नई दिल्ली: लगातार 50 दिनों तक चले छात्र आंदोलन और NEET पेपर लीक विवाद के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया. इस्तीफे की घोषणा करते हुए प्रधान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि उन्होंने यह फैसला इसलिए लिया ताकि छात्रों के मुद्दे पर चल रहे आंदोलन का राष्ट्रविरोधी ताकतें गलत फायदा न उठा सकें और भ्रम फैलाने की कोशिशों पर रोक लगाई जा सके.
धर्मेंद्र प्रधान पिछले कई वर्षों से भाजपा के प्रमुख चेहरों में गिने जाते रहे हैं. संगठन कौशल और प्रशासनिक अनुभव के दम पर उन्होंने केंद्र सरकार में पेट्रोलियम, कौशल विकास और शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाली. वहीं वर्ष 2021 में उन्हें पहली बार केंद्रीय शिक्षा मंत्री बनाया गया था और 2024 में लोकसभा चुनाव जितने के बाद उन्हें दोबारा इस पद की जिम्मेदारी सौंपी गई.
दिलचस्प बात यह है कि जिस पेपर लीक विवाद के चलते उन्हें आज इस्तीफा देना पड़ा, उसी तरह के एक परीक्षा प्रश्नपत्र लीक विरोधी आंदोलन ने करीब 28 साल पहले उनके राजनीतिक जीवन की दिशा तय की थी. बता दें, वर्ष 1997 में ओडिशा में परीक्षा पेपर लीक के खिलाफ हुए छात्र आंदोलन में धर्मेंद्र प्रधान अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के राष्ट्रीय सचिव थे.
उनके नेतृत्व में छात्रों ने भुवनेश्वर में राज्य सचिवालय का घेराव किया, जहां पुलिस लाठीचार्ज में वह गंभीर रूप से घायल हो गए थे. उस आंदोलन के बाद उन्होंने औपचारिक रूप से भाजपा का दामन थामा और धीरे-धीरे पार्टी के प्रमुख नेताओं में शामिल हो गए.
इस्तीफे के बाद अपने संदेश में प्रधान ने कहा कि उन्होंने चार दशकों से अधिक समय छात्रों, शिक्षकों और शिक्षा व्यवस्था के सुधार के लिए काम किया है. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताते हुए कहा कि शिक्षा मंत्री के रूप में सेवा करना उनके लिए सम्मान की बात रही. उन्होंने NEET-UG परीक्षा में हुई गड़बड़ियों की जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए कहा कि उनका हमेशा प्रयास रहा कि किसी भी योग्य छात्र के साथ अन्याय न हो और परीक्षा माफिया छात्रों का भविष्य प्रभावित न कर सकें.
इतना ही नहीं धर्मेंद्र प्रधान ने यह भी कहा कि हाल के दिनों में कुछ लोगों ने छात्रों को गुमराह कर स्थिति को और जटिल बनाने की कोशिश की, जिससे उन्हें व्यक्तिगत रूप से भी दुख पहुंचा. उन्होंने कहा कि उनके लिए पद से ज्यादा महत्वपूर्ण देश के युवाओं का भविष्य है और भारत की युवा शक्ति ही देश की सबसे बड़ी ताकत है. First Updated : Saturday, 25 July 2026