इजराइल का Iron Dome बनेगा भारत का ‘सुदर्शन चक्र’! दुश्मनों के हर वार का हवा में अंत

पीएम मोदी का इजरायल दौरा रक्षा क्षेत्र के लिए काफी खास है. इसलिए अब ये चर्चा तेज हो गई है कि क्या भारत इज़राइल की प्रसिद्ध आयरन डोम वायु रक्षा प्रणाली को अपनाएगा.

Suraj Mishra
Edited By: Suraj Mishra

भारत और इज़राइल के बीच रणनीतिक साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है, खासकर रक्षा क्षेत्र में. इसलिए अब यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या भारत इज़राइल की प्रसिद्ध आयरन डोम वायु रक्षा प्रणाली को अपनाएगा. हाल ही में इज़राइल की दो दिवसीय यात्रा पर गए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की सुरक्षा को और मजबूत करने के उद्देश्य से 'मिशन सुदर्शन चक्र' नामक महत्वाकांक्षी योजना का उल्लेख किया था. 

क्या है आयरन डोम? 

इस परियोजना का लक्ष्य भारत के लिए एक अत्याधुनिक, बहुस्तरीय और समन्वित वायु रक्षा ढांचा तैयार करना है. रिपोर्ट्स के अनुसार, इज़राइल भारत को आयरन डोम और आयरन बीम जैसी उन्नत तकनीकों के ट्रांसफर पर सहमत हो सकता है. आयरन डोम एक प्रभावी शॉर्ट-रेंज एयर डिफेंस सिस्टम है, जो रॉकेट, मोर्टार और ड्रोन जैसे खतरों को हवा में ही निष्क्रिय करने में सक्षम है. वहीं, आयरन बीम लेजर आधारित प्रणाली है, जिसका उपयोग ड्रोन और अन्य छोटे हवाई खतरों को रोकने के लिए किया जाता है. इन तकनीकों के मिलने से भारत की सीमाओं और महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों की सुरक्षा क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है.

'मिशन सुदर्शन चक्र' की घोषणा

'मिशन सुदर्शन चक्र' की घोषणा प्रधानमंत्री मोदी ने पिछले वर्ष स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर की थी. इस परियोजना को 2035 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. इसका उद्देश्य देश के संवेदनशील सैन्य ठिकानों, परमाणु प्रतिष्ठानों, बड़े शहरों और प्रमुख बुनियादी ढांचे को हवाई हमलों से सुरक्षित करना है. इस योजना का नाम भगवान कृष्ण के दिव्य अस्त्र ‘सुदर्शन चक्र’ से प्रेरित है, जो अचूक सुरक्षा का प्रतीक माना जाता है.

इस रक्षा प्रणाली को तीन स्तरों में विकसित किया जाएगा. पहले स्तर पर कम ऊंचाई पर आने वाले खतरों जैसे ड्रोन, छोटे रॉकेट और मोर्टार को रोकने की व्यवस्था होगी, जिसमें आयरन डोम जैसी तकनीक अहम भूमिका निभा सकती है. दूसरे स्तर पर क्रूज मिसाइलों और लड़ाकू विमानों से सुरक्षा के लिए उन्नत मिसाइल प्रणालियां तैनात की जाएंगी, जिनमें बराक-8 के उन्नत संस्करण शामिल हो सकते हैं. तीसरे और सबसे मजबूत स्तर पर लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों को अंतरिक्ष या ऊपरी वायुमंडल में ही नष्ट करने की क्षमता विकसित की जाएगी, जिसमें एरो मिसाइल डिफेंस जैसी तकनीक उपयोगी साबित हो सकती है.

विशेषज्ञों का क्या मानना है?

विशेषज्ञों का मानना है कि आयरन डोम जैसी प्रणाली भारत को ड्रोन हमलों और मिसाइल खतरों से प्रभावी सुरक्षा प्रदान कर सकती है. इसकी सफलता दर लगभग 90 प्रतिशत बताई जाती है और यह वास्तविक समय में खतरे की पहचान कर तुरंत प्रतिक्रिया देने में सक्षम है. प्रधानमंत्री मोदी की इज़राइल यात्रा के दौरान हेरॉन एमके-2 ड्रोन और बराक-8 मिसाइल सिस्टम जैसे अहम रक्षा समझौतों पर भी चर्चा होने की संभावना है. यह सहयोग भारत की वायु रक्षा क्षमता को नई ऊंचाई पर ले जाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.

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