हिंदुस्तान के 11 'SRIKANTH' को मिलेगा न्याय? केंद्र को SC के निर्देश

Supreme Court News: फिल्म 'श्रीकांत' आपने देखी होगी कि कैसे इसमें राजकुमार राव दृष्टिहीन होने के बाद भी समाज और सरकार से लड़कर तरक्कियों को हासिल करते हैं. ये अकेले दृष्टिबाधित उद्योगपति और बोलंट इंडस्ट्रीज के संस्थापक श्रीकांत बोला की कहानी नहीं है. कुछ ऐसे ही प्रतिभावान UPSC अभ्यर्थियों को लेकर कोर्ट फैसला आया है. जिसके बाद अब सरकार को उन्हें 15 साल बाद नियुक्ति देनी होगी.

JBT Desk
JBT Desk

Supreme Court News: कुछ समय पहले आई तुषार हीरानंदनी के निर्देशन में फिल्म 'श्रीकांत' आपने देखी होगी. इसमें कैसे राजकुमार राव दृष्टिहीन होने के बाद भी तरक्कियों का हासिल करते हैं लेकिन उनको इसके लिए समाज के कड़ी लड़ाई लड़नी पड़ती है. ये फिल्म दृष्टिबाधित उद्योगपति और बोलंट इंडस्ट्रीज के संस्थापक श्रीकांत बोला के जीवन पर आधारित है. हमारे देश में ये कोई नई बात नहीं है. यहां कई ऐसे प्रतिभा के धनी लोग समाज से किसी तरह लड़कर आगे बढ़ते हैं तो सरकार इन्हें किनारे रख देती है. ऐसे ही एक मामले में 9 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट का फैसला आया है जिसमें 11 दृष्टिबाधित UPSC पास अभ्यर्थियों को 15 साल बाद न्याय दिया गया है.

11 दृष्टिबाधित UPSC पास अभ्यर्थियों की कहानी भले ही 'श्रीकांत' से कुछ हद तक अलग हो लेकिन, मोरल ऑफ स्टोरी इसका वहीं है कि कभी सरकार तो कभी समाज इन्हें किनारे रख देता है. अब कोर्ट के फैसले के बाद उनको न्याय मिला है. आइये जानें पूरा मामला क्या है?

3 महीने में मिले नियुक्ति

न्यायमूर्ति अभय एस ओका और पंकज मित्तल की पीठ ने अनुच्छेद 142 के तहत फैसला सुनाया है. सुप्रीम कोर्ट ने संघ लोक सेवा आयोग यानी UPSC की परीक्षा पास करने के बावजूद 2009 से ही ‘दर-दर भटक रहे 11 दृष्टिबाधित अभ्यर्थियों के हक में फैसला दिया है. इसमें कहा गया है कि सरकार तीन महीने के भीतर 11 दृष्टिबाधित व्यक्तियों को आयकर विभाग में नियुक्त करे. क्योंकि, ये सभी दिव्यांगजन अधिनियम, 1995 के अंतर्गत नियुक्ति के लिए पात्र हैं.

क्या था मामला?

100 प्रतिशत दृष्टिहीन पंकज कुमार श्रीवास्तव ने सिविल सेवा परीक्षा, 2008 उत्तीर्ण की थी. उन्होंने IAS, IRS, IRPS, IRS-CE का चुनाव किया था. इसके बाद भी उन्हें नियुक्ति नहीं दी गई. इसमें सरकार की ओर से विभिन्न आपत्तियां दी गईं थी. हालांकि, इसे कैट और दिल्ली उच्च न्यायालय ने खारिज कर दिया था. इसके बाद सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंची थी. इस केस में इसी तरह के अन्य मामले जुड़ गए थे.

कोर्ट ने सरकार को दिए निर्देश

  • सीएसई-2008 की मेरिट सूची शामिल 10 उम्मीदवारों को IRS या अन्य शाखा में PWD उम्मीदवारों की बैकलॉग रिक्तियों पर नियुक्ति का विचार करें
  • नियुक्ति आवश्यक कार्रवाई मंगलवार से तीन महीने के भीतर की जाए. नियुक्त किए गए व्यक्ति को वेतन के बकाया और वरिष्ठता के हकदार नहीं होंगे
  • सेवानिवृत्ति लाभों के उद्देश्य से सेवाओं की गणना उस तिथि से की जाए जब उनकी सीएसई-2008 में PwD के अंतिम उम्मीदवार को नियुक्ति दी गई.
  • निर्देश अनुच्छेद 142 के तहत अधिकारिता के प्रयोग में एक बार के लिए जारी किए गए हैं. इसे किसी तरह का मिसाल नहीं माना जाएगा.
calender
10 July 2024, 01:49 PM IST

जरूरी खबरें

ट्रेंडिंग गैलरी

ट्रेंडिंग वीडियो