नई दिल्ली. 7 मई 2025 को भारत ने जो किया, वह इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो चुका है. ऑपरेशन सिंदूर के नाम से चली यह सैन्य कार्रवाई महज एक जवाबी हमला नहीं, बल्कि दुश्मन को चेतावनी थी—अब हर गोली का जवाब ब्रह्मोस से मिलेगा. 22 अप्रैल को पहलगाम में 26 निर्दोष पर्यटकों की बर्बर हत्या के बाद भारत ने चुप्पी की जगह प्रतिशोध को चुना और एक के बाद एक ऐसे हथियार इस्तेमाल किए जो पूरी तरह भारत में बने थे.
पाकिस्तान द्वारा 7 से 11 मई के बीच किए गए मिसाइल और ड्रोन हमलों को भारत ने न सिर्फ रोका, बल्कि जवाब में आतंक के केंद्रों को ध्वस्त कर दिया. डीआरडीओ द्वारा विकसित डी4 एंटी-ड्रोन सिस्टम ने सबसे पहले देश की रक्षा की पहली परत बनाई. यह प्रणाली दुश्मन के ड्रोन और मिसाइलों को हवा में ही तबाह कर देती है, और इस ऑपरेशन में इसकी अहम भूमिका रही.
10 मई की सुबह जब ब्रह्मोस मिसाइलें पाकिस्तान की जमीन पर गिरीं, तो उनके साथ गिरीं आतंक की मीनारें. भारत ने सुपरसोनिक ब्रह्मोस क्रूज मिसाइलों से दुश्मन के एयरबेस, रनवे और हथियार डिपो को नेस्तनाबूद कर दिया. इन मिसाइलों की गति आवाज से ढाई गुना तेज है और इन्हें रोकना लगभग नामुमकिन. यह मिसाइल भारत के जमीनी लॉन्चर, जहाजों और सुखोई-30 एमकेआई जैसे फाइटर जेट्स से दागी जा सकती है.
स्वदेशी रूप से तैयार सुखोई-30 एमकेआई ने ऑपरेशन सिंदूर में बैकबोन की भूमिका निभाई. ब्रह्मोस को लेकर उड़ान भरने वाला यह जेट दुश्मन के ठिकानों पर निशाना साधने के लिए 11 घंटे तक हवा में रह सकता है. इसकी वजह से भारतीय वायुसेना की मारक क्षमता कई गुना बढ़ गई.
इजराइल और भारत की साझा तकनीक से बनी बराक-8 मिसाइल दुश्मन के विमानों, ड्रोन और मिसाइलों को लक्ष्य पर पहुंचने से पहले ही मार गिराने में सक्षम है. इसकी तीव्र प्रतिक्रिया क्षमता और अत्याधुनिक रडार इसे हवाई रक्षा का बेहद विश्वसनीय हथियार बनाते हैं.
भारत के IACCS सिस्टम ने दुश्मन की हर हरकत पर निगरानी रखी. जमीन के नीचे बने इसके नियंत्रण कक्ष से रडार, सैटेलाइट और विमानों से मिले डेटा को जोड़कर एक लाइव युद्ध दृश्य तैयार किया गया. इसने भारतीय सेना को पल-पल की जानकारी दी और जवाबी हमला सटीक बनाया.
भारत में बनी आकाश-NG मिसाइल प्रणाली ने ऑपरेशन सिंदूर में दर्जनों ड्रोन और मिसाइल हमलों को हवा में ही निष्क्रिय किया. यह मध्यम दूरी की मिसाइल सिस्टम अब सेना और वायुसेना दोनों के बेड़े में शामिल है और 20 किलोमीटर तक ऊंचे टारगेट्स को मिनटों में मार गिरा सकती है. ऑपरेशन सिंदूर साबित करता है कि भारत अब न सिर्फ रणनीतिक रूप से तैयार है, बल्कि तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर भी हो चुका है. यह सिर्फ सैन्य कार्रवाई नहीं थी, बल्कि एक राष्ट्र की हुंकार थी—'अब हर वार का जवाब होगा, वो भी हिंदुस्तानी हथियारों से.' First Updated : Saturday, 17 May 2025