प्रेम विवाह पर पंचायत का तुगलकी हुक्म, पूरे परिवार को समाज से बाहर करने का फैसला
मध्यप्रदेश के रतलाम जिले में प्रेम विवाह करने वालों के खिलाफ पंचायत ने ऐसा फरमान जारी किया है, जिसने परिवारों की रोजमर्रा की जिंदगी को मुश्किल बना दिया है।

रतलाम जिले की पिपलोदा तहसील के पंचेवा गांव में पंचायत ने प्रेम विवाह करने वाले परिवारों पर सामाजिक और आर्थिक बहिष्कार का फैसला सुनाया है। यह आदेश गांव की बैठक में पारित किया गया। पंचायत का कहना है कि बीते छह महीनों में आठ युवक युवतियां प्रेम विवाह के लिए घर से भागे। इसी को रोकने के लिए यह कठोर कदम उठाया गया।
किन परिवारों को बनाया गया निशाना?
जिन परिवारों के बच्चों ने प्रेम विवाह किया है, उनके नाम गांव की बैठक में सार्वजनिक रूप से पढ़े गए। पंचायत के अनुसार ऐसे परिवार गांव की परंपरा के खिलाफ गए हैं। इसलिए उन्हें समाज से अलग रखने का फैसला लिया गया। इस फरमान के बाद गांव में इन परिवारों की पहचान अलग कर दी गई।
कौन कौन सी पाबंदियां लगाई गईं?
इन परिवारों पर कई सख्त रोक लगाई गई है। नाई और पंडितों को उनसे कोई काम न करने का आदेश दिया गया है। कोई भी ग्रामीण उनसे दूध या अन्य सामान नहीं खरीदेगा। उनकी खेती की जमीन कोई पट्टे पर नहीं ले सकेगा। सामाजिक और धार्मिक कार्यक्रमों में उन्हें बुलाने पर भी रोक लगाई गई है।
मदद करने वालों को क्या सजा मिलेगी?
पंचायत के आदेश में यह भी कहा गया है कि जो व्यक्ति इन परिवारों की मदद करेगा, शादी का गवाह बनेगा या उन्हें आश्रय देगा, उसे भी समाज से बाहर कर दिया जाएगा। यानी एक परिवार नहीं बल्कि पूरे गांव पर डर का माहौल बना दिया गया है। यह फैसला गांव के लोगों पर दबाव बनाने जैसा माना जा रहा है।
ग्रामीण फैसले का बचाव क्यों कर रहे हैं?
गांव के कुछ लोग इस फैसले का खुलकर समर्थन कर रहे हैं। उनका कहना है कि बार बार युवक युवतियों का घर से भागना बच्चों पर गलत असर डाल रहा है। ग्रामीणों का तर्क है कि सख्ती जरूरी थी ताकि आगे कोई ऐसा कदम न उठाए। पंचायत इसे सामाजिक अनुशासन का मामला बता रही है।
पीड़ित परिवारों में गुस्सा क्यों है?
जिन परिवारों पर यह फरमान लागू हुआ है, उनमें भारी नाराजगी है। उनका कहना है कि यह फैसला गैरकानूनी है। परिवार अब खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। वे जिला प्रशासन से सुरक्षा और न्याय की मांग करने की तैयारी में हैं। कई परिवार रतलाम कलेक्टर से शिकायत करने की योजना बना रहे हैं।
प्रशासन ने क्या रुख अपनाया है?
वीडियो वायरल होने के बाद प्रशासन हरकत में आया है। जावरा एसडीएम सुनील जायसवाल ने स्पष्ट कहा है कि प्रेम विवाह के कारण किसी परिवार का बहिष्कार अवैध है। प्रशासन गांव वालों से बातचीत कर रहा है। कानून समझाया जा रहा है। वीडियो की जांच की जा रही है। दोषियों पर कार्रवाई की बात कही गई है।


