भारत ने अपनी पहली एंटी-टेरर पॉलिसी 'प्रहार' की लॉन्च, अब दुश्मन के ड्रोन-साइबर अटैक का होगा तुरंत खात्मा!

आज 23 फरवरी को भारत का पहला व्यापक आतंकवाद विरोधी नीति दस्तावेज 'प्रहार' लॉन्च किया है. इसके तहत सीमा पार से आने वाले आतंक, साइबर हमलों, ड्रोन के दुरुपयोग और नई तकनीकों के खतरे पर खास ध्यान देती है.

Sonee Srivastav

नई दिल्ली: गृह मंत्रालय ने सोमवार 23 फरवरी को भारत का पहला व्यापक आतंकवाद विरोधी नीति दस्तावेज जारी किया, जिसका नाम ‘प्रहार’ रखा गया है. यह दस्तावेज सीमा पार से आने वाले आतंक, साइबर हमलों, ड्रोन के दुरुपयोग और नई तकनीकों के खतरे पर खास ध्यान देता है. 

'प्रहार' क्या है और इसका मकसद?

'प्रहार' भारत की राष्ट्रीय आतंकवाद विरोधी नीति और रणनीति है. गृह मंत्रालय की वेबसाइट पर अपलोड इस दस्तावेज में कहा गया है कि भारत आतंकवाद को किसी धर्म, जाति, राष्ट्रीयता या सभ्यता से नहीं जोड़ता. यह नीति आतंक के हर रूप के खिलाफ जीरो टॉलरेंस पर आधारित है. 

इसका मुख्य लक्ष्य है आतंक हमलों को रोकना, तेज और सही जवाब देना, सभी सरकारी विभागों में तालमेल बनाना, मानवाधिकार और कानून का पालन करना, कट्टरपंथी विचारों को कम करना और अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाना.

मुख्य खतरे क्या बताए गए?

दस्तावेज में सीमा पार से प्रायोजित आतंक को बड़ा खतरा बताया गया है. जिहादी संगठन और उनकी सहयोगी संस्थाएं हमले की साजिश रचती रहती हैं. अल-कायदा और आईएसआईएस जैसे वैश्विक आतंकी समूह भारत में सोयी हुई कोशिकाओं के जरिए हिंसा भड़काने की कोशिश करते हैं. विदेशों से चलने वाले चरमपंथी साजिशें रचते हैं. 

पंजाब और जम्मू-कश्मीर में ड्रोन का इस्तेमाल बढ़ रहा है. हैंडलर उन्नत तकनीक से ड्रोन, रोबोटिक्स का दुरुपयोग कर रहे हैं. संगठित अपराधी नेटवर्क लॉजिस्टिक्स और भर्ती में मदद करते हैं.

साइबर और डिजिटल खतरे

साइबर हमले अब बड़ा खतरा हैं. अपराधी हैकर और कुछ देश भारत को निशाना बनाते हैं. सोशल मीडिया, मैसेजिंग ऐप्स, एन्क्रिप्शन टूल्स, डार्क वेब और क्रिप्टो वॉलेट से प्रोपगैंडा, फंडिंग और ऑपरेशनल गाइडेंस दिया जाता है. सीबीआरएनईडी (केमिकल, बायोलॉजिकल, रेडियोलॉजिकल, न्यूक्लियर, एक्सप्लोसिव, डिजिटल) सामग्री का दुरुपयोग रोकना चुनौती है.

महत्वपूर्ण क्षेत्रों की सुरक्षा

भारत ने बिजली, रेलवे, एविएशन, पोर्ट, रक्षा, स्पेस और एटॉमिक एनर्जी जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों को सुरक्षित करने की क्षमता विकसित की है. राज्य और गैर-राज्य तत्वों से इनकी रक्षा की जाती है. 

भारत की रणनीति

जांच के हर चरण में कानूनी विशेषज्ञों को शामिल करने का सुझाव है, ताकि मामलों को मजबूत बनाया जा सके. कट्टरपंथ रोकने के लिए युवाओं को सकारात्मक तरीके से जोड़ा जाएगा. जेलों में कैदियों को कट्टरपंथ से बचाने के कार्यक्रम चलेंगे. मॉडरेट धर्मगुरु और एनजीओ जागरूकता फैलाएंगे. 

कट्टरपंथी युवाओं की पहचान होने पर पुलिस ग्रेडेड रिस्पॉन्स देगी और कानूनी कार्रवाई होगी. अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय सहयोग पर जोर है, क्योंकि आतंकी समूह स्थानीय संसाधनों का इस्तेमाल करते हैं.

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