झारखंड के हजारीबाग मेडिकल कॉलेज में टॉर्च की रोशनी में इलाज, शर्मसार हुई स्वास्थ्य व्यवस्था

झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था एक बार फिर बड़े सवालों के घेरे में खड़ी हो गई है. हजारीबाग के प्रतिष्ठित शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में देर रात अचानक बिजली गुल होने से हड़कंप मच गया.

Nidhi Jha
Edited By: Nidhi Jha

झारखंड: झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था एक बार फिर बड़े सवालों के घेरे में खड़ी हो गई है. हजारीबाग के प्रतिष्ठित शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में देर रात अचानक बिजली गुल होने से हड़कंप मच गया. बिजली आपूर्ति ठप होते ही पूरा अस्पताल परिसर देखते ही देखते घने अंधेरे में डूब गया.

इस अचानक आए संकट की वजह से वार्डों में भर्ती मरीजों, उनके तीमारदारों और ड्यूटी पर तैनात स्वास्थ्यकर्मियों को भारी मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी. स्थिति इतनी बदतर हो गई कि डॉक्टरों और नर्सों को मरीजों का प्राथमिक उपचार करने के लिए मोबाइल फोन की फ्लैश लाइट और टॉर्च का सहारा लेना पड़ा.

मोबाइल टॉर्च के साए में कटी रात

अस्पताल के प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक जैसे ही बिजली कटी, पूरे उपचार कक्षों और आईसीयू के बाहर अफरा-तफरी का माहौल बन गया. उमस और अंधेरे के बीच मरीजों की सांसें अटकने लगीं. सबसे ज्यादा परेशानी नवजात शिशुओं, वेंटिलेटर या ऑक्सीजन सपोर्ट पर चल रहे गंभीर मरीजों और बुजुर्गों को हुई.

टॉर्च जलाकर मरीजों की देखभाल

पूरी रात तीमारदार अपने मरीजों के सिरहाने खड़े होकर मोबाइल की टॉर्च जलाकर उनकी देखभाल करते दिखे. स्वास्थ्यकर्मियों के लिए भी इस मद्धम रोशनी में सुई लगाना, दवा देना या मरीजों की पल्स चेक करना एक बड़ी चुनौती बन गया था. अंधेरे के कारण परिजनों में अनहोनी का डर साफ देखा जा सकता था.

वेंटिलेटर पर दिखी बैकअप व्यवस्था

इस संवेदनशील घटना ने मेडिकल कॉलेज जैसे बड़े अस्पताल की आपातकालीन तैयारियों की पोल खोलकर रख दी है. स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने अस्पताल प्रबंधन को आड़े हाथों लेते हुए पूछा है कि आखिर लाखों-करोड़ों के बजट के बावजूद जनरेटर और पावर बैकअप सिस्टम ने समय पर काम क्यों नहीं किया? 

बिजली फेल

एक सरकारी चिकित्सा संस्थान में जहां हर सेकंड मरीजों की जिंदगी दांव पर होती है वहां बिजली का इस तरह फेल होना और वैकल्पिक व्यवस्था का न होना घोर प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है. जब जिला मुख्यालय के सबसे बड़े अस्पताल का यह आलम है तो सुदूर ग्रामीण इलाकों में चल रहे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की स्थिति की कल्पना ही की जा सकती है.

दावों और जमीनी हकीकत में बड़ा फासला

सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस घटना को झारखंड के स्वास्थ्य दावों पर एक बड़ा तमाचा बताया है. सरकार की तरफ से स्वास्थ्य क्षेत्र को हाई-टेक बनाने और निर्बाध बिजली के बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं लेकिन धरातल पर बुनियादी संसाधनों की कमी आज भी बरकरार है. मामला तूल पकड़ने के बाद अस्पताल प्रशासन और स्थानीय बिजली विभाग हरकत में आया है.

जांच शुरू

अंदरूनी तकनीकी खराबी की वजह से यह संकट खड़ा हुआ था. जिसकी आंतरिक जांच शुरू कर दी गई है. इस घटना ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि जब तक जवाबदेही तय नहीं होगी तब तक मरीजों की जान इसी तरह टॉर्च की रोशनी के भरोसे दांव पर लगती रहेगी.

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