रूस से तेल बंद? भारत-अमेरिका डील के बाद ऊर्जा सेक्टर में हलचल
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के बाद रूस से तेल आयात घटाने की चर्चा तेज है. कंपनियों का कहना है कि बदलाव में समय लगेगा. अमेरिका टैरिफ घटा रहा है, जबकि भारत ऊर्जा आपूर्ति के नए स्रोत तलाशने की तैयारी कर रहा है.

नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हुए हालिया व्यापार समझौते का असर अब भारत के ऊर्जा क्षेत्र में दिखाई देने लगा है. इस समझौते के तहत भारत ने संकेत दिया है कि वह रूस से तेल खरीद कम करेगा या बंद करेगा और उसकी जगह अमेरिका तथा वेनेजुएला से आयात बढ़ाएगा. हालांकि तेल कंपनियों का कहना है कि इस बदलाव को लागू करने में समय लगेगा.
इस व्यापार समझौते का सबसे बड़ा पहलू टैरिफ और ऊर्जा से जुड़ा है. अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर लगने वाला आयात शुल्क 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने की घोषणा की है. इसके बदले में भारत को अपनी कुछ व्यापारिक बाधाएं कम करनी होंगी और ऊर्जा आपूर्ति के स्रोतों में बदलाव करना होगा. अमेरिका चाहता है कि भारत रूस से तेल की खरीद घटाए, ताकि रूस की आय कम हो और यूक्रेन युद्ध के लिए उसकी फंडिंग पर असर पड़े. ट्रंप ने कहा है कि इस मुद्दे पर दोनों देशों के बीच सहमति बनी है.
तेल कंपनियों की स्थिति
भारतीय रिफाइनिंग कंपनियों के सामने तुरंत बदलाव करना आसान नहीं है. उद्योग से जुड़े सूत्रों के अनुसार, सरकार की ओर से अभी तक कोई लिखित आदेश जारी नहीं हुआ है कि रूसी तेल का आयात तुरंत बंद किया जाए. फरवरी में जो रूसी तेल के कार्गो बुक किए गए थे, वे मार्च में भारत पहुंच रहे हैं. इन सौदों को अचानक रद्द करना संभव नहीं है. कंपनियों का कहना है कि मौजूदा अनुबंधों को पूरा करने और नए आपूर्तिकर्ताओं से समझौते करने में समय लगेगा.
नयारा एनर्जी की चुनौती
रूस समर्थित नयारा एनर्जी की रिफाइनरी पूरी तरह रूसी कच्चे तेल पर निर्भर है. इसकी क्षमता करीब चार लाख बैरल प्रतिदिन है. चूंकि इराक और सऊदी अरब पहले ही इस रिफाइनरी को आपूर्ति कम कर चुके हैं, इसलिए विकल्प सीमित हैं. हालांकि, जानकारी के अनुसार नयारा अप्रैल में अपनी रिफाइनरी को रखरखाव के लिए अस्थायी रूप से बंद करने वाली है. उस दौरान रूसी तेल का आयात अपने आप रुक जाएगा.
रूस से आयात पर सरकार का रुख
यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद भारत रूस से समुद्री तेल का बड़ा खरीदार बन गया था. लेकिन हाल के महीनों में भारत ने अपनी आपूर्ति में विविधता लानी शुरू कर दी है. दिसंबर में रूसी तेल का आयात दो वर्षों के निचले स्तर पर पहुंच गया था. प्रधानमंत्री मोदी ने टैरिफ में कटौती पर खुशी जताई है, लेकिन रूसी तेल आयात बंद करने पर उन्होंने सीधे तौर पर कोई सार्वजनिक बयान नहीं दिया है.


