बंगाल के बाद अब इस केंद्र शासित प्रदेश के लेफ्टिनेंट गवर्नर ने पद से दिया इस्तीफा
लद्दाख के उपराज्यपाल कविंदर गुप्ता ने गुरुवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. उनके कार्यकाल के सिर्फ नौ महीने हुए थे. पश्चिम बंगाल के राज्यपाल के इस्तीफे के बाद हुई इस घोषणा से राजनीतिक हलचल बढ़ गई है. अब लोगों को नए उत्तराधिकारी की घोषणा का इंतजार है.

नई दिल्ली : केंद्रशासित प्रदेश लद्दाख में एक बड़े राजनीतिक बदलाव की खबर सामने आई है. उपराज्यपाल कविंदर गुप्ता ने अपने पद से त्यागपत्र दे दिया है. दिलचस्प बात यह है कि उनका यह फैसला पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सीवी आनंद बोस के इस्तीफे के तुरंत बाद आया है. जुलाई 2025 में नियुक्त हुए गुप्ता का कार्यकाल अभी काफी बचा था. लेकिन इस अचानक आए इस्तीफे ने सियासी गलियारों में कई तरह की चर्चाओं और कयासों को जन्म दे दिया है.
कविंदर गुप्ता का राजनीतिक सफर
आपको बता दें कि कविंदर गुप्ता भारतीय जनता पार्टी के एक दिग्गज नेता रहे हैं और पूर्व में जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री का कार्यभार भी संभाल चुके हैं. उन्होंने 18 जुलाई 2025 को ब्रिगेडियर (डॉ.) बी.डी. मिश्रा के स्थान पर लद्दाख के उपराज्यपाल का पद ग्रहण किया था. उनके अचानक इस्तीफा देने से प्रशासनिक गलियारे हैरान हैं. क्योंकि उन्होंने इस संवेदनशील क्षेत्र में काफी सक्रियता दिखाई थी. अब केंद्र सरकार को उनके स्थान पर किसी नए अनुभवी चेहरे की तलाश करनी होगी.
इस्तीफे के कारणों पर रहस्य
उपराज्यपाल कविंदर गुप्ता के इस्तीफे की वजह फिलहाल एक रहस्य बनी हुई है. आधिकारिक तौर पर कोई भी कारण स्पष्ट नहीं किया गया है. लद्दाख की वर्तमान सुरक्षा और राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए इस फैसले को काफी बड़ा माना जा रहा है. क्या उन्होंने व्यक्तिगत कारणों से यह कदम उठाया या फिर किसी बड़े राजनीतिक फेरबदल की तैयारी चल रही है. यह आने वाले कुछ समय में ही स्पष्ट हो पाएगा. फिलहाल लद्दाख राजभवन में सन्नाटा और अनिश्चितता का माहौल है.
पश्चिम बंगाल में बड़ा फेरबदल
लद्दाख के साथ-साथ पश्चिम बंगाल में भी बड़े प्रशासनिक बदलाव देखने को मिले हैं. वहाँ के राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. इस घटनाक्रम पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपनी गहरी हैरानी व्यक्त की है. सूत्रों के अनुसार. तमिलनाडु के राज्यपाल आर.एन. रवि को पश्चिम बंगाल का नया कार्यभार सौंपा जा सकता है. एक ही दिन में दो राज्यों के शीर्ष संवैधानिक पदों का खाली होना केंद्र सरकार की किसी बड़ी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है.
लद्दाख प्रशासन के सामने चुनौतियां
कविंदर गुप्ता के जाने से लद्दाख में एक तरह का प्रशासनिक वैक्यूम पैदा हो गया है. केंद्रशासित प्रदेश होने के नाते यहाँ के सभी महत्वपूर्ण निर्णय उपराज्यपाल द्वारा ही लिए जाते हैं. गुप्ता ने अपने छोटे से कार्यकाल में स्थानीय मुद्दों को सुलझाने की दिशा में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए थे. अब नए उपराज्यपाल के सामने लद्दाख की स्वायत्तता और विकास की मांगों के बीच संतुलन बैठाने की बड़ी चुनौती होगी. केंद्र को जल्द ही किसी ऐसे व्यक्ति को चुनना होगा जो क्षेत्र की नब्ज समझता हो.
इस्तीफों को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म
राष्ट्रीय स्तर पर इन इस्तीफों को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है. लद्दाख का अगला उपराज्यपाल कौन होगा. इसके लिए फिलहाल थोड़ा इंतजार करना होगा. केंद्र सरकार द्वारा नामों पर विचार किया जा रहा है और जल्द ही आधिकारिक घोषणा की उम्मीद है. पश्चिम बंगाल में आर.एन. रवि की संभावित नियुक्ति भी राज्य की राजनीति में नया मोड़ ला सकती है. आने वाले कुछ दिनों में केंद्र सरकार के इन फैसलों के पीछे की असली तस्वीर और अधिक साफ होकर सामने आएगी.


