Supreme Court: मानसून के दौरान लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में हुई भारी तबाही, सुप्रीम कोर्ट ने जताई चिंता

Supreme Court: इस साल का मानसून सीजन पहाड़ी क्षेत्रों में परेशानी का पहाड़ बनकर टूटा है. इस मानसून के दौरान लोकप्रिय पर्यटन स्थलों वाले हिल स्टेशनों में भी भारी तबाही देखने को मिला. अब इस पर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताई है.

Manoj Aarya
Edited By: Manoj Aarya

हाइलाइट

  • सीजन के दौरान पहाड़ी क्षेत्रों में होती है पर्यटकों की भीड़
  • विशेषज्ञों की टीम में सरकार और निजी संस्थान होंगे शामिल 
  • जनहित याचिका पर 28 अगस्त को होगी अगली सुनवाई

Supreme Court: इस साल का मानसून सीजन पहाड़ी क्षेत्रों में परेशानी का पहाड़ बनकर टूटा है. इस मानसून के दौरान लोकप्रिय पर्यटन स्थलों वाले हिल स्टेशनों में भी भारी तबाही देखने को मिला. अब इस पर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताई है. साथ ही तबाही के कारणों की जांच करने पर भी सर्वोच्च न्यायालय की ओर से सहमति दी गई है. मामले कीअध्ययन के लिए कमेटी बनाने पर विचार किया जाएगा. सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय हिमालयी क्षेत्र में स्थित सभी 13 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में पारिस्थितिक रूप से नाजुक क्षेत्रों, हिल स्टेशनों, उच्च ऊंचाई वाले क्षेत्रों, बड़े टूरिस्ट क्षेत्रों और पर्यटन स्थलों की वहन क्षमता का पता लगाने के लिए एक विशेषज्ञ की टीम गठित करने का संकेत दिया है. 

सीजन के दौरान पहाड़ी क्षेत्रों में होती है पर्यटकों की भीड़

याचिकाकर्ता को सुनवाई के लिए अगली तारीख 28 अगस्त को दी गई है. जिसमें यह भी निर्देश दिया गया है कि पैनल में कौन-कौन विशेषज्ञ हो सकते हैं और संदर्भ की शर्तें क्या हो सकती हैं, इसका भी सुझाव देना होगा. बता दें कि यह मुद्दा पूर्व आईपीएस अधिकारी अशोक कुमार राघव ने उठाया था, जिन्होंने पहाड़ी क्षेत्रों और उसके आसपास अनियोजित बुनियादी ढांचे के विकास की शिकायत की थी. जनहित याचिका में कहा गया है कि मसूरी, नैनीताल, रानीखेत, चार धाम, जिम कॉर्बेट, बिनसर आदि जैसे गंतव्यों में सीजन के दौरान पर्यटकों की अत्यधिक भीड़ होती है.

विशेषज्ञों की टीम में सरकार और निजी संस्थान होंगे शामिल 

पहाड़ी इलाकों के लिए स्थायी योजना, यातायात और पर्यटक प्रबंधन रणनीतियों को सक्षम करने के लिए वहन क्षमताओं की पहचान जैसे तत्काल हस्तक्षेप की आवश्यकता होती है. पीठ ने कहा कि यह जनहित याचिका ने "गंभीर चिंता का एक बहुत ही महत्वपूर्ण मुद्दा" उठाया है. सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली पीठ ने राघव के वकील आकाश वशिष्ठ से कहा कि वह सभी पारिस्थितिक रूप से नाजुक क्षेत्रों, हिल स्टेशनों की वहन क्षमता का पता लगाने के लिए विशेषज्ञों की एक समिति बनाने का इरादा रखती है.

भारतीय हिमालय क्षेत्र में स्थित सभी 13 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में ऊंचाई वाले क्षेत्र, अत्यधिक भ्रमण वाले क्षेत्र और पर्यटन स्थल हैं. सीजेआई का इरादा इस प्रयास में सरकारी और निजी संस्थानों को भी शामिल करने का है.

ताजा खबरें

ट्रेंडिंग वीडियो

close alt tag