बिहार की राजनीति में 14 अप्रैल 2026 का दिन अहम माना जा रहा है। लंबे समय तक सत्ता में रहे नीतीश कुमार के बाद अब नया नेतृत्व सामने आया है। सम्राट चौधरी को भाजपा विधायक दल का नेता चुना गया है। इसके साथ ही उनके मुख्यमंत्री बनने का रास्ता साफ हो गया है। राज्य में अब नई सरकार बनने की तैयारी शुरू हो गई है।
बिहार में भाजपा के लिए यह बड़ा मौका माना जा रहा है। लंबे समय बाद पार्टी खुद मुख्यमंत्री बनाने जा रही है। राजनीतिक विश्लेषक इसे बड़ी उपलब्धि मान रहे हैं। इससे पार्टी को राज्य में नई मजबूती मिल सकती है। यह बदलाव सिर्फ चेहरा बदलने तक सीमित नहीं है। इसके पीछे नई रणनीति भी देखी जा रही है।
सम्राट चौधरी का राजनीति से पुराना जुड़ाव रहा है। उन्हें राजनीति विरासत में मिली है। उनके पिता शकुनी चौधरी भी बड़े नेता रहे हैं। सम्राट ने 1990 में राजनीति में कदम रखा था। 1999 में वे कृषि मंत्री बने। इसके बाद उन्होंने लगातार चुनाव जीतकर अपनी पहचान बनाई।
सम्राट चौधरी पहले राजद और जदयू में भी रह चुके हैं। बाद में उन्होंने भाजपा का दामन थामा। यह फैसला उनके करियर का बड़ा मोड़ साबित हुआ। 2018 में उन्हें भाजपा का प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया गया। इसके बाद उनका कद लगातार बढ़ता गया। वे संगठन और सरकार दोनों में मजबूत चेहरा बन गए।
सम्राट चौधरी अपनी खास पहचान के लिए भी जाने जाते हैं। उन्होंने एक समय संकल्प लिया था कि वे अपनी पगड़ी नहीं उतारेंगे। यह उनके राजनीतिक संघर्ष का प्रतीक बना। इस वजह से उन्हें ‘मुरेठाधारी’ नेता कहा जाता है। उनकी यह छवि आज भी चर्चा में रहती है।
सम्राट चौधरी पिछड़ा वर्ग के कुश समुदाय से आते हैं। भाजपा इस समीकरण को मजबूत करना चाहती है। उनके जरिए पार्टी बड़े वोट बैंक को साधने की कोशिश कर रही है। वे अपनी साफ और बेबाक शैली के लिए भी जाने जाते हैं। इससे उनकी राजनीतिक पकड़ और मजबूत हुई है।
अब सबकी नजर 15 अप्रैल को होने वाले शपथ ग्रहण पर है। इसी दिन नई सरकार औपचारिक रूप से काम शुरू करेगी। माना जा रहा है कि इससे बिहार की राजनीति में नया अध्याय शुरू होगा। आने वाले समय में उनके फैसले राज्य की दिशा तय करेंगे।