महिलाओं को राशि, दिल्ली का प्रदूषण, यमुना की सफाई और भ्रष्टाचार पर रोक...दिल्ली में बीजेपी के सामने क्या हैं चुनौतियां?
दिल्ली की सत्ता में 26 साल बाद निर्णायक जनादेश के साथ वापसी करने वाली बीजेपी के सामने कई चुनौतियां हैं, जिनमें चुनावी वादे पूरा करने के साथ-साथ आप सरकार द्वारा लागू की गई योजनाओं को यथावत जारी भी रखना है. इसके साथ ही महिलाओं को 2500 रुपये महीने की एकमुश्त राशि, यमुना की सफाई, बुनियादी ढांचे पर भी विशेष ध्यान देना होगा. ये सब काम दिल्ली की वित्तीय हालत को ध्यान में रखकर करना होगा.

दिल्ली की सत्ता में 26 साल बाद निर्णायक जनादेश के साथ वापसी करने वाली भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार के सामने कई चुनौतियां भी हैं, जिनमें अपने प्रमुख चुनावी वादों को पूरा करना, पिछली सरकार की कल्याणकारी योजनाओं को जारी रखना और शहर के प्रदूषण के साथ-साथ बुनियादी ढांचे की समस्याओं को ठीक करना और यमुना की सफाई जैसे अहम मुद्दे शामिल हैं.
विपक्ष में होगी AAP
बीजेपी सरकार को देश की राजधानी की वित्तीय हालत पर नजर रखते हुए ये सारे काम करने होंगे. अपने गठन के बाद से पहली बार सत्ता से बाहर हुई आम आदमी पार्टी (AAP) अब विपक्ष में होगी, और बीजेपी पर वादे पूरे करने का प्रेशर बनाएगी. हाल ही में संपन्न दिल्ली विधानसभा चुनाव में ही बीजेपी ने 48 सीट के साथ निर्णायक जीत हासिल की, जबकि आप को सिर्फ 22 सीट मिली हैं. इसके साथ ही राजधानी में AAP का एक दशक लंबा शासन समाप्त हो गया.
बीजेपी की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की शीर्ष प्राथमिकताओं में दिल्ली की महिलाओं को 2500 रुपये की राशि देने का वादापूरा करना होगा. यह पार्टी के मेनिफेस्टो में एक प्रमुख वादा था.दरअसल, AAP ने महिलाओं को 2100 रुपये देने का ऐलान किया था. बीजेपी ने एक कदम आगे बढ़ते हुए महिलाओं को 2500 रुपये देने की घोषणा कर दी.
पीएम मोदी ने किया था महिलाओं से वादा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 1 फरवरी को द्वारका में एक रैली को संबोधित करते हुए महिलाओं को आश्वासन दिया था कि अगर बीजेपी सत्ता में आती है तो पहली कैबिनेट बैठक में 2500 रुपये देने का प्रस्ताव पास किया जाएगा. उधर, पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी ने इस शुक्रवार को कहा कि वह नई सरकार के सामने महिलाओं के हक की आवाज उठाएंगीं.
बीजेपी के सामने एक और बड़ी चुनौती आप सरकार द्वारा शुरू की गई जनकल्याणकारी योजनाओं को जारी रखना होगा, जिसमें 200 यूनिट तक मुफ्त बिजली, मुफ्त पानी का कनेक्शन और महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा आदि शामिल हैं, जबकि बीजेपी ने मतदाताओं को आश्वासन दिया है कि ये योजनाएं बंद नहीं होंगी.
चुनाव प्रचार के दौरान पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने वोटर्स को भरोसा दिलाया था कि मुफ्त योजनाएं जारी रहेंगी लेकिन इन योजनाओं में घपलेबाजी को खत्म किया जाएगा.
आयुष्मान भारत योजना योजना भी करनी होगी लागू
बीजेपी को दिल्ली में अपने प्रमुख योजनाओं को भी लागू करना है. पार्टी ने दिल्ली में आयुष्मान भारत स्वास्थ्य बीमा योजना शुरू करने का वादा किया था और यह चुनावी मुद्दा बन गया था. इस योजना के तहत पांच लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज किया जाता है, साथ ही पांच लाख रुपये का अतिरिक्त खर्च राज्य सरकार वहन करती है. पिछली सरकार ने पहले इसे लागू करने से इनकार कर दिया था. पूर्व सरकार ने कहा था कि दिल्ली में मौजूदा स्वास्थ्य सेवा प्रणाली बेहतर है.
