भारत-अमेरिका व्यापार समझौता तीन काले कृषि कानूनों से भी अधिक खतरनाक : CM भगवंत सिंह मान
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने मंगलवार को विधानसभा में चेतावनी दी कि प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौता तीन विवादित कृषि कानूनों से भी ज्यादा खतरनाक साबित हो सकता है. उन्होंने कहा कि इससे देश की कृषि संप्रभुता पर गंभीर खतरा मंडराएगा और पंजाब के किसान विदेशी उत्पादों से मुकाबला नहीं कर पाएंगे.

पंजाब: भगवंत सिंह मान ने विधानसभा में कृषि मंत्री द्वारा लाए गए प्रस्ताव पर चर्चा समाप्त करते हुए साफ कहा कि यह समझौता भारतीय किसानों के लिए बड़ी चुनौती बन जाएगा. उन्होंने पूर्व में लाए गए तीन कृषि कानूनों का जिक्र करते हुए बताया कि उस समय किसान आंदोलन हुआ था लेकिन अब यह सौदा उससे भी ज्यादा नुकसानदेह हो सकता है.
समझौते का कृषि पर खतरा
मुख्यमंत्री ने बताया कि सस्ते आयात से मक्का और सोयाबीन की कीमतें गिर सकती हैं. पंजाब में डेढ़ लाख हेक्टेयर में मक्का और ढाई लाख एकड़ में कपास बोई जाती है. दोनों फसलों पर बुरा असर पड़ेगा. कपास आयात कोटा से नियंत्रित होने पर भी कीमतें प्रभावित होंगी. गैर शुल्क शर्तों में ढील से जीएमओ सामग्री और नए कीट रोग खरपतवार फैल सकते हैं जिससे पंजाब का कृषि पारिस्थितिकी तंत्र खतरे में पड़ जाएगा.
अमेरिका में औसत खेत 500 एकड़
मान ने कहा कि अमेरिका में औसत खेत 500 एकड़ का होता है जबकि पंजाब के किसान के पास सिर्फ दो से ढाई एकड़ जमीन है. अमेरिकी किसानों को भारतीयों से 35 प्रतिशत ज्यादा सब्सिडी मिलती है. बड़े पैमाने की अर्थव्यवस्था के कारण वे सस्ते दाम पर निर्यात करते हैं. ऐसे में पंजाब के छोटे किसान मुकाबला नहीं कर पाएंगे. बीज पेटेंट के प्रावधान से किसान अगले सीजन के लिए बीज नहीं बचा सकेंगे और बहुराष्ट्रीय कंपनियों के ग्राहक बन जाएंगे.
एकजुट होकर आवाज उठाने की अपील
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि राज्यों से न तो सलाह ली गई और न ही जानकारी दी गई. उन्होंने पूछा कि प्रधानमंत्री की क्या मजबूरी है. क्या फैसले व्हाइट हाउस से होते हैं. उन्होंने कहा कि पहले पाकिस्तान युद्धविराम की खबर ट्रंप के ट्वीट से आई थी. अब बजट में कृषि हिस्सा 25 प्रतिशत से घटकर 7 प्रतिशत रह गया है. पंजाब को बाढ़ फंड नहीं मिले लेकिन अफगानिस्तान को मदद दी गई. उन्होंने विश्वगुरु से विश्वचेला बनने का तंज कसा.
किसानों की अपील
भगवंत मान ने किसान यूनियनों विशेषज्ञों और बुद्धिजीवियों से एकजुट होकर आवाज उठाने की अपील की. उन्होंने कहा कि यह समझौता देश के अधिकारों को अमेरिका के सामने गिरवी रख देगा. केंद्र की अनदेखी चंडीगढ़ और पंजाब विश्वविद्यालय पर कब्जे की कोशिशों तक पहुंच गई है. फैसले सिर्फ दो नेताओं के हाथ में हैं. मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि कृषि को समझौते से बाहर रखना समय की मांग है वरना किसान बहुराष्ट्रीय कंपनियों के शिकार बन जाएंगे.


