नई दिल्ली : पश्चिम एशिया की धरती पर मंडराते युद्ध के काले बादलों ने अब सात समंदर पार उत्तर प्रदेश के एक शांत गांव किंतूर तक अपनी तपिश पहुँचा दी है. ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की इजरायली हमले में कथित मौत ने वैश्विक पटल पर हलचल मचा दी है. बाराबंकी जिले का यह छोटा सा गांव आज भारी गम और सन्नाटे में डूबा हुआ है. क्योंकि इस गांव की मिट्टी से खामेनेई परिवार की सदियों पुरानी जड़ें और यादें गहराई से जुड़ी हैं.
आपको बता दें कि बाराबंकी की सिरौली गौसपुर तहसील में स्थित किंतूर गांव का नाम आज अचानक वैश्विक चर्चा का केंद्र बन गया है. दरअसल. खामेनेई के दादा सैयद अहमद मुसावी हिंदी 18वीं और 19वीं सदी के दौरान इसी गांव की आबोहवा में रहते थे. उनके परिवार ने अपनी भारतीय जड़ों की पहचान को चिरस्थायी बनाए रखने के लिए ही 'हिंदी' उपनाम को अपने नाम का अनिवार्य हिस्सा बनाया था. आज भी गांव में कुछ ऐतिहासिक दस्तावेज और पुश्तैनी मकानों के अवशेष मौजूद हैं. जो इस महान जुड़ाव का साक्ष्य देते हैं.
खबर मिलते ही किंतूर गांव की गलियों में एक अजीब सा सन्नाटा और भारी गम पसर गया है. स्थानीय निवासी सैय्यद निहाल मियां ने नम आंखों से कहा कि यह केवल ईरान का नहीं. बल्कि पूरी मानवता का नुकसान है. उनके अनुसार. खामेनेई को लोग केवल एक कड़क राजनेता के तौर पर नहीं. बल्कि एक महान धार्मिक मार्गदर्शक के रूप में जानते थे. जैसे ही टीवी और इंटरनेट पर इस हमले की खबरें और तस्वीरें वायरल हुईं. पूरा गांव गमगीन हो गया और लोग घरों में प्रार्थना करने लगे.
गांव के प्रबुद्ध नागरिक डॉ. रेहान काजमी ने भी गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि यह समय इतिहास का अत्यंत पीड़ादायक पल है. गांव के छोटे-बड़े सभी लोग आज आपस में बैठकर खामेनेई परिवार के किंतूर से पुराने रिश्तों और ऐतिहासिक जड़ों की चर्चा कर रहे हैं. किंतूर के लोग भले ही सामान्य जीवन जीते हों. लेकिन उनके दिलों में इस पुश्तैनी रिश्ते के प्रति गहरा सम्मान है. आज हर ग्रामीण की आंखें इस भीषण युद्ध की दुखद खबर सुनकर पूरी तरह से नम दिखाई दे रही हैं.
ईरान और इजरायल के बीच जारी यह भीषण टकराव अब एक अत्यंत गंभीर अंतरराष्ट्रीय संकट बन चुका है. दोनों तरफ से हो रही लगातार बमबारी और भीषण हमलों ने पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र में भारी अस्थिरता और तनाव पैदा कर दिया है. विश्व के कई शक्तिशाली देशों ने अब संयम बरतने की पुरजोर अपील की है. मगर आम जनता के बीच गहरा डर और भारी चिंता का माहौल बना हुआ है. विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना भविष्य की वैश्विक राजनीति और कूटनीतिक रिश्तों को बदल देगी.
किंतूर गांव ने आज अपनी एक नई और विशिष्ट वैश्विक पहचान स्थापित कर ली है. यहां के लोगों का कहना है कि उन्हें अपनी ऐतिहासिक जड़ों और इस महान पुश्तैनी संबंध पर हमेशा गर्व रहेगा. लेकिन युद्ध की इस भयावह विभीषिका ने उन्हें अंदर तक बुरी तरह झकझोर दिया है. युद्ध की विनाशकारी आग भले ही हजारों किलोमीटर दूर जल रही हो. लेकिन उसका गहरा और भावनात्मक असर बाराबंकी के इस छोटे से गांव की शांत फिजाओं में आज साफ महसूस किया जा रहा है. यह खबर अत्यंत कष्टकारी है. First Updated : Sunday, 01 March 2026