नोएडा में श्रम विभाग का सख्त एक्शन: 203 एजेंसियां ब्लैकलिस्ट, लाइसेंस रद्द होने वाले, 1.16 करोड़ का जुर्माना

श्रम विभाग ने बड़े एक्शन में 24 कंपनियों से जुड़ी 203 मैनपावर एजेंसियों के लाइसेंस रद्द करने और 1.16 करोड़ रुपये का भारी जुर्माना लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. श्रम कानूनों के उल्लंघन पर यह सख्त कार्रवाई कामगारों के हितों की रक्षा के लिए की गई है.

Goldi Rai
Edited By: Goldi Rai

नोएडा और ग्रेटर नोएडा में श्रमिकों के बढ़ते असंतोष और प्रदर्शनों के बीच उत्तर प्रदेश प्रशासन ने एक साथ कई बड़े कदम उठाए हैं. श्रम विभाग ने मैनपावर एजेंसियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की तैयारी कर ली है, वहीं श्रमिकों को राहत देते हुए 21 प्रतिशत वेतन वृद्धि का ऐलान कर दिया गया है.

इस पूरे घटनाक्रम में पुलिस जांच में प्रदर्शनों के पीछे साजिश और बाहरी कनेक्शनों के संकेत मिले हैं, जिससे मामला और गंभीर हो गया है. प्रशासन अब कानूनी कार्रवाई के साथ-साथ श्रमिकों की मांगों को भी प्राथमिकता दे रहा है.

203 मैनपावर एजेंसियों पर सख्त कार्रवाई

श्रम विभाग ने गौतमबुद्ध नगर में 24 कंपनियों को मैनपावर सप्लाई करने वाली 203 एजेंसियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की तैयारी कर ली है. जांच में पता चला कि इन एजेंसियों ने कर्मचारियों को वैधानिक लाभ नहीं दिए. श्रम कानूनों का उल्लंघन करने वाली इन एजेंसियों पर अब सख्त रुख अपनाया जा रहा है.

कब से लागू होगी 21 प्रतिशत वेतन वृद्धि

श्रमिकों की लंबे समय से चली आ रही मांग को स्वीकार करते हुए उच्चस्तरीय समिति ने 21 प्रतिशत वेतन बढ़ोतरी की सिफारिश की है. गौतमबुद्धनगर और गाजियाबाद में 74 अनुसूचित नियोजनों में काम करने वाले श्रमिकों के वेतन में यह बढ़ोतरी 1 अप्रैल से प्रभावी होगी. नई दरों का भुगतान मई महीने में 7 से 10 तारीख के बीच किया जाएगा.  यह वृद्धि संविदा और स्थायी दोनों प्रकार के कर्मचारियों पर लागू होगी. अधिकारियों ने साफ कहा है कि वेतन से केवल ईपीएफ और ईएसआई की कटौती ही मान्य होगी. किसी भी अन्य कटौती पर सख्त कार्रवाई की जाएगी.

सड़कों पर उतरे कर्मचारी

नोएडा के सेक्टर-8 स्थित एक कंपनी के बाहर शुक्रवार सुबह बड़ी संख्या में कर्मचारियों ने वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया. महिला और पुरुष कर्मचारी कंपनी गेट पर इकट्ठा होकर प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी करने लगे. कर्मचारियों का कहना था कि लंबे समय से वेतन में बढ़ोतरी नहीं हुई है, जबकि काम का दबाव लगातार बढ़ रहा है. सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे और बातचीत के बाद स्थिति को नियंत्रित किया.

इसी तरह यमुना सिटी के सेक्टर-24ए स्थित एक बड़ी मोबाइल निर्माण कंपनी में भी कर्मचारियों ने वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर आवाज उठाई. शिफ्ट बदलने के दौरान बड़ी संख्या में कर्मचारी एकत्र हुए और नारेबाजी की, जिसके बाद अधिकारियों ने हस्तक्षेप कर स्थिति संभाली.

उच्चस्तरीय समिति का औद्योगिक इकाइयों का दौरा

श्रमिकों के आंदोलन को देखते हुए शासन द्वारा गठित उच्चस्तरीय समिति ने विभिन्न औद्योगिक इकाइयों का दौरा किया और वहां काम कर रहे कर्मचारियों से बातचीत की. समिति के सदस्य डॉ. एमकेएस सुन्दरम ने इकोटेक-3 स्थित एक फैक्ट्री का निरीक्षण किया, जहां कर्मचारियों को दी जा रही सुविधाओं और स्किल डिवेलपमेंट ट्रेनिंग का जायजा लिया गया. इस दौरान यह भी देखा गया कि किस प्रकार कर्मचारी आत्मनिर्भर बनने की दिशा में काम कर रहे हैं.

प्रदर्शन के पीछे साजिश के संकेत, पुलिस जांच तेज

श्रमिक प्रदर्शनों को लेकर पुलिस जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं. पुलिस का दावा है कि यह प्रदर्शन अचानक भड़का हुआ गुस्सा नहीं, बल्कि एक सुनियोजित साजिश का हिस्सा हो सकता है. जांच में सामने आया है कि कर्मचारियों को क्यूआर कोड के जरिए व्हाट्सऐप ग्रुप से जोड़ा गया था, जिन्हें तमिलनाडु और कर्नाटक से संचालित किया जा रहा था.  

इन ग्रुपों के माध्यम से भड़काऊ संदेश भेजकर श्रमिकों को उकसाया गया. सीसीटीवी फुटेज में 8 से 9 संदिग्ध लोगों को हुलिया बदलकर भीड़ में घुसते हुए देखा गया है. जांच में कुछ मोबाइल नंबर नेपाल से जुड़े पाए गए हैं, जबकि अन्य संदिग्ध कनेक्शनों की भी पड़ताल की जा रही है. पुलिस का कहना है कि कई आरोपियों की पहचान हो चुकी है और जल्द ही गिरफ्तारी की जाएगी.

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