वाणिज्यिक जहाजों पर हमले रोकने और होर्मुज में जहाजों की स्वतंत्र आवाजाही सुनिश्चित करने की मांग की गई थी. हालांकि रूस और चीन के वीटो के बाद यह प्रस्ताव पारित नहीं हो सका, जिसके चलते इस विषय पर व्यापक चर्चा के लिए महासभा में बहस आयोजित की गई.

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