प्लेन के पहिये में छिपे दो भाई, लंदन के लिए 5 घंटे का तय किया सफर, फिर खुला लैंडिंग गियर और...
Flight landing Gear: काबुल से दिल्ली फ्लाइट के लैंडिंग गियर में छिपकर आया 13 साल का बच्चा, जिसने 94 मिनट तक मौत से जूझते हुए खतरनाक सफर तय किया.

Flight landing Gear: ट्रेन में बिना टिकट यात्रा करना आम बात है. लोग अक्सर टॉयलेट में, छत पर या खतरनाक हिस्सों में छिपकर सफर करते हैं. लेकिन फ्लाइट में बिना टिकट यात्रा करना सुनकर हर कोई चौंक जाता है. अगर कोई सीट या टॉयलेट में नहीं बल्कि विमान के टायरों के पास बने लैंडिंग गियर (Landing Gear) में छिपकर उड़ान भर ले, तो ये वाकई हैरान कर देने वाला है.
ऐसा ही हुआ काबुल से दिल्ली आई KAM एयरलाइंस की फ्लाइट (RQ-4401) में, जहां एक 13 वर्षीय अफगान बच्चा लैंडिंग गियर में छिपकर भारत पहुंच गया. 94 मिनट तक इस मासूम ने मौत से जूझते हुए खतरनाक सफर तय किया. इस घटना ने एक बार फिर 1996 में प्रदीप और विजय सैनी की दर्दनाक कहानी याद दिला दी.
प्रदीप-विजय सैनी की कहानी
1996 में पंजाब के दो भाई, प्रदीप (22) और विजय सैनी (18) चर्चा में आए थे. उस समय पंजाब में खालिस्तान आतंकियों के खिलाफ अभियान चल रहा था और सुरक्षाबलों को इन भाइयों पर शक था. बार-बार की पूछताछ और परेशानियों से तंग आकर उन्होंने भारत छोड़ने का फैसला किया. लंदन पहुंचने की चाह में दोनों ने एक तस्कर से संपर्क किया, जिसने उन्हें ब्रिटिश एयरवेज की फ्लाइट के लैंडिंग गियर में छिपाकर भेजने की योजना बनाई. लेकिन यह सफर बेहद खतरनाक साबित हुआ.
60 डिग्री तापमान, 10 घंटे का खौफनाक सफर
अक्टूबर की रात दोनों भाई दिल्ली एयरपोर्ट से ब्रिटिश एयरवेज की फ्लाइट में घुसने में कामयाब हो गए. लगभग 40 हजार फीट की ऊंचाई, 6,700 किलोमीटर का सफर और माइनस 60 डिग्री तापमान… ऐसे हालातों में इंसान का बच पाना लगभग नामुमकिन होता है. 10 घंटे की इस उड़ान में विजय की मौत हो गई जबकि प्रदीप बुरी हालत में हीथ्रो एयरपोर्ट पर जिंदा मिले. कर्मचारियों ने उन्हें पूरी तरह भ्रमित और डगमगाते कदमों के साथ देखा. उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां गंभीर हाइपोथर्मिया का इलाज चला और धीरे-धीरे वे ठीक हो पाए.
भाई की मौत से टूटा प्रदीप
प्रदीप ने बाद में कहा था कि दोनों बच जाते तो अलग बात थी, दोनों मर जाते तो भी अलग बात थी, लेकिन मैंने अपना छोटा भाई खो दिया. वो मेरा दोस्त भी था, हम साथ पले-बढ़े थे. उन्होंने बताया कि इस हादसे के बाद वो 6 साल तक डिप्रेशन में रहे. हालांकि लंबे संघर्ष और कानूनी लड़ाई के बाद प्रदीप को ब्रिटेन में रहने की अनुमति मिली. वे अब नॉर्थ लंदन के वेम्बले में रहते हैं, शादी कर चुके हैं और दो बेटों के पिता हैं.
फ्लाइट में छिपकर 'जानलेवा' सफर
विमान के लैंडिंग गियर में बैठकर सफर करना पूरी तरह से अवैध और जानलेवा है. अब तक दुनिया भर में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिनमें ज्यादातर लोग अपनी जान गंवा चुके हैं.
कुछ चर्चित मामले:
2015, जोहान्सबर्ग से लंदन: 11 घंटे की उड़ान में एक यात्री जीवित बच गया, लेकिन दूसरा विमान से गिरकर मर गया.
1969, हवाना से मैड्रिड: 22 वर्षीय अरमांडो सोकारस रामिरेज़ 29,000 फीट ऊंचाई पर छिपकर बच गए, हालांकि उन्हें शीतदंश हो गया.
2014, सैन जोस से हवाई: 15 वर्षीय याह्या अब्दी 5 घंटे की उड़ान में बच गए. अमेरिकी विशेषज्ञों ने इसे चमत्कार बताया.
अन्य मामले: 2000 में फिदेल मारुही (ताहिती से लॉस एंजिल्स), 2002 में विक्टर अल्वारेज (क्यूबा से कनाडा), और 2010 में एक रोमानियाई युवक (वियना से लंदन) जैसे कई लोग ऐसे खतरनाक सफर कर चुके हैं. वहीं 2012 में अंगोला से आई उड़ान से एक शख्स लंदन में नीचे गिरकर मारा गया.


