राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता समाप्त करने और चुनाव लड़ने से रोकने के लिए विशेषाधिकार प्रस्ताव पेश

राहुल गांधी के बजट सत्र में दिए 'देश को बेचने' वाले बयान पर भाजपा ने तीखी आपत्ति जताते हुए उनके खिलाफ सब्सटेंटिव मोशन और सदस्यता खत्म करने की मांग की है.

Suraj Mishra
Edited By: Suraj Mishra

लोकसभा के बजट सत्र के दौरान कांग्रेस नेता और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के एक बयान ने सियासी हलचल तेज कर दी है. बुधवार, 11 फरवरी को सदन में बोलते हुए राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि उसने हालिया ट्रेड डील के जरिए 'भारत माता को बेचने' जैसा कदम उठाया है. उनके इस बयान के बाद भाजपा और कांग्रेस के बीच तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है.

 निशिकांत दुबे का राहुल पर आरोप 

भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी पर देश को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए उनके खिलाफ लोकसभा में एक सब्सटेंटिव मोशन पेश करने की बात कही है. दुबे का कहना है कि राहुल ऐसे तत्वों के प्रभाव में आकर बयान दे रहे हैं जो भारत के हितों के खिलाफ काम करना चाहते हैं. उन्होंने मीडिया से बातचीत में बताया कि उन्होंने अपने प्रस्ताव में राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता समाप्त करने और उन पर आजीवन चुनाव लड़ने पर रोक लगाने की मांग भी की है. दुबे ने लोकसभा अध्यक्ष से अनुरोध किया है कि उनके प्रस्ताव को स्वीकार कर आवश्यक कार्रवाई की जाए.

कांग्रेस की ओर से प्रियंका गांधी वाड्रा ने सरकार पर पलटवार किया. उन्होंने कहा कि भारत-अमेरिका ट्रेड समझौते से देश के किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है. उन्होंने बताया कि कई श्रमिक संगठन इस मुद्दे पर हड़ताल पर हैं और कांग्रेस उनका समर्थन कर रही है. राहुल गांधी के खिलाफ संभावित कानूनी कार्रवाई पर उन्होंने कहा कि एफआईआर या मुकदमों से राहुल पर कोई असर नहीं पड़ेगा.

राहुल गांधी का सरकार पर तीखा हमला 

इस विवाद की शुरुआत तब हुई जब केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट पर चर्चा का जवाब देते हुए विपक्ष की आलोचना की. इसके बाद राहुल गांधी ने सरकार पर तीखा हमला बोला और कहा कि देश को अमेरिका के हाथों सौंपा जा रहा है. उनके इस बयान पर केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भारत को खरीदने की ताकत किसी में नहीं है.

भाजपा सांसद जगदंबिका पाल ने भी राहुल गांधी की भाषा पर सवाल उठाए. उनका कहना था कि नेता प्रतिपक्ष को अपने शब्दों की मर्यादा का ध्यान रखना चाहिए. उन्होंने याद दिलाया कि 2013 में WTO समझौते को लेकर कांग्रेस सरकार ने जो निर्णय लिया था, उस पर भी सवाल उठे थे. सीतारमण ने कहा कि 2017 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कुछ फैसलों को बदला और देशहित को प्राथमिकता दी. उनके मुताबिक सरकार की आलोचना करना लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन ऐसे आरोपों से देश की छवि प्रभावित होती है.

सब्सटेंटिव मोशन एक औपचारिक संसदीय प्रस्ताव होता है, जिसके जरिए किसी मुद्दे पर चर्चा या कार्रवाई की मांग की जाती है. इसे स्वीकार या अस्वीकार करने का अधिकार संबंधित सदन के पीठासीन अधिकारी के पास होता है.

ताजा खबरें

ट्रेंडिंग वीडियो

close alt tag