ट्रंप के अमेरिका फर्स्ट और मेक अमेरिका ग्रेट अगेन के नारे की निकली हवा, टैरिफ के बोझ से जनता कर रही त्राहिमाम

अमेरिका में उपभोक्ता विश्वास तेजी से गिरा है. महंगाई, टैरिफ नीतियों और कमजोर रोजगार वृद्धि से लोग चिंतित हैं. मजबूत आर्थिक विकास के बावजूद भविष्य को लेकर अमेरिकी उपभोक्ताओं का भरोसा डगमगा रहा है.

Yaspal Singh
Edited By: Yaspal Singh

नई दिल्लीः अमेरिका में आम नागरिकों का अपनी अर्थव्यवस्था पर भरोसा लगातार कमजोर होता जा रहा है. यह स्थिति ऐसे समय सामने आई है, जब पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारी-भरकम टैरिफ लगाकर अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का दावा कर रहे हैं. ताजा आंकड़े संकेत देते हैं कि अमेरिकी उपभोक्ता न केवल वर्तमान हालात से असंतुष्ट हैं, बल्कि भविष्य को लेकर भी गहरी चिंता में हैं.  रिपोर्ट अनुसार, हालात मंदी की ओर इशारा कर रहे हैं.

उपभोक्ता विश्वास सूचकांक में बड़ी गिरावट

यूएस कॉन्फ्रेंस बोर्ड द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी 2026 के लिए उपभोक्ता विश्वास सूचकांक दिसंबर के 94.2 से गिरकर 84.5 पर पहुंच गया है. यह स्तर मई 2014 के बाद सबसे निचला माना जा रहा है और कोविड-19 महामारी के दौरान दर्ज किए गए न्यूनतम स्तर से भी नीचे है.

रिपोर्ट के अनुसार, यह गिरावट अर्थशास्त्रियों के सभी अनुमानों से अधिक है. इसका सीधा अर्थ यह है कि अमेरिकी नागरिक अपनी आर्थिक स्थिति और आय को लेकर पहले से कहीं ज्यादा असहज महसूस कर रहे हैं.

भविष्य की उम्मीदों में भी गिरावट

अल्पकालिक अपेक्षाओं को मापने वाला सूचकांक भी 9.5 अंकों की गिरावट के साथ 65.1 पर आ गया है. यह स्तर 80 से काफी नीचे है, जिसे आमतौर पर संभावित मंदी का संकेत माना जाता है. लगातार 12 महीनों से यह सूचकांक 80 के नीचे बना हुआ है, जिससे चिंता और गहरी हो गई है.

यह स्थिति ऐसे समय में बन रही है जब अमेरिका फर्स्ट और मेक अमेरिका ग्रेट अगेन जैसे नारों के बीच ट्रंप की नीतियों को संरक्षणवादी और अनिश्चित बताया जा रहा है, जिनका असर कूटनीति, व्यापार और वैश्विक संबंधों पर भी दिख रहा है.

वर्तमान हालात पर भी बढ़ी बेचैनी

उपभोक्ताओं द्वारा अपनी मौजूदा आर्थिक स्थिति को लेकर किया गया आकलन भी कमजोर हुआ है. यह सूचकांक लगभग 10 अंकों की गिरावट के साथ 113.7 पर आ गया है. कॉन्फ्रेंस बोर्ड की मुख्य अर्थशास्त्री डाना पीटरसन के अनुसार, जनवरी में उपभोक्ता विश्वास बुरी तरह गिरा है. लोग वर्तमान स्थिति और भविष्य दोनों को लेकर चिंतित हैं. उन्होंने यह भी बताया कि सूचकांक के सभी घटकों में गिरावट दर्ज की गई है, जिससे यह स्तर महामारी के समय से भी नीचे चला गया.

महंगाई, टैरिफ और युद्ध बनी चिंता का कारण

सर्वेक्षणों में महंगाई को लेकर उल्लेख तेजी से बढ़े हैं, खासकर गैस और खाद्य वस्तुओं की कीमतों को लेकर. इसके अलावा टैरिफ, व्यापार नीतियां, राजनीति, श्रम बाजार, स्वास्थ्य बीमा और युद्ध जैसे विषयों पर भी लोगों ने चिंता जताई है.

रोजगार बाजार में भी कमजोरी के संकेत

नौकरी बाजार को लेकर भी लोगों की धारणा नकारात्मक हुई है. केवल 23.9 प्रतिशत उपभोक्ताओं ने कहा कि नौकरियां पर्याप्त हैं, जबकि दिसंबर में यह आंकड़ा 27.5 प्रतिशत था. वहीं, “नौकरियां पाना मुश्किल है” कहने वालों की संख्या बढ़कर 20.8 प्रतिशत हो गई है.

अर्थशास्त्रियों का मानना है कि अमेरिकी श्रम बाजार फिलहाल “कम भर्ती और कम छंटनी” की स्थिति में है, क्योंकि कारोबारी वर्ग टैरिफ नीतियों को लेकर असमंजस में है.

धीमी होती रोजगार वृद्धि

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर में केवल 50 हजार नई नौकरियां जुड़ीं. बेरोजगारी दर 4.4 प्रतिशत पर बनी हुई है. वर्ष 2025 में कुल मिलाकर केवल 5.84 लाख नौकरियां जुड़ीं, जो 2024 में जोड़ी गई 20 लाख से अधिक नौकरियों की तुलना में काफी कम हैं.

मजबूत विकास के बावजूद चिंता बरकरार

हालांकि अमेरिकी अर्थव्यवस्था का आकार लगातार बढ़ रहा है और उपभोक्ता खर्च के चलते हालिया तिमाही में तेज विकास दर्ज किया गया है, लेकिन सर्वेक्षण यह साफ दिखाते हैं कि आम अमेरिकी भविष्य को लेकर आशंकित हैं. यही चिंता आने वाले समय में आर्थिक स्थिरता के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकती है.

ताजा खबरें

ट्रेंडिंग वीडियो

close alt tag