मुंबई: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बड़ा तूफान आने वाला है. तृणमूल कांग्रेस के बाद अब उद्धव ठाकरे की शिवसेना पर विभाजन का खतरा मंडरा रहा है. कुछ सूत्रों के मुताबिक, उद्धव गुट के कई नाराज सांसद दिल्ली में हैं और जल्द ही लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात करेंगे.
दिल्ली में बढ़ी हलचल
राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा है कि ये सांसद स्पीकर को एक आधिकारिक पत्र देकर अपनी अलग राह चुन सकते हैं. दिल्ली में काफी हलचल है और गुप्त मुलाकातें हो रही हैं. कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उद्धव ठाकरे द्वारा मुंबई में बुलाई गई एक महत्वपूर्ण बैठक से गायब रहने वाले कुछ सांसदों ने दिल्ली पहुंचकर एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की है.
संजय राउत दिल्ली के लिए रवाना
इन नाराज सांसदों की केंद्रीय मंत्री प्रतापराव जाधव के साथ गुप्त बैठक हुई है. सूत्रों का दावा है कि ये सांसद लोकसभा अध्यक्ष को पत्र सौंपकर अलग गुट बनाने या शिंदे गुट को समर्थन देने का औपचारिक ऐलान कर सकते हैं. शिवसेना (UBT) पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गई है। डैमेज कंट्रोल की जिम्मेदारी संभालते हुए राज्यसभा सांसद संजय राउत दिल्ली के लिए रवाना हो गए हैं. दिल्ली पहुंचने से पहले राउत ने इन दावों को पूरी तरह खारिज किया और कहा कि पार्टी के सभी सांसद एकजुट हैं और उद्धव ठाकरे के सीधे संपर्क में हैं. उन्होंने विरोधियों पर निशाना साधते हुए कहा कि जिन्हें जाना था, वे 2022 में ही जा चुके हैं. अब कोई कहीं नहीं जा रहा.
सांसद उद्धव ठाकरे से क्यों नाराज हैं?
अंदरूनी सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, कुछ सांसद उद्धव ठाकरे के काम करने के तरीके और संवाद की कमी से बेहद नाखुश हैं. सांसदों की मुख्य शिकायत यह है कि जब वे अपनी समस्याओं को लेकर उद्धव ठाकरे से मिलने का समय मांगते हैं, तो उन्हें घंटों इंतजार करना पड़ता है. दिलचस्प बात यह है कि साल 2022 में जब एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में विधायकों ने विद्रोह किया था, तब भी नेतृत्व की कार्यशैली और पहुंच से दूर होने को लेकर ठीक ऐसी ही शिकायतें सामने आई थीं.
आकड़ो का खेल
शिवसेना (UBT) के पास फिलहाल लोकसभा में कुल 9 सांसद हैं. दलबदल विरोधी कानून की कानूनी अड़चनों से बचने और संसद में बिना सदस्यता गंवाए अलग गुट के रूप में मान्यता पाने के लिए कुल संख्या के दो-तिहाई यानी कम से कम 6 सांसदों का समर्थन अनिवार्य है. अभी यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं है कि नाराज सांसद सीधे शिंदे गुट का हिस्सा बनेंगे या पहले एक स्वतंत्र समूह का गठन करेंगे.
अफवाहों को किया खारिज
दूसरी तरफ, आदित्य ठाकरे ने इन सभी चर्चाओं को अफवाह बताते हुए खारिज कर दिया है. उन्होंने कहा कि हमें अपने साथियों पर पूरा भरोसा है. आदित्य और संजय राउत ने विरोधियों के 'ऑपरेशन टाइगर' के कयासों को नकारते हुए दावा किया कि वे खुद विरोधियों को जवाब देने के लिए रणनीति तैयार कर रहे हैं. First Updated : Tuesday, 16 June 2026