मोहल्ला क्लीनिक का बदला जाएगा नाम
बीजेपी ने दिल्ली के सभी ‘मोहल्ला क्लीनिक’ में सुधार करने का भी संकल्प लिया है और इनके कामकाज में भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है. राजौरी गार्डन से बीजेपी विधायक मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि ‘मोहल्ला क्लीनिक’ का नाम बदलकर ‘आयुष्मान आरोग्य मंदिर’ किया जाएगा और इनमें बेहतर स्वास्थ्य सेवा प्रदान की जाएगी.
सीएजी की रिपोर्ट विधानसभा में होगी पेश
भ्रष्टाचार को लेकर आप पर लगातार हमलावर रही बीजेपी का आरोप है कि वह वित्तीय अनियमितताओं को छिपाने के लिए जानबूझकर नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट को विधानसभा में पेश करने से बचने की कोशिश कर रही है. दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने कहा है कि सभी लंबित सीएजी रिपोर्ट विधानसभा में पेश की जाएंगी और सभी भ्रष्टाचार के आरोपों की गहराई से जांच की जाएगी.
आप के खिलाफ भ्रष्टाचार के दो मुख्य आरोप ‘शीश महल’ विवाद और शराब नीति मामले के थे. बीजेपी के अभियान के दौरान यमुना की सफाई एक बड़ा मुद्दा था. बीजेपी ने एक दशक लंबे शासन में नदी की सफाई में विफल रहने के लिए आप को घेरा, जबकि केजरीवाल ने आरोप लगाया कि बीजेपी के नेतृत्व वाली हरियाणा सरकार नदी को ‘जहरीले अमोनिया’ से प्रदूषित कर रही है.
यमुना की सफाई अहम मुद्दा
दिल्ली में पांच फरवरी को हुए चुनाव में जीत के बाद बीजेपी के विजय उत्सव के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने नदी की सफाई के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई. बीजेपी ने सरकार बनने से पहले ही यमुना की सफाई शुरू कर दी है और 57 किमी के हिस्से में सफाई अभियान के लिए कचरा निकालने वाली मशीनें, खरपतवार निकालने वाली मशीनें और ड्रेजर तैनात करना शुरू कर दिया है.
इसके अलावा, बीजेपी सरकार पर दिल्ली की खराब होती सड़कों और सीवेज व्यवस्था को सुधारने का दबाव होगा. खराब इंफ्रास्ट्रक्चर मतदाताओं की एक बड़ी चिंता थी और इन मुद्दों का समाधान करना सरकार की विश्वसनीयता के लिए महत्वपूर्ण होगा.
दिल्ली का प्रदूषण
दिल्ली का प्रदूषण सबसे बड़ी चिंताओं में से एक है क्योंकि यह वैश्विक स्तर पर सबसे प्रदूषित राजधानियों में से एक है. बीजेपी सरकार पर इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) नीति को बदलने सहित एक प्रदूषण को नीचे करने का भी जिम्मा है,आप 2020 में लागू होने के बाद संशोधित करने में विफल रही.
बीजेपी के लिए एक और चुनौती दिल्ली में एक स्थिर नेतृत्व बनाए रखना होगा. पिछली बार 1993 से 1998 के बीच पांच साल के कार्यकाल में बीजेपी ने तीन मुख्यमंत्रियों को बदल दिया था, इनमें मदन लाल खुराना, साहिब सिंह वर्मा और सुषमा स्वराज शामिल थे.
पांच साल में होंगे तीन मुख्यमंत्री- आप का हमला
आप ने बीजेपी की दिल्ली इकाई में संभावित आंतरिक संघर्षों के बारे में चिंता जताई है. आप के वरिष्ठ नेता गोपाल राय ने बुधवार को कहा, ‘‘मुख्यमंत्री चुनने में उनकी देरी से पता चलता है कि उनके पास कोई चेहरा नहीं है और अंदरूनी मतभेद हैं. वास्तविकता यह है कि इतिहास खुद को दोहरा सकता है और हम पांच साल में तीन मुख्यमंत्री देख सकते हैं.’’
विधानसभा चुनाव के परिणाम आठ फरवरी को घोषित होने के बाद विजेता बनकर उभरी बीजेपी को दिल्ली के लिए अपना मुख्यमंत्री चुनने में 10 दिन से अधिक का समय लगा. दिल्ली में बीजेपी का प्रदर्शन ‘आप’ का भविष्य तय करने और देश की राजनीतिक दिशा को निर्धारित करने में प्रमुख भूमिका निभाएगा.


