उत्तराखंड सरकार की तैयारी, हिमनदी खतरों से बचाव के लिए स्थापित होगा वार्निंग सिस्टम
मानसून से पहले ही त्तराखंड सरकार ने प्राकतिक आपदा से निपटने के लिए प्रयास शुरू कर दिए है. इसके तहत EWS जैसे सिस्टम स्थापित किए जा रहे है.

उत्तराखंड: मानसून का मौसम जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है, उत्तराखंड सरकार ने प्राकतिक आपदा से निपटने के लिए प्रयास शुरू कर दिए है. बता दें, राज्य की संवेदनशील हिमालयी स्थलाकृति को देखते हुए टेक्नोलॉजी बेस्ड वर्किंग सिस्टम और व्यापक जोखिम आकलन पर खास पर ध्यान दिया जा रहा है.
इसी रणनीति के तरहट सोमवार को राज्य सचिवालय में मुख्य सचिव आनंद बर्धन की अध्यक्षता में हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में अधिकारियों ने भूकंप पूर्व चेतावनी प्रणाली (Earthquake Early Warning System), राष्ट्रीय भूकंपीय जोखिम न्यूनीकरण कार्यक्रम (National Seismic Risk Reduction Programme) और हिमनदी झील विस्फोट बाढ़ (glacial lake outburst flood) के खतरे से निपटने की रणनीतियों सहित प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं की स्थिति की समीक्षा की. जिसका प्रमुख पहलू हिमनदी झीलों पर ध्यान देना था.
सचिव विनोद कुमार सुमन ने क्या कहा?
आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास सचिव विनोद कुमार सुमन ने मुख्य सचिव को वडिया इंस्टिट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी द्वारा की गई प्रगति के बारे में जानकारी दी. सचिव विनोद कुमार सुमन ने कहा, "हम वसुंधरा झील को एक पायलट साइट के रूप में विकसित कर रहे हैं, जहां अत्याधुनिक प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली और निगरानी तंत्र स्थापित किए जा रहे हैं."
"इस मॉडल को राज्य की अन्य संवेदनशील हिमनदी झीलों में भी दोहराया जाएगा, जिससे ग्लो-लोफ (GLOF) की घटनाओं के खिलाफ वैज्ञानिक रूप से मजबूत सुरक्षा कवच तैयार होगा."
मुख्य सचिव ने वाडिया संस्थान को 2026-28 की अवधि के लिए एक विस्तृत, समयबद्ध कार्यसूची प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है. इस कार्यसूची में न केवल निगरानी शामिल है, बल्कि आपदा जोखिमों को कम करने के लिए नियंत्रित जल निकासी और झील के जलस्तर में कमी जैसे संरचनात्मक उपाय भी शामिल हैं. राज्य अपने भूकंप चेतावनी अवसंरचना को भी महत्वपूर्ण रूप से उन्नत कर रहा है.
मानसून खतरों से बचने की तैयारी
वर्तमान में 169 सेंसर और 112 सायरन सक्रिय हैं, जबकि 500 नए ‘तीव्र कंपन’ सेंसर और 526 अतिरिक्त चेतावनी सायरन लगाने की योजना है. आईआईटी रुड़की के सहयोग से सिस्टम के रखरखाव पर जोर दिया जा रहा है। राज्य उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में नई भूकंपीय वेधशालाएं भी स्थापित करेगा. साथ ही, चमोली, उत्तरकाशी और पिथौरागढ़ में 48 संवेदनशील स्थलों की पहचान कर जोखिम के आधार पर श्रेणीकरण किया गया है, ताकि मानसून के दौरान संभावित खतरों को कम किया जा सके.


