विदेश पढ़ने जाने वाले छात्रों की फैक्ट्री बने कुछ राज्य, बाकी भारत क्यों पीछे रह गया
भारत से विदेश पढ़ने जाने वाले छात्र पूरे देश से नहीं आते। नीति आयोग की रिपोर्ट बताती है कि सालों से कुछ गिने-चुने राज्यों का ही इस मामले में दबदबा बना हुआ है।

दुनिया में सबसे ज्यादा छात्र भारत से विदेश पढ़ने जाते हैं। लेकिन यह तस्वीर पूरी तरह समान नहीं है। नीति आयोग के आंकड़े बताते हैं कि देश के हर राज्य से छात्र विदेश नहीं जा रहे। कुछ ही राज्यों ने इस मामले में लगातार बढ़त बनाई हुई है। यही वजह है कि विदेश पढ़ाई का ट्रेंड पूरे देश में नहीं बल्कि सीमित इलाकों में सिमटा हुआ दिखता है।
नीति आयोग की रिपोर्ट क्या कहती है?
नीति आयोग की रिपोर्ट साल 2016 से 2020 के आंकड़ों पर आधारित है। इस अवधि में कोरोना का समय भी शामिल है। रिपोर्ट साफ बताती है कि टॉप पर वही राज्य बने रहे जो पहले से आगे थे। नए राज्यों की एंट्री बहुत कम हुई। यानी विदेश जाने का पैटर्न सालों से लगभग एक जैसा चला आ रहा है।
कौन सा राज्य नंबर वन बना हुआ है?
पिछले कई सालों से आंध्र प्रदेश इस लिस्ट में नंबर एक बना हुआ है। यहां से सबसे ज्यादा छात्र विदेश पढ़ने और बसने जाते हैं। आंकड़ों में लगातार इसकी बढ़त दिखाई देती है। शिक्षा को लेकर जागरूकता और विदेश जाने की तैयारी यहां ज्यादा मजबूत मानी जाती है। यही वजह है कि यह राज्य सालों से टॉप पर बना हुआ है।
पंजाब और महाराष्ट्र की क्या स्थिति है?
आंध्र प्रदेश के बाद पंजाब दूसरे स्थान पर बना हुआ है। पंजाब से विदेश जाने का चलन काफी पुराना है। महाराष्ट्र आमतौर पर तीसरे नंबर पर रहता है। हालांकि इन दोनों की रैंकिंग कभी-कभी बदलती रहती है। लेकिन ये राज्य लंबे समय से टॉप तीन से बाहर नहीं हुए हैं। विदेश पढ़ाई को यहां बेहतर भविष्य से जोड़कर देखा जाता है।
बाकी राज्यों की मौजूदगी कितनी मजबूत है?
गुजरात ने हाल के सालों में इस लिस्ट में तेजी से जगह बनाई है। तमिलनाडु, केरल और कर्नाटक भी लंबे समय से अपनी स्थिति बनाए हुए हैं। इन राज्यों में शिक्षा का स्तर बेहतर माना जाता है। विदेश पढ़ाई की जानकारी और संसाधन आसानी से मिल जाते हैं। इसी कारण ये राज्य लगातार इस दौड़ में बने रहते हैं।
कोरोना में भी ट्रेंड क्यों नहीं बदला?
कोरोना महामारी के दौरान पूरी दुनिया ठहर गई थी। लेकिन विदेश जाने वाले छात्रों के ट्रेंड में खास बदलाव नहीं आया। साल 2020 में भी आंध्र प्रदेश टॉप पर बना रहा। इस दौरान पंजाब ने महाराष्ट्र को पीछे छोड़ दिया। इससे साफ होता है कि यह ट्रेंड अस्थायी नहीं बल्कि गहराई से जुड़ा हुआ है।
उत्तर प्रदेश क्यों पीछे रह गया?
उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा राज्य है। इसके बावजूद यह लिस्ट में काफी नीचे है। यह दिखाता है कि विदेश जाने की सोच हर जगह समान नहीं है। संसाधन, जागरूकता और तैयारी का फर्क साफ नजर आता है। यही वजह है कि विदेश पढ़ाई का सपना कुछ राज्यों तक ही सीमित रह गया है।


