कृषि भवन से गायब हो जाएगी कदीमी मस्जिद? नए टेंडर ने मचा दिया हंगामा!
दिल्ली में जारी सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना के कारण पुरानी मस्जिदों पर संकट मंडरा रहा है. 100 साल पुरानी एक मस्जिद को लेकर विवाद शुरू हो गया है.

नई दिल्ली: दिल्ली में चल रही सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना के कारण एक पुरानी मस्जिद के भविष्य पर सवाल खड़े हो गए हैं. कृषि भवन के परिसर में बनी 100 साल से अधिक पुरानी 'कदीमी मस्जिद' अब खतरे में दिख रही है. हाल ही में जारी नए टेंडर दस्तावेजों ने दिल्ली वक्फ बोर्ड की चिंता को और बढ़ा दिया है.
मस्जिद पर मंडराया संकट
सेंट्रल विस्टा परियोजना के तहत पुरानी सरकारी इमारतों को हटाकर नई और आधुनिक इमारतें बनाई जा रही हैं. इसी क्रम में कृषि भवन और शास्त्री भवन को ध्वस्त करने की तैयारी चल रही है. इनकी जगह कॉमन सेंट्रल सेक्रेटेरिएट (सीसीएस) की इमारतें 4 और 5 बनेंगी.
केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (सीपीडब्ल्यूडी) ने 19 जनवरी 2026 को इस काम के लिए टेंडर जारी किया. टेंडर की अंतिम तारीख 13 फरवरी है और इसकी अनुमानित लागत 3,006 करोड़ रुपये से ज्यादा है. काम 24 महीने में पूरा होना है.
टेंडर के दस्तावेजों में मस्जिद को स्पष्ट रूप से हटाई जाने वाली संरचनाओं की सूची में नहीं डाला गया है, लेकिन संलग्न नक्शों और ड्रॉइंग्स में मस्जिद को नए भवन के प्लान में उसके मौजूदा स्थान पर नहीं दिखाया गया है. इससे यह आशंका मजबूत हो गई है कि मस्जिद को हटाया जा सकता है.
वक्फ बोर्ड और इमाम की आपत्ति
कदीमी मस्जिद कृषि भवन के खुले प्रांगण में बनी है. यह मुख्य रूप से सरकारी कर्मचारियों के लिए नमाज पढ़ने की जगह है. हालांकि यह भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की संरक्षित इमारतों में शामिल नहीं है, लेकिन 1970 के दिल्ली राजपत्र में वक्फ संपत्तियों की सूची में दर्ज है. वक्फ बोर्ड का कहना है कि मस्जिद सरकारी भवन से भी पुरानी है.
बोर्ड ने पहले दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसमें सेंट्रल विस्टा क्षेत्र की छह मस्जिदों को सुरक्षा देने की मांग की गई थी. 2024 में कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी और कहा कि खतरा साबित होने पर दोबारा आया जा सकता है. सुनवाई में 2021 में सॉलिसिटर जनरल ने आश्वासन दिया था कि धार्मिक स्थलों को कोई नुकसान नहीं पहुंचेगा.
अब बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष अमानतुल्ला खान ने कहा है कि सरकार ने कोर्ट में वादा किया था, लेकिन नए टेंडर से लगता है कि मस्जिद को हटाया जा सकता है. यह वादाखिलाफी होगी.
पहले भी ऐसे मामले
सेंट्रल विस्टा परियोजना में पहले भी कुछ धार्मिक स्थल प्रभावित हुए हैं. उपराष्ट्रपति के पूर्व आवास परिसर में एक मस्जिद और एक मंदिर को हटाया जा चुका है. इससे समुदाय में असुरक्षा की भावना बढ़ी है।वक्फ बोर्ड और स्थानीय लोग मांग कर रहे हैं कि मस्जिद को सुरक्षित रखा जाए.
केंद्र सरकार से अपील है कि पुराने आश्वासन का सम्मान किया जाए. अगर मस्जिद हटाई गई तो यह धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला कदम माना जाएगा.


