कर्नाटक में CM बदलने की अटकलें तेज...बेंगलुरु पहुंचे मल्लिकार्जुन खरगे, CM पद को लेकर की दी ये बड़ी बात

कर्नाटक में मुख्यमंत्री बदलने की अटकलें तेज होने के बीच कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि इस पर निर्णय केवल आलाकमान करेगा. ढाई साल का कार्यकाल पूरा होने के बाद सत्ता संघर्ष बढ़ गया है. सिद्धारमैया और शिवकुमार दोनों पक्ष सक्रिय हैं.

Utsav Singh
Edited By: Utsav Singh

नई दिल्ली : कर्नाटक में मुख्यमंत्री बदलने को लेकर पिछले कुछ दिनों से लगातार अटकलें तेज़ हैं. ऐसे माहौल में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने स्पष्ट कर दिया कि नेतृत्व परिवर्तन से जुड़े निर्णय केवल पार्टी का आलाकमान ही करेगा. खरगे ने मीडिया से बातचीत में कहा कि फिलहाल उनके पास इस विषय पर कुछ भी कहने के लिए नहीं है और मीडिया इस मामले में अधिक चिंतित होने की आवश्यकता नहीं है. उनका यह बयान ऐसे समय आया जब एक दिन पहले उनकी मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के साथ एक घंटे से अधिक लंबी बैठक हुई थी.

ढाई साल का कार्यकाल पूरा, तनाव बढ़ा 

कर्नाटक में कांग्रेस सरकार के पांच साल के कार्यकाल में से ढाई साल का समय 20 नवंबर को पूरा हो गया है. इसी मिड-टर्म पॉइंट के कारण नेतृत्व परिवर्तन की चर्चाएं फिर से तेज़ हो गई हैं. सत्तारूढ़ दल के भीतर सत्ता संतुलन को लेकर तनाव भी बढ़ा है. सिद्धारमैया ने शनिवार रात खरगे से मुलाकात के बाद कहा था कि वे आलाकमान के निर्णय का सम्मान करेंगे और सभी नेताओं को भी ऐसा करना चाहिए.

खरगे-सिद्धारमैया की लगातार बैठकें
सिद्धारमैया की यह पिछले एक सप्ताह में खरगे से दूसरी मुलाकात थी, जिससे राजनीतिक हलचल और बढ़ गई. हालांकि उन्होंने मीडिया के सामने किसी भी नेतृत्व परिवर्तन की बात को केवल अटकल बताया था. इससे पहले उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के समर्थक कुछ विधायक दिल्ली में खरगे से मिल चुके थे, जिससे यह स्पष्ट होता है कि शिवकुमार गुट नेतृत्व परिवर्तन को लेकर सक्रिय है.

शिवकुमार और सिद्धारमैया के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा
कई सूत्रों के अनुसार, सिद्धारमैया अपने मंत्रिमंडल में फेरबदल चाहते हैं, लेकिन शिवकुमार चाहते हैं कि पार्टी पहले नेतृत्व परिवर्तन पर निर्णय ले. यदि हाईकमान मंत्रिमंडल फेरबदल को मंजूरी देता है तो यह संकेत माना जाएगा कि सिद्धारमैया पूरा पांच साल का कार्यकाल पूरा करने जा रहे हैं ऐसी स्थिति में शिवकुमार की उम्मीदें कमजोर हो सकती हैं.

2013 की तरह दो ध्रुव, पुनः मुकाबला
वैसे यह प्रतिस्पर्धा नई नहीं है. मई 2023 में विधानसभा चुनाव के बाद भी मुख्यमंत्री पद के लिए सिद्धारमैया और शिवकुमार के बीच तीखी दौड़ थी. अंततः सिद्धारमैया को मुख्यमंत्री और शिवकुमार को उपमुख्यमंत्री बनाया गया. उस समय यह भी खबरें आई थीं कि "ढाई-ढाई साल फार्मूला" लागू किया जाएगा, लेकिन पार्टी ने इसे कभी आधिकारिक रूप से स्वीकार नहीं किया.

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