मोसाद का सीक्रेट मिशन, क्या ईरान के पूर्व राष्ट्रपति को तख्तापलट के लिए बनाया गया एजेंट?
इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद और ईरान के पूर्व राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद को लेकर एक चौंकाने वाला दावा सामने आया है. इजरायल ने कई वर्षों तक अहमदीनेजाद से गुप्त संपर्क बनाए रखने की कोशिश की और उन्हें भविष्य में ईरान के संभावित नेता के रूप में तैयार करने की योजना पर काम किया.

नई दिल्ली: इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद और ईरान के पूर्व राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद को लेकर एक चौंकाने वाला दावा सामने आया है. बता दें, द न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि इजरायल ने कई वर्षों तक अहमदीनेजाद से गुप्त संपर्क बनाए रखने की कोशिश की और उन्हें भविष्य में ईरान के संभावित नेता के रूप में तैयार करने की योजना पर काम किया. लेकिन इस बात में कितनी सच्चाई है इसको लेकर कोई भी आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है.
विश्वविद्यालय सम्मेलन को बनाया गया मुलाकात का माध्यम
रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2024 में हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट में आयोजित एक विश्वविद्यालय सम्मेलन को गुप्त मुलाकात का माध्यम बनाया गया. दावा किया गया है कि इस कार्यक्रम के बहाने अहमदीनेजाद और इजरायली खुफिया अधिकारियों के बीच बातचीत हुई. रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि उस समय मोसाद प्रमुख डेविड बार्निया भी हंगरी पहुंचे थे.
क्या था खुफिया मुलाकात का उद्देश्य
रिपोर्ट में अमेरिकी और ईरानी अधिकारियों के हवाले से दावा किया गया है कि इजरायल लंबे समय से अहमदीनेजाद को अपने प्रभाव में लेने की कोशिश कर रहा था. इसके लिए विदेश यात्राओं और अन्य व्यवस्थाओं में भी मदद की गई. बताया गया कि उद्देश्य भविष्य में ईरान में सत्ता परिवर्तन की किसी संभावित स्थिति में अहमदीनेजाद को प्रमुख भूमिका में लाना था.
फिलहाल IRGC की निगरानी में रखा गया
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि फरवरी 2026 में ईरान पर हुए हमलों के दौरान अहमदीनेजाद को एक सुरक्षित स्थान पर ले जाने का प्रयास किया गया। हालांकि, योजना सफल नहीं हो सकी और बाद में वे उस सुरक्षित ठिकाने से निकल गए. इसके बाद उनकी सार्वजनिक मौजूदगी काफी सीमित रही. रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के कुछ अधिकारियों का दावा है कि फिलहाल अहमदीनेजाद को इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की निगरानी में रखा गया है. हालांकि, इस संबंध में भी कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है.
फिलहाल इस पूरे घटनाक्रम पर इजरायली सरकार, मोसाद और महमूद अहमदीनेजाद की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है. ऐसे में रिपोर्ट में किए गए सभी दावों को स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं किया जा सका है और इन्हें फिलहाल दावों के रूप में ही देखा जा रहा है.


