‘कुछ दिन अकेले रहिए’ जब पीएम मोदी ने शिवराज को दी खास सलाह, अपनी किताब में बताया पूरा किस्सा

शिवराज सिंह चौहान की नई पुस्तक में प्रधानमंत्री मोदी के साथ उनके रिश्तों और राजनीतिक सफर से जुड़े कई भावुक और दिलचस्प किस्से सामने आए हैं. ‘अपनापन’ नाम की इस पुस्तक का आधिकारिक विमोचन 26 मई को नई दिल्ली में किया जाएगा.

Shraddha Mishra

नई दिल्ली: राजनीति में अक्सर रणनीति और सत्ता की बातें होती हैं, लेकिन कुछ रिश्ते ऐसे भी होते हैं जो भावनाओं और भरोसे पर टिके होते हैं. केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान की नई पुस्तक ‘अपनापन’ में ऐसा ही एक मानवीय और भावुक पक्ष सामने आया है. इस किताब में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अपने लंबे रिश्ते, राजनीतिक उतार-चढ़ाव और निजी अनुभवों को बेहद सरल और आत्मीय अंदाज में साझा किया है. किताब के कई हिस्से यह दिखाते हैं कि राजनीति के कठिन दौर में भी व्यक्तिगत संवेदनाएं कितनी अहम होती हैं.

शिवराज सिंह चौहान ने अपनी पुस्तक में 13 दिसंबर 2023 का एक खास किस्सा साझा किया है. उन्होंने लिखा कि मध्य प्रदेश में नई सरकार के शपथ ग्रहण समारोह के दौरान जब मोहन यादव ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, तब पूरा ध्यान उनकी ओर था. उसी दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनके पास आए और कहा कि समय निकालकर दिल्ली आइए, कुछ जरूरी बातें करनी हैं. शिवराज लिखते हैं कि उस समय उन्हें इस बात का अंदाजा नहीं था कि प्रधानमंत्री पहले ही उनके भविष्य को लेकर योजना बना चुके हैं. बाद में 9 जून 2024 को जब उन्होंने केंद्रीय मंत्री पद की शपथ ली और उन्हें कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्रालय की जिम्मेदारी मिली, तब उन्हें उस बातचीत का महत्व समझ आया.

पहलगाम हमले के बाद लिखने का आया विचार

पुस्तक में शिवराज सिंह ने यह भी बताया कि पहलगाम आतंकी हमले के बाद हुई कैबिनेट बैठक ने उन्हें गहराई से प्रभावित किया. उसी दौरान उनके मन में यह किताब लिखने का विचार आया. उन्होंने लिखा कि उस समय प्रधानमंत्री मोदी सऊदी अरब दौरे पर थे, लेकिन घटना की जानकारी मिलते ही उन्होंने अपना कार्यक्रम बीच में छोड़ दिया और भारत लौट आए. 

शिवराज के अनुसार, कैबिनेट बैठक के दौरान माहौल बेहद गंभीर था, लेकिन प्रधानमंत्री पूरी तरह शांत और दृढ़ नजर आए. उन्होंने लिखा कि प्रधानमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा था कि इस बार की कार्रवाई पहले से अलग होगी और देश के खिलाफ साजिश करने वालों को कहीं भी नहीं छोड़ा जाएगा. शिवराज ने इसे प्रधानमंत्री के मजबूत नेतृत्व और अडिग संकल्प का प्रतीक बताया.

जब चुनावी सूची में नहीं था नाम

किताब में मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव 2023 का भी जिक्र है. शिवराज सिंह चौहान ने लिखा कि जब भाजपा उम्मीदवारों की सूची जारी हुई, तो शुरुआती सूचियों में उनका नाम नहीं था. इससे राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं. इसी दौरान उनके एक बयान को लेकर विपक्ष ने जमकर निशाना साधा. उन्होंने एक सभा में कहा था कि “अगर हम नहीं रहे तो हमें बहुत याद किया जाएगा.” 

शिवराज के अनुसार, विपक्ष ने इस बयान को अलग तरीके से पेश कर यह माहौल बनाने की कोशिश की कि उनका राजनीतिक करियर खत्म हो गया है. उन्होंने लिखा कि कई लोगों ने मजाक उड़ाया और यहां तक कहा कि “मामाजी का राजनीतिक अंत हो गया.” हालांकि शिवराज का कहना है कि उन्होंने इन बातों को ज्यादा महत्व नहीं दिया.

चुनावी माहौल के बीच आया पीएम मोदी का फोन

शिवराज सिंह चौहान ने किताब में एक बेहद भावुक पल का भी जिक्र किया है. उन्होंने बताया कि चुनावी व्यस्तताओं के बीच प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें फोन किया. उस बातचीत ने उन्हें भीतर तक छू लिया. उन्होंने लिखा कि प्रधानमंत्री ने उनसे मुख्यमंत्री की तरह नहीं, बल्कि एक अपने व्यक्ति की तरह बात की. मोदी ने कहा, “आज मैं मुख्यमंत्री से बात नहीं कर रहा हूं, मैं अपने शिवराज से बात कर रहा हूं.” शिवराज के अनुसार, प्रधानमंत्री ने उनसे पूछा कि वह इतने चिंतित क्यों हैं और सलाह दी कि कुछ समय के लिए शांत वातावरण में जाकर खुद को संभालें. 

पीएम की सलाह पर पहुंचे उत्तराखंड

किताब में आगे शिवराज लिखते हैं कि उन्होंने प्रधानमंत्री की सलाह मानी और कुछ समय के लिए उत्तराखंड चले गए. वहां ऋषिकेश के पास गंगा किनारे बैठकर उन्होंने खुद को शांत करने की कोशिश की. उन्होंने लिखा कि बहती गंगा और पहाड़ों के बीच बैठकर उन्हें एहसास हुआ कि प्रधानमंत्री केवल व्यक्तिगत रूप से उनका ख्याल नहीं रख रहे थे, बल्कि यह एक रणनीतिक सोच भी थी ताकि कार्यकर्ताओं का मनोबल बना रहे.

जल्द होगा विमोचन

‘अपनापन’ नाम की इस पुस्तक का आधिकारिक विमोचन 26 मई को नई दिल्ली में किया जाएगा. कार्यक्रम में पूर्व उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू और पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा भी मौजूद रहेंगे. यह किताब सिर्फ राजनीतिक घटनाओं का संग्रह नहीं, बल्कि रिश्तों, संघर्षों और भरोसे की कहानी के रूप में देखी जा रही है.

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