हवाई किराए की मनमानी पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी, केंद्र सरकार और DGCA को जारी किया नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने त्योहारों और खराब मौसम के दौरान हवाई किराए में अत्यधिक बढ़ोतरी को यात्रियों का शोषण बताते हुए कड़ा रुख अपनाया है. अदालत ने केंद्र सरकार और DGCA को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. कोर्ट ने कहा कि एयरलाइंस की मनमानी कीमतें आम लोगों के अधिकारों को प्रभावित करती हैं और जरूरत पड़ी तो न्यायिक हस्तक्षेप किया जाएगा.

नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने त्योहारी सीजन और खराब मौसम के दौरान हवाई किराए में बेतहाशा बढ़ोतरी पर गहरी चिंता जताते हुए साफ संकेत दिए हैं कि यदि जरूरत पड़ी तो न्यायालय इसमें हस्तक्षेप करेगा. शीर्ष अदालत ने कहा कि निजी विमानन कंपनियों द्वारा किराए और अन्य शुल्कों में किए जा रहे अप्रत्याशित उतार-चढ़ाव यात्रियों के साथ सीधा शोषण है. कोर्ट ने इस मुद्दे को गंभीर मानते हुए केंद्र सरकार और नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) से जवाब तलब किया है.
त्योहारों और कुंभ के दौरान यात्रियों का शोषण
केंद्र सरकार और DGCA को नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार और DGCA को औपचारिक नोटिस जारी किया है. कोर्ट का मानना है कि मौजूदा नियामक ढांचा हवाई किराए में हो रही मनमानी को रोकने में नाकाम साबित हो रहा है. सुनवाई के दौरान जस्टिस मेहता ने हल्के अंदाज में यह भी कहा कि भले ही कुछ शहरों में किराए न बढ़े हों, लेकिन कई अन्य रूट्स पर यात्रियों को भारी आर्थिक बोझ झेलना पड़ रहा है. केंद्र सरकार ने जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा है, जिसके बाद अगली सुनवाई 23 फरवरी को तय की गई है.
स्वतंत्र और मजबूत नियामक की जरूरत
यह मामला सामाजिक कार्यकर्ता एस. लक्ष्मीनारायणन द्वारा दायर जनहित याचिका से जुड़ा है, जिसमें नागरिक उड्डयन क्षेत्र के लिए एक मजबूत और स्वतंत्र नियामक स्थापित करने की मांग की गई है. याचिका में कहा गया है कि एयरलाइंस कंपनियां पारदर्शिता के बिना किराया तय कर रही हैं और यात्रियों के हितों की अनदेखी हो रही है. याचिकाकर्ता का कहना है कि मौजूदा व्यवस्था में यात्रियों की सुरक्षा और अधिकारों की प्रभावी निगरानी नहीं हो पा रही है.
मुफ्त बैगेज भत्ते में कटौती पर सवाल
याचिका में यह मुद्दा भी उठाया गया है कि एयरलाइंस ने बिना ठोस कारण के इकोनॉमी क्लास यात्रियों के लिए मुफ्त चेक-इन बैगेज की सीमा 25 किलोग्राम से घटाकर 15 किलोग्राम कर दी है. जो सुविधा पहले टिकट का हिस्सा थी, उसे अब अतिरिक्त कमाई का जरिया बना दिया गया है. केवल एक बैग की अनुमति और अतिरिक्त शुल्क ने यात्रियों की परेशानियां और बढ़ा दी हैं.
मौलिक अधिकारों के उल्लंघन का आरोप
याचिका के अनुसार, एयरलाइंस का अपारदर्शी और शोषणकारी रवैया, जिसमें मनमानी किराया बढ़ोतरी, सेवाओं में एकतरफा कटौती और प्रभावी शिकायत निवारण की कमी शामिल है, नागरिकों के समानता, स्वतंत्र आवाजाही और गरिमापूर्ण जीवन के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है. खासकर त्योहारों और मौसम खराब होने की स्थिति में गरीब और मजबूरी में यात्रा करने वाले यात्रियों को सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ता है.
किराया नियंत्रण के लिए नियम बनाने की मांग
सुप्रीम कोर्ट के समक्ष यह मांग भी रखी गई है कि हवाई किराए पर निगरानी रखने और मांग के नाम पर मनमाने दाम बढ़ाने से रोकने के लिए स्पष्ट और बाध्यकारी नियम बनाए जाएं. अदालत की टिप्पणी से यह साफ है कि आने वाले समय में विमानन कंपनियों की मूल्य निर्धारण नीति पर सख्त नजर रखी जा सकती है.


