बीजेपी एमपी खगेन मुर्मू पर हमले को लेकर पीएम मोदी ने साधा ममता बनर्जी पर निशाना, दीदी ने भी पलटकर दिया जवाब

उत्तर बंगाल में भूस्खलन और बाढ़ से कम से कम 30 लोग मरे और कई लापता हुए. जलपाईगुड़ी में भाजपा नेताओं पर हमला हुआ. मोदी ने राज्य सरकार से राहत प्राथमिकता देने को कहा, जबकि ममता बनर्जी ने राजनीतिकरण का आरोप लगाया. पीड़ितों को मुआवजा और रोजगार की घोषणा की गई.

Yaspal Singh
Edited By: Yaspal Singh

Darjeeling landslide: उत्तर बंगाल में लगातार मूसलाधार बारिश के बाद आए भूस्खलन और बाढ़ ने कम से कम 30 लोगों की जान ले ली और कई लोग लापता हो गए हैं. इस प्राकृतिक आपदा के बीच जलपाईगुड़ी के नागराकाटा में भाजपा सांसद खगेन मुर्मू और सिलीगुड़ी विधायक शंकर घोष पर भीड़ ने हमला कर दिया. हमले का वीडियो सामने आया है, जिसमें मुर्मू के चेहरे और नाक से खून बहता दिखाई दे रहा है. भाजपा ने आरोप लगाया कि यह हमला सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) से जुड़े स्थानीय लोगों ने किया, जबकि टीएमसी ने इसे विपक्ष की राजनीतिक चाल बताया.

प्रधानमंत्री मोदी का बयान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस हमले की निंदा करते हुए राज्य सरकार से राहत कार्यों को प्राथमिकता देने का आग्रह किया. उन्होंने कहा कि भाजपा कार्यकर्ताओं पर हमला राज्य में कानून-व्यवस्था की दयनीय स्थिति और टीएमसी की असंवेदनशीलता को उजागर करता है. मोदी ने भाजपा कार्यकर्ताओं से लोगों की मदद और बचाव कार्यों में सक्रिय योगदान देने का आह्वान भी किया.

ममता बनर्जी का जवाब

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री मोदी की आलोचना करते हुए कहा कि प्राकृतिक आपदा का राजनीतिकरण करना अनुचित है. उन्होंने ट्विटर पर लिखा कि बिना किसी सत्यापित सबूत या कानूनी जांच के सीधे टीएमसी और पश्चिम बंगाल सरकार को दोषी ठहराना संवैधानिक मूल्यों का उल्लंघन है. बनर्जी ने चेतावनी दी कि ऐसे असत्यापित आरोप सर्वोच्च पद की गरिमा को कम करते हैं और केवल उचित प्रक्रिया ही दोष का निर्धारण कर सकती है. इससे पहले उन्होंने जनता से संयम और एकता बनाए रखने और किसी अप्रिय घटना में शामिल न होने का आग्रह किया था.

राज्यपाल की प्रतिक्रिया

पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सी.वी. आनंद बोस ने दार्जिलिंग में डेरा डाले हुए इस घटना पर गहरी चिंता व्यक्त की. उन्होंने तत्काल कदम उठाने और कानून-व्यवस्था बहाल करने की आवश्यकता पर जोर दिया.

आपदा का व्यापक असर

भूस्खलन और बाढ़ से मिरिक, दार्जिलिंग और दुआर्स क्षेत्र की बस्तियाँ बह गईं, पुल और सड़कें क्षतिग्रस्त हो गईं और जलपाईगुड़ी व अलीपुरद्वार के कई चाय बागानों को भारी नुकसान हुआ. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बाढ़ को "मानव निर्मित" करार दिया और दामोदर घाटी निगम द्वारा अनियंत्रित जल-त्याग और केंद्र सरकार की अपर्याप्त जल प्रबंधन नीति को इसका जिम्मेदार ठहराया.

राहत और मुआवजा

पीड़ित परिवारों के लिए मुख्यमंत्री ने 5 लाख रुपये मुआवजे की घोषणा की और प्रत्येक शोक संतप्त परिवार के एक सदस्य को होमगार्ड की नौकरी देने का वादा किया. बचाव और खोज अभियान जारी है और कम से कम चार लोग अभी भी लापता हैं.

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