ये चमत्कार नहीं तो क्या है? 2 साल की उम्र में वर्ल्ड रिकॉर्ड, नन्ही प्रिशा को जुबानी याद हैं 30 से ज्यादा मंत्र
2 साल की उम्र में जयपुर की प्रिशा ने इतिहास रच दिया है. जहां बच्चे आमतौर पर ठीक से दो शब्द भी नहीं बोल पाते वहां प्रिशा ने 30 से ज्यादा वैदिक और धार्मिक मंत्रों को पूरी शुद्धता के साथ याद कर लिया है.

राजस्थान: जयपुर की महज 2 साल की नन्हीं प्रिशा ने अपनी असाधारण मेमोरी पावर के दम पर एक ऐसा इतिहास रचा है जिसे सुनकर हर कोई दंग है. इस नन्हीं सी उम्र में जहां बच्चे आमतौर पर ठीक से दो शब्द भी नहीं बोल पाते वहां प्रिशा ने 30 से अधिक कठिन वैदिक और धार्मिक मंत्रों को पूरी शुद्धता के साथ कंठस्थ कर लिया है.
इंटरनेशनल बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में नाम दर्ज
उनकी इस विस्मयकारी प्रतिभा को वैश्विक स्तर पर सम्मान मिला है और उनका नाम ‘इंटरनेशनल बुक ऑफ रिकॉर्ड्स’ में दर्ज किया गया है. प्रिशा की इस कामयाबी ने न केवल उनके माता-पिता बल्कि पूरे जयपुर और राजस्थान का नाम देश-दुनिया में रोशन कर दिया है.
20 महीने की उम्र में शुरू हुआ सफर
प्रिशा ने महज 20 महीने की उम्र में अपना पहला मंत्र याद कर लिया था. जब उन्होंने अपनी तुतली जुबान से पहली बार पूरी स्पष्टता के साथ मंत्रोच्चारण किया तो उनके माता-पिता भी आश्चर्यचकित रह गए. इसके बाद से उनकी सीखने की गति लगातार बढ़ती चली गई और देखते ही देखते उन्होंने 30 से ज्यादा मंत्रों को अपनी याददाश्त का हिस्सा बना लिया. इतनी छोटी उम्र में मंत्रों का बिल्कुल शुद्ध उच्चारण करना लोगों को हैरत में डाल रहा है.
माता-पिता का मार्गदर्शन
नन्ही प्रिशा की इस असाधारण सफलता के पीछे उनकी तेज बुद्धि के साथ-साथ उनके घर का आध्यात्मिक वातावरण और माता-पिता का सही मार्गदर्शन है. परिवार में रोज होने वाले पूजा-पाठ और मंत्रोच्चारण को सुनकर प्रिशा की सुनने और सीखने की क्षमता बेहद तीव्र होती गई. वह मंत्रों की धुन और उनके कठिन शब्दों को बहुत जल्दी पकड़ लेती हैं.
मंत्रों को कैसे याद कराया
सबसे खास बात यह है कि प्रिशा के माता-पिता ने पढ़ाई या याद करने का उन पर कभी कोई मानसिक दबाव नहीं डाला. उन्होंने प्रिशा को खेल-खेल में कहानियों के जरिए और बेहद रोचक तरीकों से इन मंत्रों को याद कराया. इसी बिना दबाव वाले और प्रेरणादायक माहौल ने प्रिशा के भीतर छिपी इस अनूठी प्रतिभा को निखारने का काम किया.
सकारात्मक संस्कार मिलें
प्रिशा ने यह साबित कर दिया है कि प्रतिभा किसी उम्र की मोहताज नहीं होती. उनकी यह डिजिटल और वैश्विक उपलब्धि दर्शाती है कि अगर बच्चों को बचपन से ही सही और सकारात्मक संस्कार मिलें तो वे किसी भी उम्र में असाधारण मुकाम हासिल कर सकते हैं.


