नई दिल्ली: ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की खबर सामने आने के बाद देशभर के मुस्लिम धर्मगुरुओं में गहरा शोक और नाराजगी देखी जा रही है. अंतरराष्ट्रीय और सोशल मीडिया पर आई रिपोर्ट्स के बाद भारत के विभिन्न शहरों में धार्मिक नेताओं की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं.
लखनऊ समेत कई स्थानों पर धर्मगुरुओं ने इस कथित हमले को अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवता के खिलाफ बताते हुए इसकी कड़ी निंदा की है. उनका कहना है कि रमजान के पवित्र महीने में हुई यह घटना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है और यदि यह खबर सत्य है तो यह पूरी उम्मत और इंसानियत के लिए बड़ा सदमा है.
शिया धर्मगुरु मौलाना कल्बे जवाद ने खामेनेई की शहादत की खबर पर तीन दिन के शोक की घोषणा की है. उन्होंने उम्मते मुस्लिमा और इंसानियत में विश्वास रखने वाले लोगों से अपील की है कि वे अपने प्रतिष्ठान बंद रखकर शोक व्यक्त करें.
उन्होंने बताया कि रात 8 बजे छोटा इमामबाड़ा में विशेष शोकसभा आयोजित की जाएगी, जिसके बाद कैंडल मार्च निकाला जाएगा. देशभर के शिया समुदाय से एक ही समय पर शोकसभाएं आयोजित कर एकजुटता दिखाने की अपील की गई है.
धर्मगुरु मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने घटना की निंदा करते हुए कहा कि ईरान एक स्वतंत्र राष्ट्र है और उस पर इस प्रकार का हमला अंतरराष्ट्रीय कानूनों की अवहेलना है. उन्होंने कहा कि किसी भी संप्रभु देश पर सैन्य कार्रवाई वैश्विक शांति के लिए गंभीर खतरा बन सकती है.
उन्होंने रमजान के महीने में हुई इस घटना को अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से निष्पक्ष जांच और शांति बहाली की अपील की.
शिया धर्मगुरु मौलाना यासूब अब्बास ने कहा कि यदि यह खबर सही है तो यह मुस्लिम जगत के लिए गहरा आघात है. उन्होंने कहा, "शहादत से विचार और आंदोलन समाप्त नहीं होते.''
उनका कहना था कि किसी भी नेतृत्व को खत्म करने से उसकी विचारधारा खत्म नहीं होती, बल्कि कई बार वह और मजबूत होकर सामने आती है.
शिया चांद कमेटी के अध्यक्ष मौलाना सैफ अब्बास ने इसे इंसानियत में विश्वास रखने वालों के लिए बड़ा सदमा बताया. उन्होंने शांति और न्याय में विश्वास रखने वाले देशों और संगठनों से इस मुद्दे पर स्पष्ट और ठोस रुख अपनाने की अपील की.
उन्होंने कहा कि यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऐसी घटनाओं पर ठोस प्रतिक्रिया नहीं दी गई तो क्षेत्रीय अस्थिरता और बढ़ सकती है. First Updated : Sunday, 01 March 2026