International Women’s Day 2025: मिलिए अंशु जामसेनपा से... जो 5 दिनों में दो बार माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने वाली पहली भारतीय महिला

अंशु जामसेनपा, अरुणाचल प्रदेश की पर्वतारोही ने 2017 में महज 5 दिनों में माउंट एवरेस्ट की चोटी पर दो बार चढ़कर एक अद्वितीय रिकॉर्ड बनाया. उनका पर्वतारोहण सफर संघर्षों और समर्पण से भरा रहा. उनका मानना है कि सशक्तिकरण आत्मविश्वास में निहित होता है और ये हर व्यक्ति के लिए एक व्यक्तिगत अनुभव है.

Simran Sachdeva

दुनियाभर में 8 मार्च यानी कल अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाएगा, वहीं दूसरी ओर, महिलाओं के अद्वितीय साहस और उपलब्धियों को सम्मानित किया जा रहा है. वहीं, अरुणाचल प्रदेश की अंशु जामसेनपा की कहानी भी विशेष तौर से उभरकर सामने आ रही है. जामसेनपा सिर्फ एक पर्वतारोही ही नहीं, बल्कि एक प्रेरणास्त्रोत हैं, जिन्होंने अपनी मेहनत और संकल्प से ये साबित कर दिया कि कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं होता.

एवरेस्ट पर चढ़ाई का असाधारण रिकॉर्ड

जामसेनपा ने साल 2017 में महज 5 दिनों के अंदर माउंट एवरेस्ट की चोटी पर दो बार चढ़कर इतिहास रच दिया था, जिससे वो दुनिया की एकमात्र महिला बन गई जिन्होंने ये रिकॉर्ड हासिल किया. ये सफलता उनके संघर्षों और समर्पण का प्रतीक बनी. जामसेनपा ने माउंट एवरेस्ट को कुल 5 बार चढ़कर एक और रिकॉर्ड बनाया, जिससे उनका नाम भारतीय पर्वतारोहण के इतिहास में अमर हो गया.

साहस और चुनौतियों का सामना करती जामसेनपा

अनशु जामसेनपा का सफर आसान नहीं था. एक मां होने के नाते, उन्हें समाजिक बंधनों और जिम्मेदारियों का सामना करना पड़ा. लेकिन जामसेनपा ने कभी हार नहीं मानी और वो हमेशा अपने सपनों के पीछे दौड़ी. उनके पर्वतारोहण की शुरुआत 2009 में हुई थी, जब अरुणाचल पर्वतारोहण और साहसिक खेल संघ के प्रशिक्षकों ने उन्हें इस खेल को अपनाने के लिए प्रेरित किया. शुरुआती दिनों में उन्हें परिवार से समर्थन नहीं था, लेकिन अपने समर्पण और मेहनत से उन्होंने धीरे-धीरे उन्हें अपनी तरफ किया.

दूसरी बार एवरेस्ट पर चढ़ाई: एक ऐतिहासिक क्षण

साल 2011 में जामसेनपा ने माउंट एवरेस्ट को 10 दिनों में दो बार चढ़कर एक राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया. इसके बाद 2013 में उन्होंने एक बार फिर एवरेस्ट पर चढ़ाई की, जिससे उनकी सफलता का सिलसिला जारी रहा. लेकिन 2017 में उन्होंने जो किया, वो अद्वितीय था– महज 5 दिनों के भीतर एवरेस्ट की चोटी पर दो बार चढ़ाई करने का रिकॉर्ड कायम किया. इस ऐतिहासिक उपलब्धि ने उन्हें भारतीय महिला पर्वतारोहण के क्षेत्र में एक नई पहचान दिलाई.

महिलाओं की सशक्तिकरण के बारे में जामसेनपा की सोच

जामसेनपा का मानना है कि सशक्तिकरण एक व्यक्तिगत अनुभव है. उनके मुताबिक, सशक्तिकरण का मतलब हर किसी के लिए अलग हो सकता है. कुछ के लिए ये शिक्षा है, तो कुछ के लिए ये आर्थिक स्वतंत्रता है. हालांकि, उन्होंने इस बात पर भी दुख जताया कि कई सशक्त महिलाएं अब भी अपनी जिंदगी के फैसले खुद लेने में स्वतंत्र नहीं हैं. जामसेनपा ने ये भी कहा कि सशक्तिकरण का असली स्रोत आत्मविश्वास है. 

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