'नेहरू ब्रिटिश एजेंट थे, देश को बेचते रहे...', AI समिट विवाद पर BJP ने कांग्रेस को लताड़ा

बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में बीजेपी सांसद संभित पात्रा ने पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू पर तीखा हमला बोला. उन्होंने नेहरू को कम्प्रोमाइज्ड करार देते हुए दावा किया कि उनके कार्यालय में CIA और KGB के एजेंट घुसे हुए थे. जिसके बाद से राजनीतिक बहस छिड़ गई है.

Goldi Rai
Edited By: Goldi Rai

भारतीय जनता पार्टी ने गुरुवार को कांग्रेस और पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू पर तीखा हमला बोला, उन्हें समझौतावादी करार देते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने देश की सुरक्षा से खिलवाड़ किया. पार्टी ने दावा किया कि नेहरू हमेशा ब्रिटिश की तरह व्यवहार करते थे और उन्होंने जानबूझकर गलतियां कीं ताकि भारत कमजोर हो जाए. नई दिल्ली स्थित बीजेपी मुख्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में सांसद संबित पात्रा ने कहा कि नेहरू के कार्यालय में सीआईए और केजीबी के एजेंट सक्रिय थे, जिससे देश की गोपनीय जानकारी विदेशी ताकतों तक पहुंचती थी.

पात्रा ने उस दौर की स्थिति को बेहद गंभीर बताते हुए पूछा कि नेहरू ने भारत की सुरक्षा से समझौता क्यों किया और गुप्त दस्तावेज विदेशी एजेंटों को क्यों सौंपे. उन्होंने नेहरू को 'समझौतावादी चाचा' कहते हुए आरोप लगाया कि उनकी वजह से आज भी देश परेशानियों का सामना कर रहा है.

नेहरू के कार्यालय में सीआईए और केजीबी का दखल

प्रेस कॉन्फ्रेंस में पात्रा ने कहा कि समझौता किए हुए चाचा के सचिवालय में सीआईए की इतनी मजबूत उपस्थिति थी कि उनके विशेष सहायक या विशेष सचिव, जिनका नाम एमओ मथाई था, को अमेरिकी एजेंट कहा जाता था और उन्नीस सौ साठ के दशक में, रूसी एजेंसी केजीबी के एजेंट भी समझौता किए हुए चाचा के कार्यालय में मौजूद थे. उन्होंने आगे कहा कि चाहे वह एमओ मथाई हों या केजीबी एजेंट, सीआईए और केजीबी की चाचा नेहरू के कार्यालय में मजबूत पकड़ थी, और 1960 और 1970 के दशक में नेहरू के शासनकाल के बारे में यह कहा जाता था कि विदेश मंत्रालय को जिस भी दस्तावेज की आवश्यकता होती थी, वह अमेरिका और रूस के लिए आसानी से उपलब्ध होता था.

बीजेपी का आरोप

पात्रा ने आरोप लगाया कि पंचशील समझौते के तहत नेहरू ने तिब्बत को चीन को उपहार में दे दिया. उन्होंने दावा किया कि आईबी ने नेहरू को अक्साई चिन में चीन द्वारा सड़क बनाने की जानकारी दी थी, लेकिन पूर्व प्रधानमंत्री ने इसे पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया और चीन को बचाने की कोशिश की. उन्होंने 1962 के भारत-चीन युद्ध में हार के लिए भी नेहरू को जिम्मेदार ठहराया, कहते हुए कि उन्होंने अपने रिश्तेदार जनरल बीएम कौल को सेना प्रमुख बनाया और फॉरवर्ड पॉलिसी अपनाई.

पाकिस्तान को बेरूबाड़ी उपहार में दिया

बीजेपी नेता ने कहा कि नेहरू ने पश्चिम बंगाल सरकार को सूचित किए बिना बेरूबाड़ी पाकिस्तान को सौंप दिया. सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बावजूद, नेहरू ने नौवें संवैधानिक संशोधन के माध्यम से बेरूबारी को पाकिस्तान को दे दिया.  पात्रा ने कहा कि नेहरू के इन समझौतों की वजह से आज भारत को नुकसान उठाना पड़ रहा है. क्या नेहरू को चीन और पाकिस्तान से रिश्वत मिली थी और यही कारण था कि नेहरू ने भारत की जमीन इन दोनों देशों को उपहार में दी थी - यह एक ऐसा सवाल है जो हमें कांग्रेस की वर्तमान सरकार से पूछना चाहिए. उन्होंने प्रेसर में कहा.

ताजा खबरें

ट्रेंडिंग वीडियो

close alt tag