दिल्ली में INDIA ब्लॉक की बड़ी बैठक, ममता बनर्जी भी पहुंचीं: 5 बड़े कारण
कांग्रेस का कहना है कि बैठक में 23 पार्टियों के शामिल होने की पुष्टि हो चुकी है। यह पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में TMC को मिली हार के बाद INDIA ब्लॉक की पहली बड़ी बैठक है।

नई दिल्ली: तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी 8 जून को दिल्ली में होने वाली INDIA ब्लॉक की बैठक में शामिल होने के लिए रविवार को राजधानी पहुंचीं। कोलकाता एयरपोर्ट से रवाना होने से पहले उनके साथ पार्टी नेता डोला सेन और कल्याण बनर्जी भी मौजूद थे। विपक्षी गठबंधन के लिए यह बैठक ऐसे समय पर हो रही है जब कई सहयोगी पार्टियां हालिया विधानसभा चुनावों के बाद राजनीतिक दबाव में हैं और कुछ राज्यों में गठबंधन के भीतर ही मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं।
कांग्रेस का कहना है कि बैठक में 23 पार्टियों के शामिल होने की पुष्टि हो चुकी है। यह पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में TMC को मिली हार के बाद INDIA ब्लॉक की पहली बड़ी बैठक है। राज्य में BJP के बेहतर प्रदर्शन के बाद राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं और TMC के अंदर असंतोष की खबरें भी आ रही हैं। ऐसे में ममता बनर्जी के लिए यह बैठक काफी अहम मानी जा रही है।
कांग्रेस और सहयोगियों के बीच बढ़ी दूरी
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार गठबंधन के अंदर तनाव भी साफ दिख रहा है। DMK ने बैठक से दूर रहने का फैसला किया है। पार्टी तमिलनाडु चुनावों के बाद कांग्रेस द्वारा TVK को समर्थन देने से नाराज है। कांग्रेस ने DMK गठबंधन के तहत चुनाव लड़कर पांच सीटें जीती थीं।
CPI(M) ने भी केरल चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेस के बयानों पर सवाल उठाए हैं। हालांकि पार्टी ने राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास को बैठक में भेजने का फैसला किया है।
बैठक के पांच अहम मायने
चुनावी हार के बाद पहली बड़ी चर्चा: पश्चिम बंगाल में TMC को BJP से कड़ी टक्कर मिली, वहीं असम में भी BJP ने बड़ी जीत दर्ज की। 2024 लोकसभा चुनाव के बाद कुछ धीमा पड़ा INDIA ब्लॉक अब विधानसभा और 2029 लोकसभा चुनाव से पहले खुद को फिर संगठित करने की कोशिश में है।
BJP के बढ़ते दबदबे पर मंथन: दिल्ली और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में BJP की जीत के बाद विपक्षी पार्टियां उसकी रणनीति पर चर्चा करेंगी। BJP अब पंजाब और तेलंगाना जैसे राज्यों पर भी फोकस कर रही है जहां वह अब तक सरकार नहीं बना पाई।
गठबंधन में दरार की चिंता: DMK का बैठक से दूरी बनाना और AAP का पहले ही अलग होना गठबंधन की एकता पर सवाल खड़े कर रहा है। ऐसे में यह बैठक सभी को एक मंच पर लाने का मौका है।
साझा एजेंडे को मजबूत करने की कोशिश: कई पार्टियों की नाराजगी के बीच बैठक में तालमेल बढ़ाने और BJP को मिलकर चुनौती देने के संकल्प को दोहराया जा सकता है।
नेतृत्व और रणनीति पर फैसला: 2029 लोकसभा चुनाव से पहले गठबंधन नेतृत्व का ढांचा और दलों के बीच बेहतर समन्वय पर भी चर्चा होगी। क्षेत्रीय पार्टियां फैसले में बड़ी भूमिका चाहती हैं, और यह बैठक संगठन को ज्यादा प्रभावी बनाने की दिशा में कदम हो सकती है।


