अमेरिका-ईरान जंग की आंच में घिरा भारत, तेल संकट और महंगाई का तूफान दरवाजे पर खड़ा

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष ने भारत के लिए चिंता बढ़ा दी है। पूर्व RAW प्रमुख ने चेताया है कि आने वाले महीनों में तेल और महंगाई बड़ा संकट बन सकते हैं।

Lalit Sharma
Edited By: Lalit Sharma

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है। इसका असर अब भारत तक पहुंचता दिख रहा है। पूर्व RAW प्रमुख विक्रम सूद ने साफ चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में मुश्किल बढ़ सकती है। खासकर तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित हो सकती है। भारत की बड़ी जरूरतें विदेशों से पूरी होती हैं। ऐसे में हालात बिगड़ना चिंता की बात है।

क्या तेल और खाद खत्म होंगे

विक्रम सूद ने कहा कि असली चुनौती दो से तीन महीनों में आएगी। उस समय तेल और फर्टिलाइजर की कमी हो सकती है। भारत का बड़ा हिस्सा तेल मध्य पूर्व से आता है। एलएनजी भी कतर से आता है। अगर सप्लाई रुकी तो दाम तेजी से बढ़ेंगे। इसका सीधा असर आम आदमी पर पड़ेगा। महंगाई बढ़ेगी और खर्च बढ़ जाएगा। सरकार के लिए हालात संभालना कठिन हो सकता है।

क्या होर्मुज रास्ता अहम है

सूद ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की अहमियत भी समझाई। उन्होंने कहा कि भारत इस रास्ते पर निर्भर है। यह समुद्री रास्ता तेल सप्लाई की लाइफलाइन है। अगर यहां तनाव बढ़ा तो सप्लाई रुक सकती है। इससे पूरे बाजार पर असर पड़ेगा। भारत की ऊर्जा सुरक्षा इससे जुड़ी है। इसलिए यह मुद्दा बहुत संवेदनशील है।

क्या इजरायल पर दोहरी राय

सूद ने इजरायल को भारत का सहयोगी बताया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के रिश्ते मजबूत हैं। सुरक्षा के कई मामलों में भारत इजरायल पर निर्भर है। लेकिन ईरान के नेता की मौत पर उन्होंने चिंता जताई। उन्होंने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया। कहा कि इस तरह की कार्रवाई से बचा जा सकता था। यह अंतरराष्ट्रीय कानून पर भी सवाल उठाता है।

क्या अमेरिका की भूमिका सवालों में

पूर्व RAW प्रमुख ने अमेरिका की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अमेरिका की भागीदारी एक तरह का अघोषित युद्ध है। किसी देश के खिलाफ ऐसी कार्रवाई ठीक नहीं मानी जा सकती। इससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ेगा। भारत जैसे देशों पर इसका असर पड़ेगा। क्योंकि भारत इस क्षेत्र से जुड़ा हुआ है।

क्या ईरान को गलत समझा गया

सूद का कहना है कि अमेरिका और इजरायल ने ईरान को सही तरीके से नहीं समझा। उन्होंने कहा कि ईरान मजबूत तरीके से जवाब दे रहा है। कुछ लोग मानते हैं कि यह बड़ी रणनीति का हिस्सा है। इसमें ईरान को कमजोर करना शामिल है। और क्षेत्र में इजरायल को मजबूत बनाना मकसद हो सकता है। लेकिन असली तस्वीर अभी साफ नहीं है।

क्या युद्ध ने हालात बिगाड़ दिए

इस बीच हालात और भी गंभीर हो गए हैं। अमेरिका ने ईरान के इस्फहान शहर में हमला किया। यह इलाका परमाणु ठिकानों के लिए जाना जाता है। जवाब में ईरान ने भी हमला किया। दुबई के पास एक तेल टैंकर को निशाना बनाया गया। इससे तनाव और बढ़ गया है। आने वाले दिनों में हालात और बिगड़ सकते हैं। भारत के लिए यह समय बेहद सतर्क रहने का है।

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