मिसाइल-ड्रोन के दौर में तीर-कमान का इस्तेमाल! इन देशों की सेनाएं आज भी निभा रही परंपरा

आज के आधुनिक युद्ध के दौर में जहां मिसाइल, ड्रोन और परमाणु हथियारों का बोलबाला है, वहीं ताइवान, चीन, वियतनाम, भूटान और मंगोलिया जैसे देश अब भी अपनी सेनाओं में तीर-कमान जैसे पारंपरिक हथियारों का उपयोग करते हैं. ताइवान की Mountain Company जंगलों में गुप्त ऑपरेशन के लिए तीरों का इस्तेमाल करती है.

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जब दुनिया की सेनाएं हाईटेक मिसाइलें, परमाणु हथियार और ड्रोन टेक्नोलॉजी से लैस हो रही हैं, तब भी कुछ देश ऐसे हैं जहां की सेनाएं आज भी तीर और कमान का इस्तेमाल करती हैं. यह न केवल उनकी रणनीति का हिस्सा है, बल्कि उनकी सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक युद्ध कौशल को भी दर्शाता है.

इन देशों की सेनाएं मानती हैं कि भले ही तीर-कमान आधुनिक हथियारों के सामने सीमित प्रभावी हो, लेकिन जंगलों में गुप्त ऑपरेशन और दुश्मनों पर सटीक, बिना शोर हमले के लिए यह आज भी बेहद कारगर हथियार है. आइए जानते हैं किन देशों की सेनाएं अब भी इस प्राचीन हथियार को अपनी ताकत मानती हैं.

जंगलों में तीरों से हमला

ताइवान की सेना में एक खास यूनिट है जिसे ROC's Mountain Company कहा जाता है. यह यूनिट जंगलों में तैनात की जाती है और इनका काम होता है छिपकर दुश्मनों पर हमला करना और फिर बिना समय गंवाए पीछे हट जाना. इस यूनिट के जवान पारंपरिक तीर और कमान का इस्तेमाल करते हैं जिससे वह बिना शोर मचाए दुश्मनों को निशाना बना सकें.

चीन भी करता है तीरंदाजी का इस्तेमाल

दुनिया की सबसे बड़ी और अत्याधुनिक सेना वाला देश चीन भी कुछ खास परिस्थितियों में तीर और कमान का इस्तेमाल करता है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीन की सेना बॉर्डर एरिया में या दमनकारी मिशनों में तीरंदाजी का उपयोग करती है, खासकर तब जब बिना गोली चलाए दबाव बनाना हो.

वियतनाम में अब भी मिलिट्री मिशनों में तीर-कमान

वियतनाम में भी कुछ क्षेत्रों में सेना आज भी तीर और कमान का प्रयोग करती है.
अमेरिका और वियतनाम युद्ध के दौरान, अमेरिकी पक्ष के लिए लड़ने वाले Montagnards (स्थानीय लड़ाके) कम्युनिस्ट गुरिल्ला सेनाओं के खिलाफ तीर-कमान का ही उपयोग करते थे. आज भी कुछ आदिवासी क्षेत्रों में यह हथियार प्रशिक्षण का हिस्सा है.

भूटान और मंगोलिया में गौरव का प्रतीक है तीरंदाजी

भूटान और मंगोलिया जैसे देशों में तीरंदाजी को सिर्फ सैन्य अभ्यास नहीं बल्कि संस्कृति और राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक माना जाता है. यहां तीरंदाजी को खेल के साथ-साथ आर्मी ट्रेनिंग का भी अहम हिस्सा बनाया गया है.

क्यों आज भी प्रासंगिक है तीर और कमान?

भले ही ये हथियार आज के युग में उतने घातक न लगें, लेकिन गुप्त मिशनों, जंगलों में ऑपरेशन और कम शोर वाले हमलों के लिए ये आज भी उपयोगी हैं. सेना के कई विशेषज्ञ मानते हैं कि तीर-कमान जैसे पारंपरिक हथियार, विशेष मिशनों में चुपचाप और सटीक वार करने में कारगर हो सकते हैं. First Updated : Saturday, 17 May 2025