फर्जी आधार, नकली शादी और अवैध मेडिकल प्रक्रिया... 15 साल की लड़की को शादीशुदा दिखाकर निकलवाए अंडाणु

प्रयागराज में 15 वर्षीय नाबालिग को पैसों और मोबाइल का लालच देकर फर्जी दस्तावेजों के सहारे IVF सेंटर में अंडाणु निकासी कराने का मामला सामने आया है. पुलिस ने कई आरोपियों को हिरासत में लेकर जांच शुरू की है.

Shraddha Mishra

प्रयागराज: प्रयागराज के फाफामऊ इलाके से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने सिस्टम की कमजोरियों और लालच के जाल को उजागर कर दिया है. आरोप है कि 15 साल की एक नाबालिग लड़की को पैसों और महंगे मोबाइल का लालच देकर पहले उसकी पहचान बदली गई, फिर उसे बालिग और विवाहित दिखाकर एक IVF सेंटर में उसके अंडाणु निकलवा लिए गए. मामला सामने आने के बाद जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, एक पूरा नेटवर्क जांच के घेरे में आ गया. मामले की शुरुआत तब हुई जब लड़की की मां ने फाफामऊ थाने में शिकायत दर्ज कराई. 

उनका आरोप था कि पड़ोस में रहने वाली पलक और उसकी मां रिंकी उनकी बेटी को काम दिलाने के बहाने अपने साथ ले गईं. शुरुआत में इसे नौकरी का अवसर बताया गया, लेकिन बाद में पैसों का लालच भी दिया गया. मां ने बताया कि कुछ समय से बेटी के व्यवहार में बदलाव नजर आने लगा था. वह बिना बताए घर से बाहर रहने लगी थी और सवाल पूछने पर स्पष्ट जवाब नहीं देती थी. फिर अचानक वह घर से गायब हो गई. तलाश के दौरान जानकारी मिली कि वह एक IVF सेंटर से जुड़ी किसी प्रक्रिया में शामिल है.

चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के सामने दर्ज किया गया बयान

3 फरवरी को लड़की को वन स्टॉप सेंटर भेजा गया, जहां चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (CWC) के सामने उसका बयान दर्ज किया गया. यहीं से मामला गंभीर रूप ले गया. लड़की ने स्वीकार किया कि वह पलक के साथ एक IVF सेंटर गई थी और वहां उसके अंडाणु निकाले गए. उसने पुलिस को बताया कि उसे पैसों और आईफोन का लालच दिया गया था. उसे यह कहकर समझाया गया कि यह सामान्य मेडिकल डोनेशन है. उसे न तो कानूनी स्थिति की जानकारी दी गई और न ही प्रक्रिया के जोखिम समझाए गए.

फर्जी दस्तावेजों के सहारे मेडिकल प्रक्रिया

जांच में सामने आया कि नाबालिग होने के कारण सीधे IVF प्रक्रिया संभव नहीं थी. इसलिए फर्जी पहचान का सहारा लिया गया. पुलिस के अनुसार, सीमा नाम की महिला और उसके बेटे हिमांशु ने लड़की का नकली आधार कार्ड तैयार किया. इस दस्तावेज में उसकी उम्र 18 साल से अधिक दिखाई गई और उसे विवाहित भी दर्शाया गया. इसके बाद उसे एक रजिस्टर्ड एजेंट कल्पना के पास ले जाया गया, जहां कथित तौर पर फर्जी सहमति पत्र (कंसेंट एफिडेविट) तैयार किया गया. इन्हीं कागजों के आधार पर 20 जनवरी को IVF सेंटर में अंडाणु निकासी की प्रक्रिया पूरी की गई.

पुलिस ने शुरु की कार्रवाई

DCP गंगानगर जोन कुलदीप सिंह गुनावत के अनुसार, मां की तहरीर और पीड़िता के बयान के आधार पर मामला दर्ज किया गया है. अब तक पलक, रिंकी, सीमा, हिमांशु और कल्पना को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है. पुलिस दस्तावेजों, डिजिटल उपकरणों और सेंटर के रिकॉर्ड की जांच कर रही है. 

जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या IVF डोनर के नाम पर एजेंटों का कोई अनौपचारिक नेटवर्क सक्रिय है. फर्जी दस्तावेजों की व्यवस्थित तैयारी और पूरी मेडिकल प्रक्रिया का संपन्न होना इस आशंका को मजबूत करता है. विशेषज्ञों का कहना है कि अंडाणु दान एक नियंत्रित और कानूनी प्रक्रिया है, जो केवल बालिग महिलाओं के लिए तय नियमों और मेडिकल जांच के बाद ही की जा सकती है. नाबालिग से अंडाणु लेना गंभीर अपराध है.

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