इजरायल जाने पर पीएम मोदी का होगा बॉयकाट! विपक्षी नेता ने संसद में क्यों कही ऐसी बात?

पीएम मोदी 25 फरवरी से इजरायल दौरे पर रहने वाले हैं. इस दौरान वे इजरायली संसद को संबोधित कर सकते हैं, हालांकि दौरा शरू से पहले ही इजरायल की राजनीति गरमा गई है. विपक्ष नेता ने बहिष्कार करने की धमकी दी है.

Sonee Srivastav

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का इजरायल दौरा 25 फरवरी से शुरू होने वाला है. यह दो दिवसीय दौरा है, जिसमें वे नेसेट (इजरायली संसद) को संबोधित कर सकते हैं, लेकिन इजरायल की घरेलू राजनीति में यह दौरा विवादों में फंस गया है. विपक्षी नेता याइर लैपिड ने मोदी के संसद संबोधन का बहिष्कार करने की धमकी दी है. 

जस्टिस आइजैक अमित से जुड़ा विवाद 

यह धमकी इजरायल के सुप्रीम कोर्ट के प्रेसिडेंट जस्टिस आइजैक अमित को लेकर है. जनवरी 2025 में जस्टिस अमित को मुख्य न्यायाधीश चुना गया, लेकिन प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार ने उन्हें बार-बार नजरअंदाज किया. न्याय मंत्री यारिव लेविन ने उनकी नियुक्ति को मान्यता नहीं दी और आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशित भी नहीं किया. सरकार के कई मंत्री जस्टिस अमित को मुख्य न्यायाधीश के रूप में संबोधित करने से बचते हैं. 

इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और अन्य विश्व नेताओं के संबोधन में भी उन्हें नहीं बुलाया गया. अक्टूबर 2025 में नेसेट स्पीकर आमिर ओहाना ने उन्हें सिर्फ सामान्य न्यायाधीश कहा, जिस पर राष्ट्रपति आइजैक हर्जोग ने आपत्ति जताई.

लैपिड की सख्त चेतावनी

बुधवार को नेसेट में बोलते हुए याइर लैपिड ने कहा कि अगर सत्तारूढ़ गठबंधन मोदी के विशेष सत्र में जस्टिस अमित को नहीं बुलाता, तो विपक्ष भी बहिष्कार करेगा. उन्होंने कहा, "यह नेसेट के लिए बड़ी शर्मिंदगी होगी. हम नहीं चाहते कि भारत के प्रधानमंत्री आधे-खाली सदन को संबोधित करें. इससे भारतीय दूतावास भी चिंतित है."

लैपिड ने जोर दिया कि प्रोटोकॉल के अनुसार मुख्य न्यायाधीश की मौजूदगी जरूरी है. दो सप्ताह पहले नेसेट की 77वीं वर्षगांठ पर भी विपक्ष ने बहिष्कार किया था.

स्पीकर का पलटवार

नेसेट स्पीकर आमिर ओहाना ने लैपिड पर हमला बोला. उन्होंने कहा कि लैपिड घरेलू राजनीति के लिए इजरायल-भारत के मजबूत रिश्तों को खतरे में डाल रहे हैं. ओहाना ने ट्वीट कर पूछा कि ट्रंप, अर्जेंटीना के राष्ट्रपति जेवियर मिली जैसे नेताओं के संबोधन में जस्टिस अमित न होने पर बहिष्कार क्यों नहीं किया? 

लैपिड ने जवाब दिया कि गलती स्पीकर की है और नेतन्याहू को निर्देश देना चाहिए कि जस्टिस अमित को बुलाया जाए. उन्होंने कहा कि बहिष्कार से नेसेट की साख और देश की गरिमा को नुकसान होगा.

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